नियमितीकरण का मामला : हाईकोर्ट की सख्ती के बाद संग्रह अमीन के बकाया वेतन का किया गया भुगतान
वारंट पर हाईकोर्ट में उपस्थित हुए अपर मुख्य सचिव वित्त व सचिव राजस्व, सरकारी वकील के अनुरोध पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही को कोर्ट ने आगे नहीं बढ़ाया।
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संग्रह अमीन की सेवा नियमितीकरण मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अधिकारियों ने आदेश का अनुपालन कर दिया है। सोमवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए अपर मुख्य सचिव वित्त और सचिव राजस्व ने हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार याची अमीन के बकाया वेतन का भुगतान कर दिया गया है। याची के अधिवक्ता की ओर से भी इसकी पुष्टि की गई। इसके बाद सरकारी वकील के अनुरोध पर अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया।
सीजनल संग्रह अमीन भुवनेश्वर प्रसाद तिवारी की याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने सुनवाई की। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने आदेश का अनुपालन न करने पर दोनों अधिकारियों को जमानती वारंट जारी कर तलब किया था। इस वारंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई। मगर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अधिकारियों को हाईकोर्ट के सामने उपस्थित होकर अपनी बात रखने का निर्देश दिया था, जिसके बाद दोनों अधिकारी सोमवार को अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।
उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन कर दिया गया है तथा याची के नियमितीकरण के बाद उसके बकाया वेतन का भुगतान कर दिया गया है। मामले में हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई थी कि याची को नियमित करने के बाद भी उसका बकाया वेतन देने इनकार कर दिया गया। जबकि अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट में आश्वासन दिया था कि याची के बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा, मगर अधिकारियों ने आश्वासन के अनुरूप कार्य न करके इसके विपरीत कार्य किया और कोर्ट को पूरे मामले में गुमराह किया गया।
अपर महाधिवक्ता ने दिया था आश्वासन
अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने कोर्ट के सख्त रुख पर आश्वासन दिया था कि याची को कनिष्ठ कर्मचारी के नियमित होने की तिथि से वरिष्ठता आदि लाभ सहित बकाया वेतन का भुगतान किया जाएगा। याची की सेवा तो नियमित की गई, किंतु बकाया वेतन भुगतान करने से इनकार कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं तत्कालीन जिलाधिकारी प्रयागराज व वर्तमान सचिव वित्त संजय कुमार के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर 15 नवंबर को तलब किया। इस आदेश को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। मगर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की राहत न देकर उल्टे कहा कि अधिकारी इसी काबिल हैं और हाईकोर्ट इससे भी सख्त आदेश करता तो कुछ गलत न होता।
अधिकारी दे रहे थे मनमाना जवाब
अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद अधिकारी याची के नियमितीकरण और बकाया वेतन भुगतान को लेकर मनमाना तरीका अपनाते रहे। कोर्ट ने पूछा कि याची से कम अवधि तक काम करने वाले दो अमीनों को नियमित कर दिया गया है, तो याची भी नियमित होने का हकदार है। इसके बावजूद सचिव वित्त संजय कुमार ने कहा कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और भविष्य में जब नियमितीकरण होगा तो याची को नियमित करने पर विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा तत्कालीन जिलाधिकारी की अकर्मण्यता के कारण याची को नियमित नहीं किया गया। कोर्ट ने अधिकारियों को तलब किया। मगर वे हाजिर नहीं हुए और न ही इसका कारण बताया कि क्यों नहीं आ सके। आश्वासन के बाद एसडीएम मेजा ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि याची नियमित कर दिया गया है। किंतु बकाया वेतन देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा याची के साथ अन्याय किया गया है।
इससे पहले कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव राजस्व को तलब करते हुए व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था कि याची को नियमित करने में आयु सीमा में छूट न देने के अपने आदेश को उचित कैसे ठहरा सकते हैं, जबकि याची से कम अवधि तक काम करने वालों को छूट देकर नियमित कर दिया गया है। कोर्ट ने तत्कालीन जिलाधिकारी प्रयागराज वर्तमान सचिव वित्त उ. प्र. शासन संजय कुमार से भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था कि उन्होंने जिलाधिकारी रहते हुए कमेटी की 24 मई 17 की सीजनल संग्रह अमीनों को नियमित करने की संस्तुति पर अमल क्यों नहीं किया और यह कहना कहां तक उचित है कि नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, भविष्य में जब नियमितीकरण होगा तो विचार किया जाएगा।