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इलाहाबाद विवि के संघटक कॉलेज कर्मियों को मिलेगा नया पदनाम और वेतनमान
Sun, 17 Jan 2021 12:47 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 17 Jan 2021 12:47 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के संघटक महाविद्यालयों के कर्मचारियों को जल्द ही केंद्रीय कर्मियों के समान पदनाम एवं वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इविवि प्रशासन से आवश्यक दस्तावेज समेत पूरी रिपोर्ट तलब की है। वहीं, इविवि प्रशासन ने भी कॉलेज कर्मियों को यह लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दरअसल, इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद पदों का नए सिरे से वर्गीकरण होना था। इविवि जब राज्य सरकार के अधीन था, तब नॉन टीचिंग के पद अलग-अलग थे और उनके वेतनमान भी अलग-अलग थे। इविवि को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय एवं संघटक महाविद्यालयों के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कार्यालयों के अधीन पदों के समान पदनाम एवं वेतनमान देने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए एक रेशनलाइजेशन कमेटी का भी गठन हुआ था, जिसे पदों के पुनर्निधारण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस कमेटी ने वर्ष 2012-13 में अपनी सिफारिश यूजीसी को भेज दी थी। लेकिन, नई व्यवस्था के तहत केवल इविवि के कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिला।
समान पदनाम और वेतनमान को लेकर कॉलेज के कर्मचारियों ने कई बार आंदोलन किया। हड़ताल भी की और यूजीसी को भी पत्र भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। अब यूजीसी ने इविवि के रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर आवश्यक दस्तावेज तलब कर लिए हैं, ताकि कॉलेज के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल सके। सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई कर्मचारियों के पदनाम और वेतनमान दोनों बदल जाएंगे तो कुछ कर्मचारियों के केवल पदनाम बदलेंगे। वहीं, कुछ कर्मचारियों के पदनाम और वेतनमान में कोई परिवर्तन नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर पहले ‘डीलिंग असिस्टेंट’ का पद था, जिसे अब ‘जूनियर ऑफिस असिस्टेंट’ का पदनाम दिया गया है। इसी तरह कई अन्य परिवर्तन भी होंगे।
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दरअसल, इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद पदों का नए सिरे से वर्गीकरण होना था। इविवि जब राज्य सरकार के अधीन था, तब नॉन टीचिंग के पद अलग-अलग थे और उनके वेतनमान भी अलग-अलग थे। इविवि को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय एवं संघटक महाविद्यालयों के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कार्यालयों के अधीन पदों के समान पदनाम एवं वेतनमान देने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए एक रेशनलाइजेशन कमेटी का भी गठन हुआ था, जिसे पदों के पुनर्निधारण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस कमेटी ने वर्ष 2012-13 में अपनी सिफारिश यूजीसी को भेज दी थी। लेकिन, नई व्यवस्था के तहत केवल इविवि के कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिला।
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समान पदनाम और वेतनमान को लेकर कॉलेज के कर्मचारियों ने कई बार आंदोलन किया। हड़ताल भी की और यूजीसी को भी पत्र भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। अब यूजीसी ने इविवि के रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर आवश्यक दस्तावेज तलब कर लिए हैं, ताकि कॉलेज के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल सके। सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई कर्मचारियों के पदनाम और वेतनमान दोनों बदल जाएंगे तो कुछ कर्मचारियों के केवल पदनाम बदलेंगे। वहीं, कुछ कर्मचारियों के पदनाम और वेतनमान में कोई परिवर्तन नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर पहले ‘डीलिंग असिस्टेंट’ का पद था, जिसे अब ‘जूनियर ऑफिस असिस्टेंट’ का पदनाम दिया गया है। इसी तरह कई अन्य परिवर्तन भी होंगे।
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- ‘इस संबंध में आंतरिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसे कार्य परिषद और वित्त समिति से मंजूर कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद रिपोर्ट यूजीसी को भेज दी जाएगी और यूजीसी से मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।’ -डॉ. जया कपूर, पीआरओ, इविवि