कोरोना वैक्सीन : आठ दिन में सिर्फ 2542 नौनिहालों को ही लग सका टीका
एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र को देखते हुए 12 से 14 साल के बच्चों को कोरोना से बचाव के लिए शुरू हुए टीकाकरण में निर्धारित लक्ष्य पूरा करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
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बड़े-बुजुर्गों के बाद बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जीवन रक्षक मंगल टीका लगाने की शुरुआत भले तो हो गई, लेकिन अभियान की सुस्त चाल ने चिंता बढ़ा दी है। अब तक अभियान शुरू होने के आठ दिन बाद भी जिले में सिर्फ 2542 बच्चों को ही टीका लग सका है। जबकि, 12 से 14 साल के 2,53,711 के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कहा जा रहा है कि यही हाल रहा तो बच्चों को सुरक्षित करने का लक्ष्य हासिल करने में लंबा समय लग सकता है।
एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र को देखते हुए 12 से 14 साल के बच्चों को कोरोना से बचाव के लिए शुरू हुए टीकाकरण में निर्धारित लक्ष्य पूरा करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। शहर में टीकाकरण के लिए 10 और ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के टीकाकरण के लिए 20 सीएचसी पर केंद्र बनाए गए हैं। बच्चों के टीकाकरण को लेकर शुरू हुए अभियान को लेकर केंद्रों के बारे में भी अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। टीकाकरण को लेकर अभिभावक भी पूरे निश्चिंत है।
हालांकि, केंद्रों पर पहुंच रहे कुछ अभिभावकों में से जब बात की गई, तब उनका कहना था कि जब सरकार और टीका तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने उसे हर कसौटी पर परखा है, तो ऐसे में वह चिंता क्यों करें। लेकिन, अभियान की सुस्त चाल से जाहिर है कि अभी जिस रफ्तार से लोगों को बच्चों को सुरक्षित कराने के लिए बूथों पर आना चाहिए, नहीं आ रहे हैं।
हालांकि इसके बीच ऐसे भी लोग हैं जिनमें बच्चों को टीका लगवाने के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। वो अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में टीकाकरण के नोडल अधिकारी डॉ. उत्सव सिंह के मुताबिक सेंटर पर प्रतिदिन 12 से 14 साल के 50 से 55 बच्चों का टीकाकरण हो रहा है। दूसरे केंद्रों पर भी इसी तरह टीकाकरण की रफ्तार है।
हालांकि स्वास्थ्य महकमा जोर दे रहा है कि नए सत्र की शुरूआत में बच्चों के स्कूल जाने से पहले उन्हें कोरोना से बचाव के लिए कम से कम टीके की एक डोज अवश्य दे दी जाए। ताकि, उनको सुरक्षित रखा जा सके। स्कूल प्रबंधन और प्रशासन का भी कहना है कि इसके लिए वह बच्चों के अभिभावकों को भी संदेश भेजकर उन्हें टीकाकरण कराने के लिए प्रोत्सहित कर रहे हैं। ताकि, नए सत्र में पहले जैसे कक्षाओं का संचालन हो सके।
15 से 17 साल के 94 फीसदी किशोरों को मिल चुकी है पहली डोज
कोरोना से बचाव के लिए 15 से 17 साल के किशोरों के टीकाकरण की शुरूआत तीन जनवरी से हुई थी। इसके बाद किशोरों के टीकाकरण को लेकर तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में इस उम्र के 6.17 लाख, 617 किशोरों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें स्कूलों से लेकर घर -घर तक जाकर चलाए गए अभियान का ही असर है कि जिले में निर्धारित लक्ष्य में 94.26 फीसदी किशोरों को पहली डोज दी जा चुकी है।
कोरोना टीकाकरण के दूसरी डोज लेने वाले किशोरों में 39.57फीसदी को दूसरी डोज दी जा चुकी है। कोरोना प्रतिरक्षाकरण अधिकारी डॉ. तीरथलाल के अनुसार दूसरी डोज का लक्ष्य पूरा करने के लिए भी हर तरह से प्रयास जारी हैं। टीकाकरण में आई कमी के पीछे स्कूलों में चल रही परीक्षाएं भी हैं। परीक्षा बाद अभियान में तेजी आने की उम्मीद है।
12 से 14 साल के बच्चों के टीकाकरण के लिए इन केंद्रों पर जाएं
एमएलएन मेडिकल कालेज,टीबी सप्रू अस्पताल, बेली, राजकीय टीबी अस्पताल,लाल बहादुर शास्त्री राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, दारागंज आईयूपीएचसी, ईएसआई,नैनी, मनोहर दास क्षेत्रीय नेत्र चिकित्सालय,डफरिन अस्पताल, मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय।
हम लोगों के लिए वैक्सीन देरी से आई। संक्रमण से बचाव के लिए हम पहले से ही टीकाकरण का इंतजार कर रहे थे। बृहस्पतिवार को पहली डोज ले ली है। - आदित्य
क्लास के ज्यादातर बच्चे टीकाकरण करा रहे हैं। जिससे स्कूल में पहले जैसी स्थिति बन सके। -अन्वेशा
बहुत अच्छा लग रहा है। टीके की पहली डोज मिल गई। 28 दिन बाद दूसरी डोज मिलेगी। -अवनी
टीकाकरण को लेकर कोई शंका नहीं है। बच्चों में भी उत्साह है। बुधवार को बेटी का टीकाकरण कराया और बृहस्पतिवार को बेटे को भी पहली डोज मिल गई। -हरेंद्र राय
घर में सभी का वैक्सीनेशन हो चुका है। सिर्फ बेटी ही बची है। आज उसको भी टीके की पहली डोज मिल गई। - अमित शुक्ला
घर में सभी बड़ों ने वैक्सीन ले ली है। सिर्फ बच्चे ही बचे हुए थे। उनका भी अब टीकाकरण हो गया। जहां तक टीके को लेकर भ्रांति की बात है, तो सरकार जब आगे आ रही है, तो हम पीछे क्यों रहें। -डीके सिंह