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अतीक अहमद और उनके तीन समर्थकों के असलहे निरस्त

Thu, 22 Dec 2016 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 22 Dec 2016 02:12 AM IST
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Atiq and his three supporters fireworks canceled
अतीक अहमद (फाइल फोटो)
शियाट्स बवाल में पूर्व सांसद अतीक अहमद के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज होने के बाद से उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बुधवार रात जिलाधिकारी संजय कुमार ने पूर्व सांसद समेत उनके तीन आपराधिक छवि वाले करीबियों का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया। पुलिस की रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने यह कार्रवाई की है। 
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शियाट्स बवाल में नाम सामने आने के बाद से पुलिस ने पूर्व सांसद और उनके करीबियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई में तेजी ला दी थी। दो दिन पहले पुलिस ने अतीक और उनके समर्थकों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस की रिपोर्ट पर डीएम ने अतीक अहमद की पिस्टल और रायफल का लाइसेंस निरस्त कर दिया। उनके तीन करीबियों में इमरान की दोनाली, रफत उल्ला पुत्र रहमत उल्ला की रिवॉल्वर और राजरूपपुर निवासी कमलेश सिंह की रायफल और दोनाली बंदूक का लाइसेंस निरस्त कर दिया। बुधवार को खुल्दाबाद थाने की पुलिस ने अटाला इलाके में रहने वाले जावेद अहमद तथा चकिया निवासी मोहम्मद ईशा के राइफल के लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी। 
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-सच तो यह है कि शियाट्स प्रकरण में अतीक कंपनी के लोगों की गिरफ्तारी के नाम पर पुलिस सिर्फ दिखावा कर रही है। पिछले चार रोज से पुलिस लगातार रात में एसपी यमुनापार नैनी तथा शहर के थानों की पुलिस और सीओ के साथ खुल्दाबाद थाने में जुटते हैं। वहां मीडिया को फोनकर बुलाया जाता है। इसके बाद पुलिस मीडिया के कैमरों के सामने करेली और खुल्दाबाद में कुछ घरों में छापेमारी की औपचारिकता करती है। ऐसे में समझा जा सकता है कि कोई आरोपी क्यों पुलिस को नहीं मिल रहा। इतना प्रचार करने के बाद पुलिस दबिश पर जाएगी तो कौन मिलेगा। वैसे भी पुलिस में अतीक एंड कंपनी के मुखबिरों की कमी नहीं है। खुल्दाबाद और करेली थाने में तो अतीक कंपनी के लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
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इलाहाबाद। शियाट्स में बवाल के एक हफ्ते बाद भी 65 नामजद और अज्ञात आरोपियों में महज दो की गिरफ्तारी हो सकी है तो यह पुलिस की सरासर नाकामी ही कही जाएगी। आलम यह है कि बयान दर्ज कराने के लिए जारी नोटिस को भी मुख्य आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद ने गंभीरता से नहीं लिया। वह बुधवार को दिन भर कानपुर की सभा के लिए अपने कार्यालय में बैठकों के जरिए तैयारी में जुटे रहे।
शियाट्स में पिछले बुधवार की शाम अतीक एंड कंपनी ने उत्पात किया था। उस घटना को अब पूरे एक सप्ताह हो गए हैं। शियाट्स के मीडिया प्रभारी डॉ. रमाकांत दुबे ने अतीक अहमद समेत पांच लोगों को नामजद करते हुए 50-60 अज्ञात लोगों पर बलवा, डकैती, हमले का केस दर्ज कराया था।

यूं एफआईआर के मुताबिक शियाट्स के भीतर बवाल की घटना में नामजद और अज्ञात समेत 65 लोग शामिल रहे। मगर पुलिस एक हफ्ते में सिर्फ दो आरोपियों सैफ और सिराज को गिरफ्तार कर सकी है। पिछले चार रोज से रात में एसपी यमुनापार, एसपी सिटी दो-तीन सीओ और पांच थानों की पुलिस फोर्स आरोपियों की तलाश में करेली और खुल्दाबाद में छापेमारी कर रही है लेकिन किसी को को पकड़ा नहीं जा सका। शियाट्स की घटना में शामिल लोग रोज अतीक के काफिले में साथ रहते हैं मगर पुलिस उन्हें रात में खोजने का दिखावा करती है।


इस घटना में इतनी किरकिरी के बावजूद सपा के कानपुर कैंट से विधानसभा चुनाव के घोषित प्रत्याशी अतीक पर पुलिस हाथ नहीं डाल सकी। इस केस में डकैती की धारा ही ऐसी थी, जिसमें गिरफ्तारी हो सकती है लेकिन एसएसपी ने कहा है कि अतीक पर वह धारा लागू नहीं होती क्योंकि शियाट्स में टैब लूटने में उनका नाम नहीं है। पुलिस अफसरों ने सोमवार को चकिया में अतीक के निवास पर जाकर विवेचक के सामने पेश होकर बयान दर्ज कराने का नोटिस दिया लेकिन लखनऊ से लौटकर भी अतीक बयान दर्ज कराने की बजाय बृहस्पतिवार को कानपुर के कैंट इलाके में होने वाली सभा की तैयारी में लगे रहे। चकिया में उनके कार्यालय में शाम तक तमाम समर्थकों की आवाजाही बनी रही। शियाट्स प्रकरण में गिरफ्तारी टीम का नेतृत्व कर रहे एसपी यमुनापार अशोक कुमार का इस बाबत कहना है कि धरपकड़ हो रही है। आरोपी फरार हो गए हैं मगर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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