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Prayagraj News: बसवार में साइंटिफिक लैंडफिल का निर्माण, कचरा निस्तारण में आएगी तेजी
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नैनी के बसवार में डंप कचरा निस्तारण की प्रक्रिया में और तेजी आएगी। नगर निगम ने 40 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में मॉडर्न साइंटिफिक लैंडफिल (एसएलएफ) का निर्माण कराया है। इसे पर्यावरण सरंक्षण के साथ जल प्रदूषण रोकने में भी सहायक बताया जा रहा है।
अपर नगर आयुक्त दीपेंद्र यादव ने बताया कि साइंटिफिक लैंडफिल विशेष रूप से अक्रिय कचरे के निस्तारण के लिए बनाया गया है, जो ताजे और पुराने कचरे की प्रोसेसिंग के बाद उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाला अक्रिय कचरा कुल का लगभग 20 से 30 फीसदी तक होता है। उन्होंने बताया कि करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इस लैंडफिल की क्षमता चार लाख क्यूबिक मीटर है। यह अगले 15 से 20 वर्षों तक कचरा निस्तारण करने में सक्षम होगा।
लैंडफिल की खासियत
लाइनर सिस्टम : इसमें एक विशेष लाइनर का उपयोग किया गया है, जो कचरे से रिसने वाले लीचेट (तरल पदार्थ) को मिट्टी और जल स्रोतों में मिलने से रोकता है।
लीचेट भंडारण की व्यवस्था : कचरे से निकलने वाले हानिकारक लीचेट को एक पाइप और कलेक्शन पिट्स के जरिये इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद इकट्ठा किए गए लीचेट का ट्रीटमेंट किया जाता है। इसे दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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गैस निस्तारण : लैंडफिल में कचरे के निस्तारण के दौरान निकलने वाली मीथेन जैसी हानिकारक गैसों से बचाव की विशेष व्यवस्था की गई है। इससे पर्यावरण सरंक्षण में मदद मिलती है।
परियोजना के खास तथ्य
40,000 वर्गमीटर में हुआ है निर्माण
नौ करोड़ रुपये हुए खर्च
चार लाख क्यूबिक मीटर अक्रिय कचरा निस्तारण की है क्षमता
लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार
प्रयागराज। नगर निगम की ओर से बसवार में लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार हो गया है। बसवार में वर्षों से डंप कचरा से बड़ी मात्रा में लीचेट का रिसाव होता है। बारिश के दिनों में तो यह यमुना नदी में भी जाने लगता है। इससे भूजल के साथ नदी जल के प्रदूषण का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए प्लांट लगाया गया है। चार करोड़ रुपये की लागत से लगा यह प्लांट रोजाना 150 किलो लीटर लीचेट का शोधन करने में सक्षम होगा। महापौर गणेश केसरवानी का कहना है कि लीचेड के प्रभावी ट्रीटमेंट से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी और जल जनित रोगों से बचाव संभव हो सकेगा। ब्यूरो
लावारिस पशुओं के लिए आज से चलेगा अभियान
सड़क पर घूमने वाले लावारिस पशुओं से राहत की उम्मीद है। नगर निगम की ओर से आवारा पशुओं के खिलाफ बृहस्पतिवार से अभियान शुरू होगा। अभियान वार्डवार चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत मम्फोर्डगंज से होगी।
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अपर नगर आयुक्त दीपेंद्र यादव ने बताया कि साइंटिफिक लैंडफिल विशेष रूप से अक्रिय कचरे के निस्तारण के लिए बनाया गया है, जो ताजे और पुराने कचरे की प्रोसेसिंग के बाद उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाला अक्रिय कचरा कुल का लगभग 20 से 30 फीसदी तक होता है। उन्होंने बताया कि करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इस लैंडफिल की क्षमता चार लाख क्यूबिक मीटर है। यह अगले 15 से 20 वर्षों तक कचरा निस्तारण करने में सक्षम होगा।
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लैंडफिल की खासियत
लाइनर सिस्टम : इसमें एक विशेष लाइनर का उपयोग किया गया है, जो कचरे से रिसने वाले लीचेट (तरल पदार्थ) को मिट्टी और जल स्रोतों में मिलने से रोकता है।
लीचेट भंडारण की व्यवस्था : कचरे से निकलने वाले हानिकारक लीचेट को एक पाइप और कलेक्शन पिट्स के जरिये इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद इकट्ठा किए गए लीचेट का ट्रीटमेंट किया जाता है। इसे दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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गैस निस्तारण : लैंडफिल में कचरे के निस्तारण के दौरान निकलने वाली मीथेन जैसी हानिकारक गैसों से बचाव की विशेष व्यवस्था की गई है। इससे पर्यावरण सरंक्षण में मदद मिलती है।
परियोजना के खास तथ्य
40,000 वर्गमीटर में हुआ है निर्माण
नौ करोड़ रुपये हुए खर्च
चार लाख क्यूबिक मीटर अक्रिय कचरा निस्तारण की है क्षमता
लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार
प्रयागराज। नगर निगम की ओर से बसवार में लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार हो गया है। बसवार में वर्षों से डंप कचरा से बड़ी मात्रा में लीचेट का रिसाव होता है। बारिश के दिनों में तो यह यमुना नदी में भी जाने लगता है। इससे भूजल के साथ नदी जल के प्रदूषण का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए प्लांट लगाया गया है। चार करोड़ रुपये की लागत से लगा यह प्लांट रोजाना 150 किलो लीटर लीचेट का शोधन करने में सक्षम होगा। महापौर गणेश केसरवानी का कहना है कि लीचेड के प्रभावी ट्रीटमेंट से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी और जल जनित रोगों से बचाव संभव हो सकेगा। ब्यूरो
लावारिस पशुओं के लिए आज से चलेगा अभियान
सड़क पर घूमने वाले लावारिस पशुओं से राहत की उम्मीद है। नगर निगम की ओर से आवारा पशुओं के खिलाफ बृहस्पतिवार से अभियान शुरू होगा। अभियान वार्डवार चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत मम्फोर्डगंज से होगी।