{"_id":"61e71e4b4210b00a8b45a474","slug":"court-does-not-interfere-in-the-matter-of-investigation-on-becoming-a-cognizable-offence-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : संज्ञेय अपराध बनने पर विवेचना के मामले में कोर्ट का दखल नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : संज्ञेय अपराध बनने पर विवेचना के मामले में कोर्ट का दखल नहीं
Wed, 19 Jan 2022 01:38 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Jan 2022 01:38 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि संज्ञेय अपराधों के बनने पर विवेचना के मामले में कोर्ट दखल नहीं देगी। न ही पुलिस की विवेचना को रोकेगी।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि संज्ञेय अपराधों के बनने पर विवेचना के मामले में कोर्ट दखल नहीं देगी। न ही पुलिस की विवेचना को रोकेगी। अगर कोई अपराध असंज्ञेय नहीं बनता है या विवेचना न्याय हित में न हो तभी कोर्ट हस्तक्षेप करेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल व न्यायमूर्ति साधना रानी (ठाकुर) की खंडपीठ ने बुलंदशहर जिले के अनूपशहर थाने के अनिल कुमार राठौर की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा है कि संज्ञेय अपराधों में केवल अपवाद स्वरूप मामलों में ही विवेचना में हस्तक्षेप किया जा सकता है। मामले में याची की ओर से हाईकोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज की गई दो एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी। याची की ओर से तर्क दिया गया कि एफआईआर के मुताबिक अपराध दिल्ली में हुआ है
विज्ञापन
जबकि एफआईआर बुलंदशहर के अनूपशहर थाने में दर्ज की गई है। मामला बुलंदशहर के सीमाक्षेत्र के बाहर का है। थाना अनूपशहर के संबंधित अधिकारी ने अवैध रूप से प्राथमिकी दर्ज की है। इसके साथ ही याची ने कहा कि मामले में उसे झूठा फंसाया गया है।
विज्ञापन