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corona third Wave : बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाएगा एस रिसेप्टर

Sun, 23 May 2021 11:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 23 May 2021 11:20 PM IST
सार

  • विशेषज्ञों ने कहा, खेलकूद-खानपान से बढ़ाएं बच्चों की इम्युनिटी, संक्रमण से बचेंगे
  • तीसरी लहर के खतरे से बचाव की तैयारी, ओपीडी में एक फीसदी बच्चों में लक्षण

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corona third wave: S receptor will protect children from the third wave of corona
children - फोटो : istock

विस्तार

बच्चों को कोरोना की तीसरी संभावित लहर में संक्रमण से बचाने में उनका एसरिसेप्टर सहायक होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता ऐसी होती है, जिससे वह लड़ सकते हैं, संक्रमण से बच सकते है। संक्रमित हुए भी बड़ों की अपेक्षा जल्द स्वस्थ होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खेलकूद और खानपान से बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाएं। घर से बाहर कम ले जाएं, फास्ट और जंक फूड से परहेज करें, फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें। इन एहतियातों से बच्चे कोरोना संक्रमण से बचे रहेंगे।

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कोरोना की दूसरी लहर में 1 से 12 वर्ष के जिन तीन हजार से अधिक बच्चों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उनमें पांच को छोड़कर सभी होम आइसोलेशन में स्वस्थ हुए। अब इन बच्चों में एंटीबॉडी बनी है, लेकिन तीसरी लहर का खतरा सामने खड़ा है। ऐसे में उन्हें संक्रमण से बचाने की चुनौती बनी है।

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corona third wave: S receptor will protect children from the third wave of corona
Coronavirus Children - फोटो : पिक्साबे

संक्रमित बच्चों में वायरल लोड रहा कम

एमएलएन मेडिकल कॉलेज के सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन) के अधीक्षक प्रोफेसर मुकेश बीर सिंह का कहना है कि बच्चों में एसरिसेप्टर सुरक्षा कवच का काम करता है। कोरोना काल में सामने आया है कि एसरिसेप्टर के कारण बच्चे कोरोना संक्रमण से बचे रहे। जिन्हें घर के लोगों से संक्र
मण मिला, वह घर पर रहकर स्वस्थ हुए। जांच में वायरल लोड बड़ों की तुलना में कम पाया गया। इसलिए बच्चों की सेहत के प्रति सभी को सावधान और जागरूक रहने की जरूरत है ताकी बच्चे अपने मजबूत प्रतिरोधक क्षमता के बल पर कोरोना संक्रमण से दूर रह सकें।

corona third wave: S receptor will protect children from the third wave of corona
कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay

बच्चों को तनावमुक्त रखने की करें जुगत

कोरोना संक्रमणकाल में बच्चों का कम संख्या में संक्रमित होना, अस्पताल न जाने का कारण उनका तनावमुक्त होना माना जा रहा है। एसआरएन के सह प्रभारी कोविड डॉ. सुजीत वर्मा के मुताबिक कोरोना काल में संक्रमितों के लिए तनाव बड़ी समस्या के रूप में सामने आया। बीपी, शुगर का असंतुलित होने का एक कारण ये भी रहा। बच्चों में तनाव जैसे लक्षण नहीं रहे। वह सामान्य परिस्थितियों में रहे और जल्द स्वस्थ हुए। जबकि बड़ों ने चिंता में सेहत खराब कर ली। 

टीकाकरण का सुरक्षा चक्र बन रहा कवच

कोरोना काल में संक्रमित बच्चों में वे पहले स्वस्थ हुए जिन्हें गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगाए गए थे। सात गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए लगाए गए टीके बच्चों के लिए सुरक्षा कवच बने रहे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश बीर सिंह और डॉ. आरके यादव के मुताबिक टीकाकरण कराने वाले बच्चे कोरोना काल में सुरक्षित रहे। जिन्हें अन्य कारणों से संक्रमण मिला, वह जल्द ही स्वस्थ हुए। 

बचाव के उपाय
बच्चों की दिनचर्या नियमित कराएं, घर में ही खेलकूद की छूट दें
- दूध के साथ पौष्टिक आहार भोजन में शामिल कराएं
- फास्ट एवं जंक फूड से दूरी बनाएं, फलों के प्रति रुचि बढ़ाएं
- किसी भी तरह की दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें

बच्चों के लिए 100 बेड के आईसीयू का प्लान
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसआरएन अस्पताल में बच्चों के लिए सौ बेड का आईसीयू बनाने का प्रस्ताव है। चिल्ड्रेन अस्पताल में एनआईसीयू और आईसीयू को भी उच्चीकृत करने की योजना है। माइक्रोप्लान के मुताबिक सौ बेड के आईसीयू के साथ 50 बेड का सुविधायुक्त आइसोलेशन वार्ड के स्थापना का भी प्रस्ताव है।
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