पुस्तक पर विवाद : सम्राट अशोक की औरंगजेब की तुलना पर गरमाई सियासत
इस बयान से आहत बसपा नेता पूर्व मंत्री बाबू लाल भंवरा ने दया प्रकाश तथा उनकी जैसी विचारधारा रखने वालों की सोच पर ही सवाल उठाए। पूर्व मंत्री ने कहा कि जिसकी जैसी सोच होगी वैसा ही बोलेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चुनावी सरगर्मी के बीच रिटायर आईएएस एवं लेखक पद्मश्री से सम्मानित दया प्रकाश सिन्हा के बयान से सियासी पारा और चढ़ गया है। क्रूरता को लेकर सम्राट अशोक की औरंगजेब की तुलना किए जाने पर सियासदारों ने दया प्रकाश के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
इस बयान से आहत बसपा नेता पूर्व मंत्री बाबू लाल भंवरा ने दया प्रकाश तथा उनकी जैसी विचारधारा रखने वालों की सोच पर ही सवाल उठाए। पूर्व मंत्री ने कहा कि जिसकी जैसी सोच होगी वैसा ही बोलेगा। सम्राट अशोक महान थे और हम उनका सम्मान करते हैं। सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से करना बहुत गलत है। बहुत से लोग तो गांधीजी की भी गोडसे से तुलना करते हैं। ऐसे लोगों के बारे में क्या कहा जा सकता है।
हमारे लिए अशोक महान और प्रेरणास्रोत हैं। सपा एमएलसी डॉ.मान सिंह यादव ने भी सम्राट अशोक और औरंगजेब की तुलना को लेकर दया प्रकाश के विचारों पर सवाल उठाए। डॉ.मान सिंह ने कहा, इस तरह की टिप्पणी करने वाले को न तो अशोक के बारे में जानकारी है और न ही औरंगजेब के बारे में। सम्राट अशोक ने अहिंसा का जो मानक तय किया है उसकी तुलना औरंगजेब से करना गलत है।
सम्राट अशोक और अकबर के नाम के आगे ही महान शब्द का उपयोग होता है। औरंगजेब के नाम से पहले महान शब्द का उपयोग नहीं होता। सम्राट अशोक की लाट तो भारतीयता की पहचान है। हर सरकारी दस्तावेजों पर अशोक की लाट की मुहर होती है। ऐसे महान शासकन की तुलना औरंगजेब से नहीं की जानी चाहिए। दया प्रकाश सिन्हा ने बहुत ही गलत तुलना की है।
इस पूरे विवाद पर इतिहासकार ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आनंद शंकर सिंह भी नेताओं के साथ खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने दया प्रकाश की टिप्पणी को इतिहास से परे बताया। उनका कहना है कि केवल बौद्धा परंपरा यह बात कहती है कि अशोक ने 99 भाइयों की हत्या की थी। यह बात अन्यत्र कहीं नहीं मिलती। यदि यह सत्य भी है तो रास्ते में आने वाले भाइयों को हटाकर सत्ता पाने की परंपरा उन दिनों रही है।
सम्राट अशोक ने सिर्फ कलिंग का युद्ध लड़ा था। इसके बाद वह सहिष्णु राजा के रूप में प्रख्यात हुए और यही याद किया जाता है लेकिन औरंगजेब अपने पूरे जीवन में असहिष्णु बना रहा। औरंगजेब के जीवन में सहिष्णुता कभी नहीं दिखी। ऐसे महान राजा की तुलना औरंगजेब से करना समझ से परे है।
क्या है विवाद
साहित्य अकादमी, पद्मश्री से सम्मानित बीजेपी की सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संचालक बताए जा रहे दया प्रकाश सिन्हा ने अपनी पुस्तक में सम्राट अशोक को औरंगजेब की तरह क्रूर शासक बताया है।
उनका कहना था कि सम्राट अशोक पर नाटक लिख रहे तब रिसर्च के दौरान यह जानकर आश्चर्य हुआ कि अशोक और मुगल बादशाह औरंगजेब के चरित्र में बहुत समानता है। औरंगजेब और अशोक ने शुरुआती जिंदगी में बहुत पाप किए थे। दोनों ने अपने भाइयों की हत्या की थी। दया प्रकाश की पुस्तक के प्रकाशन तथा उनकी इस टिप्पणी के बाद से ही राजनीति गर्म हो गई है।