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फैसला : नशे में धुत होने वाले सिपाहियों को नहीं मिली राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को सही माना

Thu, 01 Sep 2022 09:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Sep 2022 09:59 PM IST
सार

सिपाहियों ने घोर अनुशासनिक लापरवाही बरती। उन्होंने कोर्ट में पेशी के बाद अभियुक्तों के रिश्तेदार के घर तथा होटल में जाकर खाना खाया। मुरादाबाद से बरेली लौटने के लिए ट्रेन पकड़ी।

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Constables who got drunk did not get relief Allahabad High Court accepted the dismissal as right
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

मुरादाबाद कोर्ट में शराब पीकर नशे में धुत होकर पेशी पर पुलिस अभिरक्षा से आए तीन अभियुक्तों के हथकड़ी खोल कर फरार होने के मामले में सिपाहियों की बर्खास्तगी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सही माना है। कहा, बर्खास्तगी अपराध की तुलना में कठोर नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने बरेली के सिपाही श्रीपाल सिंह तथा प्रेमपाल की याचिका पर दिया है।

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सिपाहियों ने घोर अनुशासनिक लापरवाही बरती। उन्होंने कोर्ट में पेशी के बाद अभियुक्तों के रिश्तेदार के घर तथा होटल में जाकर खाना खाया। मुरादाबाद से बरेली लौटने के लिए ट्रेन पकड़ी। वे अभियुक्तों के साथ शराब पीकर नशे में इतने धुत हुए कि बरेली पहुंचने पर बेहोशी की हालत में उतारे गए। तीनों अभियुक्त हथकड़ी खोलकर फरार हो चुके थे । 
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कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई न तो एक पक्षीय है और न ही नैसर्गिक न्याय के विपरीत है। आदेश पारित होने पर यह नहीं कह सकते कि नैसर्गिक न्याय का उल्लघंन किया गया है। याचियों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देकर नैसर्गिक न्याय का पूरी तरह से पालन किया गया है। कोर्ट ने बर्खास्तगी के खिलाफ  याचिका खारिज कर दी।
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विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में इसे घोर लापरवाही बरतने के आरोप का दोषी करार देते हुए सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया गया था, जिसे चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट अपीलीय शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर रही। केवल आदेश की कानूनी समीक्षा कर रही है। इसलिए तथ्यात्मक निष्कर्ष पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

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