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High Court : परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अटूट शृंखला स्थापित किए बिना दोषसिद्धि संभव नहीं : हाईकोर्ट

Sun, 19 Jul 2026 04:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 19 Jul 2026 04:19 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अटूट शृंखला स्थापित किए बिना किसी आरोपी की दोषसिद्धि संभव नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने नौ साल पहले मथुरा में पत्नी व दो बेटों के हुए सनसनीखेज हत्याकांड में उम्रकैद पाए बाबू को बेगुनाह करार दिया।

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Conviction not possible without establishing an unbroken chain of circumstantial evidence.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अटूट शृंखला स्थापित किए बिना किसी आरोपी की दोषसिद्धि संभव नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने नौ साल पहले मथुरा में पत्नी व दो बेटों के हुए सनसनीखेज हत्याकांड में उम्रकैद पाए बाबू को बेगुनाह करार दिया।

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मामला मथुरा के थाना सदर बाजार थाना क्षेत्र का है। तीन सितंबर 2017 को बाबू की पत्नी शशि और उसके दो बेटों के शव घर में मिले थे। इसके बाद बाबू के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। 2022 में मथुरा की ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ बाबू ने हाईकोर्ट का रुख किया।
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कोर्ट ने पाया कि खून से सने कपड़े और हत्या में इस्तेमाल बांका की बाबू के कब्जे से बरामदगी का दावा पुलिस साबित नहीं कर सकी। बरामदगी की प्रक्रिया और गवाहों की विश्वसनीयता भी संदेह के घेरे में है। यही नहीं अभियोजन हत्या का ठोस कारण भी सिद्ध करने में भी विफल रहा।
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कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयानों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आरोपी घटना के समय मथुरा में था ही नहीं, वह दिल्ली में था। कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए सुनाई गई उम्रकैद और जुर्माने की सजा रद्द कर दी। साथ ही स्पष्ट किया कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, लेकिन अभियोजन साक्ष्यों की अटूट कड़ी पूर्ण करने में पूरी तरह विफल रहा। केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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