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आश्रम की झोपड़ियों में भड़की आग, महंत की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 19 Mar 2016 01:34 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दारागंज इलाके में शुक्रवार दोपहर आश्रम की झोपड़ियों में आग लगने से एक बुजुर्ग महंत की दम घुटने से मौत हो गई। आग लगने के बाद झोपड़ियों में रहने वाले लोग भाग निकले। फायर ब्रिगेड के पहुंचने पर आग काबू पाया गया। धुआं कम होने पर फायरकर्मी अंदर घुसे तो अंदर टीन शेड के कमरे में महंत औंधे मुंह जमीन पर पड़े थे। दारागंज पुलिस और फायर ब्रिगेड महंत को एसआरएन ले गई। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कौशाम्बी के पिपरी सरैंया के रामसनेही दास (70) अविवाहित थे। वह पिछले बीस सालों से दारागंज के मोरी गेट के आश्रम बनाकर रहते थे। महंत राम सनेही के अलावा आश्रम में उनके छोटे भाई सीताराम और पांच शिष्य भी रहते थे। आश्रम के बगल ही कुछ लोग झोपड़ी बनाकर रहते थे। शुक्रवार दोपहर एक महिला झोपड़ी खाना बना रही थी। चूल्हे से निकली चिंगारी से झोपड़ी में आग लग गई। देखते ही देखते आग फैलकर दूसरी झोपड़ियों और आश्रम तक पहुंच गई। आग लगने के बाद लोग जान बचाकर निकल भागे। झोपड़ियों को धू-धूकर जलते देख आसपास के लोग दौड़े और आग पर काबू पाने का प्रयास करने लगे। दोपहर में तेज हवा थी। जिसके चलते आग का दायरा बढ़ता गया। हवा का झोंका आश्रम की ओर होने से भड़की आग ने आश्रम को चपेट में ले लिया। सूचना पर फायर ब्रिगेड के जवान पहुंचे।
एक दमकल गाड़ी आग नहीं बुझा सकी तो दूसरी गाड़ी बुलाया गया। तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। धुआं कुछ कम हुआ तो फायरमैन धर्मेंद्र कुमार मिश्र अंदर घुसे। अंदर टीन शेड के कमरे महंत को जमीन पर औंधे मुंह पड़ा देख सन्न रह गए। आनन-फानन में महंत को बाहर निकालकर एसआरएन अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने पर मायूसी हाथ लगी। महंत की दम घुटने के चलते मौत हो चुकी थी। वहीं फायरमैन धर्मेंद्र मिश्र का कहना था कि आग लगने के बाद आसपास के लोग भाग निकले। समय रहते पता चल गया होता कि कोई संत अंदर फंसे हैं तो उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था।
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आग लगने के बाद तख्त पर लेटे महंत ने बाहर निकलने का प्रयास किया। लेकिन चारों तरफ आग और धुआं होने के चलते ही बाहर नहीं निकल पाए। जब उन्हें बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझा तो आशंका है कि दम घुटने लगा तो धुएं से बचने के लिए जमीन पर लेट गए। जिसके चलते अंदर ही दम घुटने से मौत हो गई। अनहोनी की इस घटना को सुनकर महंत के भाई और शिष्य भी आ गए। गुरु की मौत से शिष्य गमगीन थे। उनकी आंखों में आंसू थे। वे कह रहे थे कि रोज वे भी उनके साथ बाहर निकल जाते थे लेकिन आज उनकी मौत आई थी। जिसके चलते वे अंदर ही आराम कर रहे थे।
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कौशाम्बी के पिपरी सरैंया के रामसनेही दास (70) अविवाहित थे। वह पिछले बीस सालों से दारागंज के मोरी गेट के आश्रम बनाकर रहते थे। महंत राम सनेही के अलावा आश्रम में उनके छोटे भाई सीताराम और पांच शिष्य भी रहते थे। आश्रम के बगल ही कुछ लोग झोपड़ी बनाकर रहते थे। शुक्रवार दोपहर एक महिला झोपड़ी खाना बना रही थी। चूल्हे से निकली चिंगारी से झोपड़ी में आग लग गई। देखते ही देखते आग फैलकर दूसरी झोपड़ियों और आश्रम तक पहुंच गई। आग लगने के बाद लोग जान बचाकर निकल भागे। झोपड़ियों को धू-धूकर जलते देख आसपास के लोग दौड़े और आग पर काबू पाने का प्रयास करने लगे। दोपहर में तेज हवा थी। जिसके चलते आग का दायरा बढ़ता गया। हवा का झोंका आश्रम की ओर होने से भड़की आग ने आश्रम को चपेट में ले लिया। सूचना पर फायर ब्रिगेड के जवान पहुंचे।
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एक दमकल गाड़ी आग नहीं बुझा सकी तो दूसरी गाड़ी बुलाया गया। तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। धुआं कुछ कम हुआ तो फायरमैन धर्मेंद्र कुमार मिश्र अंदर घुसे। अंदर टीन शेड के कमरे महंत को जमीन पर औंधे मुंह पड़ा देख सन्न रह गए। आनन-फानन में महंत को बाहर निकालकर एसआरएन अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने पर मायूसी हाथ लगी। महंत की दम घुटने के चलते मौत हो चुकी थी। वहीं फायरमैन धर्मेंद्र मिश्र का कहना था कि आग लगने के बाद आसपास के लोग भाग निकले। समय रहते पता चल गया होता कि कोई संत अंदर फंसे हैं तो उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था।
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आग लगने के बाद तख्त पर लेटे महंत ने बाहर निकलने का प्रयास किया। लेकिन चारों तरफ आग और धुआं होने के चलते ही बाहर नहीं निकल पाए। जब उन्हें बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझा तो आशंका है कि दम घुटने लगा तो धुएं से बचने के लिए जमीन पर लेट गए। जिसके चलते अंदर ही दम घुटने से मौत हो गई। अनहोनी की इस घटना को सुनकर महंत के भाई और शिष्य भी आ गए। गुरु की मौत से शिष्य गमगीन थे। उनकी आंखों में आंसू थे। वे कह रहे थे कि रोज वे भी उनके साथ बाहर निकल जाते थे लेकिन आज उनकी मौत आई थी। जिसके चलते वे अंदर ही आराम कर रहे थे।