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सीबीआई ने शुरू की आरक्षण से जुड़े विवादों की पड़ताल

Wed, 07 Feb 2018 11:48 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
इलाहाबाद ब्यूरो Updated Wed, 07 Feb 2018 11:48 PM IST
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सीबीआई की टीम ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में आरक्षण से जुड़ी शिकायतों की पड़ताल शुरू कर दी है। टीम यह जानना चाहती है कि अगर पदों का आरक्षण तय करना विभागों की जिम्मेदारी है तो आयोग किस आधार पर लंबे समय तक यह काम खुद करता रहा। सीबीआई की नजर कृषि तकनीकी सहायक परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद अपनाई गई प्रक्रिया पर है, जिसके तहत आरक्षित पदों की संख्या में बड़ा फेरबदल किया गया।
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आयोग में आरक्षण को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बनी रही। आयोग ने पीसीएस-2011 में त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था लागू कर दी थी। इसको लेकर बड़ा विवाद हुआ था। प्रदेश भर में प्रतियोगियों ने उग्र आंदोलन किया था। सरकार के हस्तक्षेप के बाद आयोग को अपना निर्णय वापस लेते हुए त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करना पड़ा और इसके बाद परिणाम भी संशोधित करना पड़ा। आरक्षण को लेकर दूसरा बड़ा विवाद कृषि तकनीकी सहायक परीक्षा को लेकर हुआ। नतीजा कि लोक सेवा आयोग की ओर से 6628 पदों के लिए आयोजित कृषि तकनीकी सहायक परीक्षा का परिणाम हाईकोर्ट ने गलत आरक्षण प्रक्रिया का पालन किए जाने के कारण परिणाम रद्द कर दिया था।
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आयोग ने कृषि तकनीकी सहायक के 6628 पदों का विज्ञापन 20 अक्तूबर 2013 को जारी किया था। इसमें 3316 पद सामान्य वर्ग, 566 पद ओबीसी के लिए, 2211 पद अनुसूचित जाति के लिए और 235 पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए गए थे। लिखित परीक्षा के बाद और साक्षात्कार से पूर्व आयोग ने ऑफिस मेमोरेंडम जारी कर इन पदों में फेरबदल कर दिया था। सामान्य के पदों को 3616 से घटाकर 2515 और ओबीसी के 566 पदों को बढ़ाकर 2030 कर दिया था। इसी प्रकार से एससी की सीटें 1882 कर दी गईं थीं। विवाद बढ़ने पर आयोग ने आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया से खुद को अलग कर दिया।
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अगस्त-2017 में आयोग के सचिव की ओर से पत्र जारी कर कहा गया कि विभाग अपने स्तर से पदों के आरक्षण का निर्धारण करें और इसके बाद आयोग को अधियाचन भेजें। सचिव ने यह भी कहा था कि विभाग पदों का आरक्षण तय किए बगैर अधिचायन भेजते हैं तो आयोग उसे वापस कर देगा। सचिव ने कहा था कि आयोग का काम परीक्षा का आयोजन करना है। पदों के आरक्षण निर्धारण की जिम्मेदारी विभागों की है। अब सीबीआई यह जांच-पड़ताल कर रही है कि नियमत: पदों के आरक्षण निर्धारण की जिम्मेदारी विभागों के पास है तो आयोग लंबे समय तक किस आधार पर पदों का आरक्षण तय करता रहा और इसकी आड़ में किन लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
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