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प्रमुख संदिग्ध लोगों का लाई डिटेक्टर टेस्ट भी
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 18 Jan 2017 01:11 AM IST
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विख्यात लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ.बंसल हत्याकांड में दो-तीन प्रमुख संदिग्ध लोगों के बयान की हकीकत जानने के लिए लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने पर विचार हो रहा है। ये दोनों जीवन ज्योति हॉस्पिटल के कर्मचारी हैं। उनके बयान पर एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को अब भी संदेह बना हुआ है।
जीवन ज्योति हॉस्पिटल में बृहस्पतिवार शाम करीब सात बजे चैंबर के भीतर डॉ.एके बंसल के कत्ल के दौरान तीन कर्मचारी शैलेंद्र पाठक, प्रशांत और स्वदेश मौजूद थे मगर इन तीनों ने ही अब तक एसटीएफ की पूछताछ कुछ भी खास नहीं बताया है। शैलेंद्र के सामने शूटर ने डॉक्टर को गोलियां मारी थीं लेकिन वह तो बदमाश का न हुलिया बता रहा है न और कुछ और जानकारी दे रहा है।
जांच टीम को उम्मीद थी कि वह शूटरों के बारे में ऐसी जानकारी दे सकता है जो काफी अहम होंगी। उन तीनों के अलावा डॉ.बंसल की ओपीडी के दौरान चैंबर के बाहर मौजूद रहने वाले सुपरवाइजर और गार्ड भी संदिग्ध हैं जो घटना के वक्त कहीं और मौजूद थे। रिशेप्सनिस्ट नूरी से भी पूछताछ हो चुकी है लेकिन कोई क्लू नहीं मिला। इन सभी को सोमवार देर शाम तक पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। एसटीएफ और पुलिस के अधिकारी इन छह कर्मचारियों को संदिग्ध मान रहे हैं। अगर जल्द ही इस हत्याकांड का खुलासा होने लायक ठोस सुराग नहीं मिलता है तो मजबूरन पुलिस संदिग्धों में दो-तीन कर्मचारियों का झूठ पकड़ने के लिए लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने पर सोच सकती है। इस टेस्ट के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी।
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माघ मेले के शिविरों में भी शूटर की तलाश
पांच दिन से शूटरों की तलाश में भटक रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने माघ मेला के शिविरों में भी नजर लगा दी है। डॉ.बंसल को गोलियां मारने के बाद दोनों शूटर हॉस्पिटल के पिछले गेट से बाई का बाग की तरफ भागे थे। वे किधर भाग सकते हैं? इस सवाल पर मंथन के दौरान जांच से जुड़े अफसरों के सामने माघ मेला का भी नाम आया। माघ मेला के हजारों शिविर में दूर-दूर से आए साधु-संत तथा कल्पवासी ठहरे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि शूटरों ने किसी परिचित कल्पवासी के शिविर में पनाह ली हो। इस दिशा में जांच की जा रही है कि अगर शूटर पूर्वांचल के किसी जिले से आए होंगे तो संभव है कि वे अब भी एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की घेराबंदी से बचने के लिए माघ मेला में ही छिपे हों। इसी संभावना के चलते एक टीम को माघ मेला के शिविरों पर नजर रखने में लगाया गया है।
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जीवन ज्योति हॉस्पिटल में बृहस्पतिवार शाम करीब सात बजे चैंबर के भीतर डॉ.एके बंसल के कत्ल के दौरान तीन कर्मचारी शैलेंद्र पाठक, प्रशांत और स्वदेश मौजूद थे मगर इन तीनों ने ही अब तक एसटीएफ की पूछताछ कुछ भी खास नहीं बताया है। शैलेंद्र के सामने शूटर ने डॉक्टर को गोलियां मारी थीं लेकिन वह तो बदमाश का न हुलिया बता रहा है न और कुछ और जानकारी दे रहा है।
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जांच टीम को उम्मीद थी कि वह शूटरों के बारे में ऐसी जानकारी दे सकता है जो काफी अहम होंगी। उन तीनों के अलावा डॉ.बंसल की ओपीडी के दौरान चैंबर के बाहर मौजूद रहने वाले सुपरवाइजर और गार्ड भी संदिग्ध हैं जो घटना के वक्त कहीं और मौजूद थे। रिशेप्सनिस्ट नूरी से भी पूछताछ हो चुकी है लेकिन कोई क्लू नहीं मिला। इन सभी को सोमवार देर शाम तक पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। एसटीएफ और पुलिस के अधिकारी इन छह कर्मचारियों को संदिग्ध मान रहे हैं। अगर जल्द ही इस हत्याकांड का खुलासा होने लायक ठोस सुराग नहीं मिलता है तो मजबूरन पुलिस संदिग्धों में दो-तीन कर्मचारियों का झूठ पकड़ने के लिए लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने पर सोच सकती है। इस टेस्ट के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी।
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माघ मेले के शिविरों में भी शूटर की तलाश
पांच दिन से शूटरों की तलाश में भटक रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने माघ मेला के शिविरों में भी नजर लगा दी है। डॉ.बंसल को गोलियां मारने के बाद दोनों शूटर हॉस्पिटल के पिछले गेट से बाई का बाग की तरफ भागे थे। वे किधर भाग सकते हैं? इस सवाल पर मंथन के दौरान जांच से जुड़े अफसरों के सामने माघ मेला का भी नाम आया। माघ मेला के हजारों शिविर में दूर-दूर से आए साधु-संत तथा कल्पवासी ठहरे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि शूटरों ने किसी परिचित कल्पवासी के शिविर में पनाह ली हो। इस दिशा में जांच की जा रही है कि अगर शूटर पूर्वांचल के किसी जिले से आए होंगे तो संभव है कि वे अब भी एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की घेराबंदी से बचने के लिए माघ मेला में ही छिपे हों। इसी संभावना के चलते एक टीम को माघ मेला के शिविरों पर नजर रखने में लगाया गया है।