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Court : मारपीट के मामले में पिता-पुत्र दोषी, एक साल की परिवीक्षा पर रिहा
Fri, 19 Jun 2026 07:48 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 19 Jun 2026 07:48 PM IST
सार
जिला अदालत ने 21 साल पुराने मारपीट के मामले में पिता-पुत्र को दोषी करार दिया। हालांकि, उनकी अधिक उम्र को देखते हुए व आपराधिक इतिहास न होने के आधार पर दोनों को एक साल की सदाचरण परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला अदालत ने 21 साल पुराने मारपीट के मामले में पिता-पुत्र को दोषी करार दिया। हालांकि, उनकी अधिक उम्र को देखते हुए व आपराधिक इतिहास न होने के आधार पर दोनों को एक साल की सदाचरण परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट रजनीश कुमार मिश्र ने दिया। लालापुर क्षेत्र निवासी श्याम लाल उर्फ लल्ला निषाद और उनके बेटे ताराचंद्र निषाद के खिलाफ 2005 में घूरपुर थाने में गैर-इरादतन हत्या के प्रयास मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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अभियोजन के अनुसार 28 अप्रैल 2005 की शाम तीरथ राम निषाद नाव से जा रहे थे। आरोप है कि जमीन विवाद को लेकर नाव में मौजूद श्याम लाल उर्फ लल्ला निषाद, उनके पुत्र ताराचंद्र और एक अन्य ने तीरथ राम पर हमला कर दिया। नाव में पड़े पटरे से की गई मारपीट में तीरथ राम गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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श्याम लाल उर्फ लल्ला निषाद और ताराचंद्र निषाद के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2005 से 2026 तक दोनों के खिलाफ किसी अन्य आपराधिक गतिविधि का रिकॉर्ड नहीं है। श्याम लाल उर्फ लल्ला निषाद की 75 वर्ष तो ताराचंद्र निषाद की उम्र 50 साल है। दोनों लंबे समय से मुकदमे का सामना कर रहे हैं, जो स्वयं एक प्रकार का दंड है।
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अदालत ने अपराधी परिवीक्षा अधिनियम के तहत दोनों दोषियों को एक साल की सदाचरण परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। दोनों को प्रत्येक तीन माह में जिला प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपनी गतिविधियों की जानकारी देनी होगी। साथ ही प्रत्येक दोषी पर पांच-पांच हजार रुपये की क्षतिपूर्ति भी लगाई है। राशि में से आठ हजार रुपये घायल तीरथ राम निषाद के परिजनों को प्रदान किए जाने का आदेश दिया है।
क्या होता है परिवीक्षा का लाभ?
परिवीक्षा का अर्थ है कि दोषी को अपराध सिद्ध होने के बावजूद तत्काल जेल नहीं भेजा जाता। उसे कुछ शर्तों के साथ समाज में रहने का अवसर दिया जाता है। इस अवधि में उसे अच्छा आचरण बनाए रखना होता है। किसी नए अपराध में शामिल नहीं होना होगा। यदि वह शर्तों का उल्लंघन करता है तो अदालत उसे फिर तलब कर मूल सजा दे सकती है।