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पीएसी के जवान की मौत पर मेजारोड चौराहे पर चक्काजाम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Feb 2016 01:11 AM IST
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पीएसी के जवान की मौत पर बृहस्पतिवार को मेजारोड चौराहे पर परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। परिजनों संग ग्रामीणों ने चौराहे पर शव रख चक्काजाम किया। करीब चार घंटे तक रास्ता पूरी तरह से बाधित रहा। बाद में सीओ जितेंद्र दूबे ने पीएसी के कमांडेंट से वार्ता करने के बाद उनकी हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया तब जाकर चक्काजाम समाप्त हुआ। बता दें कि सोरांव (मेजारोड) गांव के बालकृष्ण शुक्ल के सात बेटों में सबसे बड़े कुशल चन्द्र शुक्ल (40) पीएसी कानपुर में सिपाही थे। साल भर पहले कुशल चन्द्र निलंबित हो गए थे।
12 दिसंबर 2015 को हाईकोर्ट के डायरेक्शन पर वे बहाल हुए थे। परिजनों का कहना है कि इस बीच कई दफे कुशल चन्द्र कमांडेंट का दरवाजा खटखटाए लेकिन उन्हें ज्वाइन ही नहीं कराया गया। बल्कि उनका शोषण किया जाता रहा। इसको लेकर आरोप है कि कुशल चन्द्र डिप्रेशन में आ गए। बुधवार को कुशल चन्द्र माघ मेले में गंगा स्नान करने गए थे कि वहीं हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बृहस्पतिवार को शव मेजारोड चौराहे पर लाकर चक्काजाम कर दिया।
उनका आरोप था कि अगर, पीएसी के कमांडेंट बहाली के बाद ज्वाइन करा देते तो शायद कुशल चन्द्र डिप्रेशन की स्थिति में न आते और उनकी हार्ट अटैक से मौत न होती। चक्काजाम की सूचना पर मौके पर सीओ जितेंद्र दूबे, मेजारोड चौकी इंचार्ज मनमोहन मिश्र सहित कई थाने की फोर्स पहुंच गई। चार घंटे तक चले चक्काजाम के बाद सीओ ने विभाग के कमांडेंट से वार्ता कर उनकी हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया तब जाकर चक्काजाम समाप्त हो सका। कुशल चन्द्र को दो पुत्र और एक पुत्री हैं। पति की मौत से पत्नी कंचन देवी का रो रोकर बुरा हाल है। चार घंटे तक चले चक्काजाम से पूरा यातायात बाधित रहा।
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12 दिसंबर 2015 को हाईकोर्ट के डायरेक्शन पर वे बहाल हुए थे। परिजनों का कहना है कि इस बीच कई दफे कुशल चन्द्र कमांडेंट का दरवाजा खटखटाए लेकिन उन्हें ज्वाइन ही नहीं कराया गया। बल्कि उनका शोषण किया जाता रहा। इसको लेकर आरोप है कि कुशल चन्द्र डिप्रेशन में आ गए। बुधवार को कुशल चन्द्र माघ मेले में गंगा स्नान करने गए थे कि वहीं हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बृहस्पतिवार को शव मेजारोड चौराहे पर लाकर चक्काजाम कर दिया।
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उनका आरोप था कि अगर, पीएसी के कमांडेंट बहाली के बाद ज्वाइन करा देते तो शायद कुशल चन्द्र डिप्रेशन की स्थिति में न आते और उनकी हार्ट अटैक से मौत न होती। चक्काजाम की सूचना पर मौके पर सीओ जितेंद्र दूबे, मेजारोड चौकी इंचार्ज मनमोहन मिश्र सहित कई थाने की फोर्स पहुंच गई। चार घंटे तक चले चक्काजाम के बाद सीओ ने विभाग के कमांडेंट से वार्ता कर उनकी हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया तब जाकर चक्काजाम समाप्त हो सका। कुशल चन्द्र को दो पुत्र और एक पुत्री हैं। पति की मौत से पत्नी कंचन देवी का रो रोकर बुरा हाल है। चार घंटे तक चले चक्काजाम से पूरा यातायात बाधित रहा।
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