फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   controversy on Shyam babu's caste certificate.

श्याम बाबू के जाति प्रमाणपत्र पर विवाद

Sat, 04 May 2019 12:19 AM IST
Prayagraj Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 04 May 2019 12:19 AM IST
विज्ञापन
controversy on Shyam babu's caste certificate.
UPPSC

पीसीएस-2016 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित कांस्टेबल श्याम बाबू के जाति प्रमाणपत्र को लेकर विवाद खड़ा हा गया है। श्याम बाबू की ओर से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र लगाया गया था, जिसे जांच के बाद अवैध करार दिया गया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि श्याम बाबू का जाति प्रमाणपत्र शासनादेश का उल्लंघन करते हुए जारी किया गया है।

विज्ञापन


श्याम बाबू वर्ष 2005 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे। प्रयागराज स्थित पुलिस मुख्यालय में तैनाती के दौरान उन्होंने पीसीएस परीक्षा की तैयारी की और इस साल 22 फरवरी को जारी पीसीएस-2016 के परिणाम में श्याम बाबू का डिप्टी कलेक्टर के पद पर अंतिम रूप से चयन हो गया। इस बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग आयोग (यूपीपीएससी) को शिकायतें मिलीं कि कुछ अभ्यर्थियों की ओर से गोंड, नायक जाति के अनुसूचित जनजाति के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया जा रहा है। इस पर आयोग से अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए जाति प्रमाणपत्रों की संबंधित जिलों में जांच कराई।
विज्ञापन


श्याम बाबू पुत्र धर्र्मनाथ राम बलिया में बैरिया तहसील के इब्राहिमाबाद उपरवार के रहने वाले हैं। बलिया के डीएम के निर्देश पर बैरिया के तहसीलदार ने श्याम बाबू की ओर से प्रस्तुत किए गए गोंड जाति के अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र की जांच की और जांच में पाया कि श्याम बाबू का जाति प्रमाणपत्र वैध नहीं है। इससे पूर्व तहसीलदार ने श्याम बाबू को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा था। श्याम बाबू ने जवाब दिया कि उनके पूर्वजों के पास जमीन नहीं थी, सो उन्होंने अपने गोन्हियाछपरा निवासी परमानंद साह की 1359 फसली की खतौनी लगा दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


तहसीलदार की ओर से डीएम को दी गई जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा कई मामलों में यह विधि व्यवस्था प्रतिपादित की गई है कि किसी व्यक्ति की जाति का निर्धारण उसके पिता से होता है, रिश्तेदारों की जाति से नहीं। इसके अलावा श्याम बाबू ने अपनी जाति (गोंड) के संबंध में जो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं, वे शासनादेश के आधारों को पूर्ण नहीं करते हैं। ऐसे में जाति प्रमाणपत्र शासनादेश के अनुसार वैध नहीं है। इस बारे में यूपीपीएससी के सचिव जगदीश का कहना है कि जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग इस पर निर्णय लेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed