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हाईकोर्ट की टिप्पणी : डरा धमकाकर कर शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म, आरोप पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Mon, 16 Sep 2024 01:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 16 Sep 2024 01:17 PM IST
सार

मामला वर्ष 2018 में एडीजीपी आगरा के आदेश पर महिला थाने पर दर्ज हुआ। पीड़िता ने राघव और उनके पूरे परिवार पर आरोप लगाए। कहा कि वर्ष 2016 में राघव के परिजन उसके घर रिश्ता लेकर पहुंचे थे। लेकिन पीड़िता के परिजनों ने रिश्ते से इंकार कर दिया।

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Creating physical relations by intimidation is rape, petition challenging the charge sheet rejected
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डरा कर महिला से ली गई सहमति के बाद शारीरिक संबंध बनाना भी दुष्कर्म है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की अदालत ने आगरा के राघव की ओर से दुष्कर्म के आरोप पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

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मामला वर्ष 2018 में एडीजीपी आगरा के आदेश पर महिला थाने पर दर्ज हुआ। पीड़िता ने राघव और उनके पूरे परिवार पर आरोप लगाए। कहा कि वर्ष 2016 में राघव के परिजन उसके घर रिश्ता लेकर पहुंचे थे। लेकिन पीड़िता के परिजनों ने रिश्ते से इंकार कर दिया। हालांकि, पीड़िता और राघव के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहा। इसी बीच पीड़िता सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली चली गई।
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2017 में दिल्ली पहुंचे राघव ने बीमार मां को खून देने की कहानी सुना कर उसे अपने घर ले गया। जहां पीड़िता का खूब स्वागत सत्कार भी हुआ। इसी दौरान उसने चाय पी और बेहोश हो गई। जब जागी तब उसके साथ अनहोनी हो चुकी थी। जब रिपोर्ट करने की बात कही, तो राघव ने खुद की कनपटी पर रिवाल्वर रख दी, और शादी के लिया हामी भराई। इसके बाद राघव के परिजनों ने सगाई की रस्म की उसे अंगूठी भेट की और राघव ने उसकी मांग भर दी। शादी के बाद वह कई जगह संग घूमे और शारीरिक संबंध बनाए।

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वेतन भी छीन लेता था राघव

कुछ दिन बाद दोनो फिर से दिल्ली चले गए। पीड़िता के अनुसार इस दौरान उसने प्राइवेट नौकरी भी की, उसे मिलने वाली वेतन राघव जबरदस्ती छीनने लगा। इसके बाद तंग आई पीड़िता ने आगरा के एडीजीपी से संपर्क कर महिला थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना कर राघव के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं ने आरोप पत्र आगरा के ट्रायल कोर्ट ने दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ राघव ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राघव के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने थे।

कोर्ट ने कहा...

कोर्ट ने राघव की दलील सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि भले ही वर्षो तक पीड़िता संग सहमति से शारीरिक संबंध बने हो, लेकिन पहली बार नशे की हालत में बनाया गया। उसके बाद खुद की कनपटी पर बंदूक रख कर डरा कर शादी की सहमति ली गई। इससे सिद्ध होता है कि बनाया गया शारीरिक संबंध डरा और भ्रम में डाल कर ली गई सहमति के आधार पर बनाया गया। इसे स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता। लिहाजा, प्रथम दृष्टया मामला दुष्कर्म का है।

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