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तहसीलदार हंडिया को अवमानना का नोटिस
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Contempt notice to Tehsildar Handia
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तहसीलदार हंडिया को अवमानना का नोटिस
0 एक माह में आदेश के पालन का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने तहसीलदार हंडिया राजकुमार को अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनको हाइकोर्ट के आदेश का पालन करने का एक माह का और समय दिया है। आदेश का पालन न करने पर तहसीलदार को हाइकोर्ट में हाजिर होना होगा।
हंडिया की राजकुमारी देवी के याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार सुनवाई कर रहे है। याची का कहना है कि उसने केवला देवी से जमीन का बैनामा कराया था। तथा इसके नामांतरण के लिए तहसीलदार हंडिया को दरखास्त दी थी। इस बीच फर्जी दस्तावेजों के आधार पर महेश सिंह ने भी नामांतरण के लिए अर्र्जी दाखिल की। केवल देवी को इसकी जानकारी होने पर उसने महेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। तहसीदार हंडिया ने याची और महेश सिंह की नामांतरण अर्जियों को एक साथ सुनवाई के लिए संबद्ध कर दिया। इसके बाद से मामले में लगातार तारीखें लग रही है। जबकि नामांतरण अर्र्जी 35 दिन में निस्तारित कर देने का नियम है।
याची ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर जल्दी सुनवाई के मांग की थी। हाइकोर्ट ने 5 फरवरी 2018 को तहसीलदार को छह माह में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया। इसके बावजूद तहसीलदार सिर्फ तारीख लगा रहे हं। इससे पूर्व दाखिल अवमानना याचिका पर भी कोर्ट ने तहसीलदार को आदेश के पालन का मौका दिया था। मगर उन्होंने मामले का निस्तारण नहीं किया तो दुबारा अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
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0 एक माह में आदेश के पालन का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने तहसीलदार हंडिया राजकुमार को अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनको हाइकोर्ट के आदेश का पालन करने का एक माह का और समय दिया है। आदेश का पालन न करने पर तहसीलदार को हाइकोर्ट में हाजिर होना होगा।
हंडिया की राजकुमारी देवी के याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार सुनवाई कर रहे है। याची का कहना है कि उसने केवला देवी से जमीन का बैनामा कराया था। तथा इसके नामांतरण के लिए तहसीलदार हंडिया को दरखास्त दी थी। इस बीच फर्जी दस्तावेजों के आधार पर महेश सिंह ने भी नामांतरण के लिए अर्र्जी दाखिल की। केवल देवी को इसकी जानकारी होने पर उसने महेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। तहसीदार हंडिया ने याची और महेश सिंह की नामांतरण अर्जियों को एक साथ सुनवाई के लिए संबद्ध कर दिया। इसके बाद से मामले में लगातार तारीखें लग रही है। जबकि नामांतरण अर्र्जी 35 दिन में निस्तारित कर देने का नियम है।
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याची ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर जल्दी सुनवाई के मांग की थी। हाइकोर्ट ने 5 फरवरी 2018 को तहसीलदार को छह माह में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया। इसके बावजूद तहसीलदार सिर्फ तारीख लगा रहे हं। इससे पूर्व दाखिल अवमानना याचिका पर भी कोर्ट ने तहसीलदार को आदेश के पालन का मौका दिया था। मगर उन्होंने मामले का निस्तारण नहीं किया तो दुबारा अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
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