सिपाही भर्ती : संदीप के नाम से परीक्षा देने वाले जितेंद्र को हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत, बनवाया था फर्जी आधार
मामला आगरा जिले के एतमौद्दौला थाना क्षेत्र के श्री पीडी जैन इंटर कालेज में उत्तर प्रदेश पुलिस की सिपाही भर्ती की द्वितीय पाली में हुई परीक्षा का है। 18 फरवरी 2024 को दूसरी पाली में चल रही परीक्षा के दौरान किसी महिला ने बायोमैट्रिक प्रभारी संदीप चंद्र को आरोपी द्वारा दूसरे के नाम पर परीक्षा दिए जाने की सूचना दी थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदीप के नाम का आधार कार्ड बनवा कर सिपाही परीक्षा में बैठे जितेंद्र जुरैल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। सिपाही भर्ती परीक्षा ने सेंधमारी करने के आरोपी ने खुद का घरेलू नाम संदीप बताते हुए जमानत पर रिहा करने की मांग की थी। हालांकि, अपने दावे के समर्थन में वह अदालत ने कोई ठोस सबूत पेश नही कर सका। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत में हुई।
मामला आगरा जिले के एतमौद्दौला थाना क्षेत्र के श्री पीडी जैन इंटर कालेज में उत्तर प्रदेश पुलिस की सिपाही भर्ती की द्वितीय पाली में हुई परीक्षा का है। 18 फरवरी 2024 को दूसरी पाली में चल रही परीक्षा के दौरान किसी महिला ने बायोमैट्रिक प्रभारी संदीप चंद्र को आरोपी द्वारा दूसरे के नाम पर परीक्षा दिए जाने की सूचना दी थी। इस सूचना पर हरकत में आए परीक्षा केंद्र व्यवथापक और पुलिस महकमे से जुड़े अधिकारियों ने आरोपी की पुनः बायोमैट्रिक जांच कराई।
इस जांच में पाया गया कि आरोपी ने आधार कार्ड में अपने नाम के स्थान पर संदीप का नाम दर्ज करवा रखा था। इसी आधार पर वह परीक्षा में शामिल हुआ था। केंद्र व्यवस्थापक राहुल जैन की तहरीर पर परीक्षा में सेंधमारी के आरोपी जितेंद्र जुरैल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उसे जेल भेज दिया गया था। आरोपी की जमानत जिला जज आगरा की अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
आगरा जिले के खंदौली थाना क्षेत्र के पैलखेड़ा गांव निवासी जितेंद्र जुरैल के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार मिश्रा ने दलील दी कि आरोपी का घरेलू नाम संदीप है। इसी नाम से वह सिपाही भर्ती की परीक्षा में शामिल हुआ था। जबकि राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता सुरेश बहादुर सिंह ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता में सेंधमारी न सिर्फ गंभीर अपराधिक कृत्य है बल्कि आम छात्रों के भविष्य के साथ भी अन्याय है। इसलिए आरोपी जमानत का हकदार नही है। अदालत ने आरोपी की ओर से किए गए दावों के समर्थन में ठोस सुबूतो के अभाव में जमानत याचिका खारिज कर दी।