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Coronavirus : जिंदगी ने छोड़ा साथ, अंतिम यात्रा में अपनों ने भी नहीं लगाया हाथ

Wed, 19 May 2021 01:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 19 May 2021 01:27 AM IST
सार

  • कोरोना संक्रमण से मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए घाट पर आने के लिए तैयार नहीं परिवार के लोग
  • अप्रैल-मई में ऐसे तीस से ज्यादा ऐसे मामले आए सामने, जिसमें लावारिस के तौर पर हुआ जलाए गए शव

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Coronavirus: Life gave up, not even loved ones in the last journey
कोरोना से मौत - फोटो : पीटीआई

विस्तार

फतेहपुर जिले के विनोद कुमार राय की स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में मौत हो गई। वह कोरोना संक्रमित थे। विनोद का शव पोस्टमार्टम हाउस से 17 मई को फाफामऊ घाट पर ले जाया गया। यहां उनके परिजन अंतिम संस्कार कराए बिना ही चले गए। फाफामऊ स्थित कोविड घाट पर यह अकेले इकलौती घटना नहीं है, आए दिन किसी न किसी का लावारिस में ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है। उनके अपने ही घाट नहीं पहुंच रहे हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं, जो मौत की सूचना मिलने पर आने में असमर्थता जताते हैं। कुछ को कोरोना से मरने वाले का चेहरा देखना भी गंवारा नहीं। कुछ ने तो फोन ही बंद कर दिया।

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Coronavirus: Life gave up, not even loved ones in the last journey
कोरोना का कहर - फोटो : पीटीआई

कोविड अंतिम संस्कार के नोडल ऑफिसर डॉ. महानंद बताते हैं कि अप्रैल और मई में ऐसे करीब तीस से ज्यादा मामले आ चुके हैं। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें संक्रमित की मौत पर परिजनों ने घाट पर आने से ही मना कर दिया। फोन से संपर्क किया गया तो जवाब मिला कि शव जला दिया जाए। उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। डिप्टी सीएमओ राकेश पांडेय कहते हैं कि अप्रैल में इस तरह के मामले अधिक आए। उस दौरान अस्पतालों से लेकर होम आइसोलेशन में भी लोग मर रहे थे। अकेले अप्रैल में ही दो दर्जन के करीब ऐसे शव आए जिनके परिजनों ने अंतिम संस्कार की रस्म नहीं निभाई। मई में भी अब तक 15 मामले आ चुके हैं। इनमें से कई मामलों में घरवालों ने जवाब में न आने को कहा। कुछ में परिजनों ने फोन तक नहीं उठाया।

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Coronavirus: Life gave up, not even loved ones in the last journey
prayagraj news : दारागंज घाट पर आमतौर पर यह दृश्य देखने को नही मिलता, मंगलवार को घाट किनारे कई शवों को एक साथ अंतिम संस्कार करते दिखे लोग। - फोटो : prayagraj
डॉक्टर पांडेय ने बताते हैं कि मौत के बाद ऐसे लोगों का शव तीन दिन तक पोस्टमार्टम हाउस में रखा जा रहा है। तीन दिन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी वीडियोग्राफी कराई जा रही है। तब उसका अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। ऐसा कोरोना की दूसरी लहर में ही नहीं, बल्कि पहली लहर में भी हुआ था। लोग अंतिम संस्कार में नहीं आना चाहते। जबकि, घाट पर मृतक का चेहरा दिखाने के साथ दाग देना, मुखाग्नि देने जैसी प्रक्रियाओं को पूरा पालन कोविड नियमों के अंतर्गत किया जा रहा है। 

संक्रमण से डर बड़ी वजह

अधिकतर मामलों में परिवार वालों ने इसलिए आने से मना कर दिया क्योंकि उनको भी अपने संक्रमित होने का डर था। कोविड संक्रमितों की मौत पर उनके अंतिम संस्कार का जिम्मा नगर निगम के हवाले हैं। निगम के कर्मचारी जब परिवार वालों कोे फोन कर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कहते हैं तो संक्रमण का डर बताकर आने से मना दिया जाता है। नाते-रिश्तेदार तो बात भी नहीं करना चाहते। 
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