Prayagraj : जंक्शन पर लावारिस पड़े आठ बैग में मिले 104 कछुए, तस्करों की खोजबीन में जुटी पुलिस
रविवार को प्लेटफार्म नंबर पांच पर काफी देर से सात आठ बैग पड़े थे। यात्रियों की सूचना पर पहुंची जीआरपी पुलिस ने बैग के बारे में पूछताछ शुरू की तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस ने बैग को खोला तो उसमें बड़ी संख्या में कछुए पड़े मिले।
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जीआरपी पुलिस ने रविवार रात जंक्शन से 104 कछुए बरामद किए। इनको आठ बैग में भरकर आरओबी के नीचे लावारिस अवस्था में रखे गए थे। पुलिस ने इन्हें वन विभाग को सौंप दिया है। आए दिन जंक्शन पर कछुए बरामद किए जा रहे हैं। बावजूद पुलिस से लेकर वन विभाग तक इन पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। जीआरपी प्रभारी राजीव रंजन उपाध्याय ने बताया कि इस केस में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अगर कोई पकड़ा जाता तो पता चलता कि किस जगह से इन्हें लाया गया। हालांकि, स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। कछुओं को वन विभाग के हवाले कर दिया गया है। पकड़े गए कछ़ुओं की कीमत 4.75 लाख रुपये आंकी गई है।
इन दो प्रजातियों का मिला कछुआ
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अरविंद यादव ने बताया कि प्लेटफॉर्म चार से आठ बैग में फ्लैपशेल और सॉफ्टशेल प्रजाति के कछुए मिले हैं। सॉफ्टशेल की प्रजाति अक्सर गंगा और फ्लैपशेल कछुए तालाब में पाए जाते हैं। आशंका है कि इनको कोलकाता ले जाया जा रहा था।
कछुओं को विदेश भेजने के लिए इन-इन रूटों का होता है इस्तेमाल
हेड ऑफ ट्रैफिक इंडिया के पूर्व प्रमुख डॉ.शेखर कुमार नीरज बताते हैं कि कछुए की सबसे ज्यादा तस्करी मध्य प्रदेश के चंबल से होती है। तस्कर यहां से कछुए को बांग्लादेश, थाइलैंड, मलेशिया, चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया आदि देशों में पहुंचाने के लिए अलग-अलग रूट अपनाते हैं। इनमें, जयपुर, बीकानेर, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी, सोनभद्र आदि जिलों से होते हुए कोलकाता पहुंचते हैं। फिर यहां से विदेशों तक इनकी तस्करी की जाती है।
18 से 20 नख वाले कछुओं की सबसे अधिक डिमांड रहती है। तंत्र-विद्या करने वालों का मानना होता है कि इस तरह के कछुए दैवीय शक्ति के प्रतीक होते हैं। इसके अलावा कछ़ुए की हड्डी का इस्तेमाल कर शक्ति वर्धक दवाएं भी बनाई जाती हैं। वहीं, डीएफओ अरविंद यादव ने बताया कि कछुए की तस्करी रोकने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य सरगना पुलिस की पहुंच से दूर
जीआरपी ने इस वर्ष कछ़ुओं की कई बड़ी खेप पकड़ी है। लेकिन, मुख्य सरगना को अब तक नहीं पकड़ सकी है। यह छोटे-छोटे गैंग 200 से 300 रुपये में कोलकाता में जाकर कछ़ुए को बेच देते हैं। लेकिन, पुलिस और वन विभाग को ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली, जिससे मुख्य सरगना तक पहुुंचा जा सके।
ज्यादातर इन प्रजातियों की तस्करी
रेड क्राउन रूफ्ड-इनकी गर्दन पर लाल निशान होता। विदेशों में इसकी मांग अधिक है। शुभ संकेत के लिए इसे लोग पालते हैं। इंडियन रूफ्ड-इनकी खोल के सबसे ऊपरी हिस्से पर एक कठोर छत होती है। इसे भी ज्यादातर लोग पालने के लिए मोटी कीमत देते हैं।
सॉफ्टशेल-ताजा पानी का नरम खोल वाला कछुआ होता है। इसकी देश विदेश मांग हमेशा रहती है। इसे कई लोग खाने में इस्तेमाल करते हैं। फ्लैपशेल-यह कछुआ अधिकतर तालाब में पाया जाता है। तस्कर इन कछुओं को अवैध तरीके से पकड़कर पश्चिम बंगाल में बेचने की कोशिश करते हैं।
कब-कब पकड़ी गई तस्करी
- सितंबर 2024 को प्लेटफॉर्म चार व पांच से दो तस्कर 10 कछुए के साथ पकड़े गए
- अक्तूबर 2024 को प्लेटफॉर्म दो से दो तस्कर 14 कछुए संग गिरफ्तार किए गए
- फरवरी 2024 को महिला समेत दो लोग 204 कछुओं संग गिरफ्तार किए गए