किराएदारी विवाद : दो सीओ, दो दरोगा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश कोर्ट ने दिया आदेश
अदालत ने कहा कि लोक सेवक द्वारा किए गए कृत्यों के संबंध में अभियोजन संचालन की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। विपक्षी गण के द्वारा विधि के अधीन दिए गए निर्देश की अवहेलना करते हुए अंतिम आख्या प्रस्तुत करने की गलत सूचना देने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने का प्रथम दृष्टया अपराध प्रतीत होता है।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शिवकुटी थाने के तत्कालीन प्रभारी क्षेत्राधिकारी चतुर्थ एवं एक अन्य दरोगा सहित चार के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत करने का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है। यह आदेश सीजेएम हरेंद्र नाथ ने जानकी जायसवाल के प्रार्थना पत्र पर अधिवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र, शिवेंद्र जायसवाल व आबिद अली को सुन कर दिया है। मामला किराएदारी के विवाद से जुड़ा हुआ है।
अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रयागराज को आदेश दिया है कि विपक्षी गण के विरुद्ध समुचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना कराना सुनिश्चित करें और दस दिन के भीतर कोर्ट को की गई कार्यवाही से अवगत कराएं।
अदालत ने कहा कि लोक सेवक द्वारा किए गए कृत्यों के संबंध में अभियोजन संचालन की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। विपक्षी गण के द्वारा विधि के अधीन दिए गए निर्देश की अवहेलना करते हुए अंतिम आख्या प्रस्तुत करने की गलत सूचना देने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने का प्रथम दृष्टया अपराध प्रतीत होता है, जो कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध से संबंधित है। इसलिए समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार किए जाने योग्य है।
हनुमानगंज निवासी जानकी जायसवाल ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 के अंतर्गत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में तत्कालीन थाना प्रभारी शिवकुटी पंकज कुमार सिंह, तत्कालीन विवेचना अधिकारी थाना शिवकुटी, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी चतुर्थ प्रयागराज, तत्कालीन सहायक जन सूचना कार्यालय क्षेत्राधिकारी चतुर्थ प्रयागराज को पक्षकार बनाया है।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि जानकी जायसवाल की दुकान एडीए शॉपिंग कांप्लेक्स अपट्रान चौराहा पर है, जिसमें गयादीन शर्मा 3,000 प्रति माह का किराएदार है।
जून 2016 से उसने किराया देना बंद कर दिया। दुकान के फर्जी कागज तैयार करके कब्जा करने की धमकी दे रहा था। 21 मई 2018 को आवेदिका अपनी मां के साथ दुकान पर गई। उसने गयादीन शर्मा से बकाए किराए की रकम मांगी, जिस पर गयादीन शर्मा और दुकान पर उसके दो अज्ञात साथियों ने आवेदिका के साथ अभद्र व्यवहार कर गालियां दीं और उसकी मां को मारा पीटा।
इसका मुकदमा न्यायालय के आदेश पर 30 जुलाई 2018 को शिवकुटी थाने में दर्ज हुआ। गंभीर धाराओं का लोप करते हुए यह मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचक के द्वारा बयान भी दर्ज नहीं किया गया, विवेचक अपने कर्तव्य और दायित्व का निर्वहन करने में असफल रहे। आवेदिका ने क्षेत्राधिकारी के कार्यालय में जाकर पूछताछ की तो ज्ञात हुआ कि कोई अंतिम आंख्या नहीं पेश हुई है।