{"_id":"5b9c17c6867a557f032ac7c3","slug":"111536956358-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शासन को सौंपी रैगिंग मामले की रिपोर्ट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शासन को सौंपी रैगिंग मामले की रिपोर्ट
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में सामने
आई प्राक्टोरियल बोर्ड की लापरवाही
0 शासन को तीन सदस्यीय जांच दल ने सौंपी रिपोर्ट, ड्रेस कोड बना कंटक
0 दोषियों पर कार्रवाई के लिए शिकायत न होने का बहाना
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ/ इलाहाबाद। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी छात्रों के साथ हुई रैगिंग के मामले में तीन सदस्यीय जांच दल ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में रैगिंग के ड्रेस कोड का छात्रों को पालन करते हुए पाया गया। वहीं कॉलेज के प्राक्टोरियल बोर्ड और एंटी रैगिंग सेल की लापरवाही भी सामने आई है। अब देखना है कि रैगिंग के इस सनसनीखेज मामले में शासन क्या रुख अपनाता है।
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में 27 अगस्त को एबीबीएस के नवप्रवेशी छात्रों के रैगिंग का मामला देश भर में चर्चित हुआ। छात्रों पर जबरन ड्रेेस कोड थोपना, शर्ट की तीसरी बटन लाल लगाने के साथ उन्हें मेस में मुर्गा बनाकर मारापीटा गया। कुछ छात्रों की पैंट फाड़कर शारीरिक उत्पीड़न भी किया गया। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो हड़कंप मच गया। विधान परिषद में विपक्ष ने सरकार को घेरा। शासन ने रैगिंग मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी।
टीम सदस्यों में अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एनसी प्रजापति, कानपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार और एडीएम सिटी इलाहाबाद अशोक कुमार शामिल थे। टीम ने कॉलेज में आकर प्रपत्र जुटाए और छात्रों से बातचीत की। सूत्र बताते हैं कि रैगिंग के दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित छात्रों से शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना या शोषण की शिकायत नहीं मिलने की बात कही गई है। कॉलेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि छात्रों की तरफ से कोई शिकायत प्राक्टोरियल बोर्ड से भी नहीं की गई।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में छात्रों का बयान लिखा गया है, जिसमें उन्होंने बताया कि जो ड्रेस खरीदी उसमें लाल बटन लगा मिला था। ड्रेस कोड और छोटे बाल, लाल बटन जैसी जानकारी को नजरअंदाज किया गया। जांच टीम कॉलेज प्रशासन की ओर से कार्रवाई न करने पर सवाल उठाए हैं। अब कार्रवाई शासन के रुख पर निर्भर करेगी। शासन भी कॉलेज प्रशासन पर कुपित है। कुछ न मिला तो ड्रेस कोड कई जिम्मेदारों के लिए कंटक बन जाएगा।
विज्ञापन
आई प्राक्टोरियल बोर्ड की लापरवाही
0 शासन को तीन सदस्यीय जांच दल ने सौंपी रिपोर्ट, ड्रेस कोड बना कंटक
0 दोषियों पर कार्रवाई के लिए शिकायत न होने का बहाना
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ/ इलाहाबाद। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी छात्रों के साथ हुई रैगिंग के मामले में तीन सदस्यीय जांच दल ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में रैगिंग के ड्रेस कोड का छात्रों को पालन करते हुए पाया गया। वहीं कॉलेज के प्राक्टोरियल बोर्ड और एंटी रैगिंग सेल की लापरवाही भी सामने आई है। अब देखना है कि रैगिंग के इस सनसनीखेज मामले में शासन क्या रुख अपनाता है।
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में 27 अगस्त को एबीबीएस के नवप्रवेशी छात्रों के रैगिंग का मामला देश भर में चर्चित हुआ। छात्रों पर जबरन ड्रेेस कोड थोपना, शर्ट की तीसरी बटन लाल लगाने के साथ उन्हें मेस में मुर्गा बनाकर मारापीटा गया। कुछ छात्रों की पैंट फाड़कर शारीरिक उत्पीड़न भी किया गया। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो हड़कंप मच गया। विधान परिषद में विपक्ष ने सरकार को घेरा। शासन ने रैगिंग मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी।
विज्ञापन
टीम सदस्यों में अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एनसी प्रजापति, कानपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार और एडीएम सिटी इलाहाबाद अशोक कुमार शामिल थे। टीम ने कॉलेज में आकर प्रपत्र जुटाए और छात्रों से बातचीत की। सूत्र बताते हैं कि रैगिंग के दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित छात्रों से शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना या शोषण की शिकायत नहीं मिलने की बात कही गई है। कॉलेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि छात्रों की तरफ से कोई शिकायत प्राक्टोरियल बोर्ड से भी नहीं की गई।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में छात्रों का बयान लिखा गया है, जिसमें उन्होंने बताया कि जो ड्रेस खरीदी उसमें लाल बटन लगा मिला था। ड्रेस कोड और छोटे बाल, लाल बटन जैसी जानकारी को नजरअंदाज किया गया। जांच टीम कॉलेज प्रशासन की ओर से कार्रवाई न करने पर सवाल उठाए हैं। अब कार्रवाई शासन के रुख पर निर्भर करेगी। शासन भी कॉलेज प्रशासन पर कुपित है। कुछ न मिला तो ड्रेस कोड कई जिम्मेदारों के लिए कंटक बन जाएगा।