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प्रयागराज : हताशा और निराशा में मौत को गले लगा रहे प्रतियोगी छात्र, छह महीने में 16 छात्रों ने दी जान

Fri, 20 Oct 2023 01:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Oct 2023 01:33 PM IST
सार

हजारों प्रतियोगी छात्र शहर के लॉजों और किराये के मकानों में रहकर अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कुछ कोचिंग का सहारा लेते हैं तो कुछ खुद ही तैयारी करते हैं। घर वालों से दूर रह रहे इन प्रतियोगी छात्रों की उम्र स्कूल कालेज जाने वाले छात्रों से अधिक होती है। उन पर जल्द से जल्द नौकरी पाने का दबाव भी होता है।

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Competitive students are embracing death due to frustration and despair, 16 students committed suicide in six
अवसाद। सांकेतिक चित्र। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शहर में हजारों की संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन सभी सफलता नहीं प्राप्त कर पाते। पिछले कुछ समय के आंकड़ों को देखा जाए तो प्रतियोगी छात्र हताशा और निराशा में मौत को गले लगा ले रहे हैं। महज छह महीने में 16 प्रतियोगी छात्रों ने खुदकुशी कर ली। ज्यादातर मामलों में घर वालों और दोस्तों को इसकी भनक तक नहीं लगी कि छात्र-छात्रा के मन में क्या चल रहा है। मनोविज्ञानियों का कहना है कि घर वालों को अवसाद के प्रारंभिक लक्षण पहचानने होंगे।

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बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र शहर के लॉजों और किराये के मकानों में रहकर अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कुछ कोचिंग का सहारा लेते हैं तो कुछ खुद ही तैयारी करते हैं। घर वालों से दूर रह रहे इन प्रतियोगी छात्रों की उम्र स्कूल कालेज जाने वाले छात्रों से अधिक होती है। उन पर जल्द से जल्द नौकरी पाने का दबाव भी होता है। घर वालों की बड़ी आशाएं भी उनसे जुड़ी होती हैं।
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अगर छात्रों को जल्द नौकरी नहीं मिलती तो उनके मन में हताशा और निराशा घर कर जाती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप आनंद का कहना है कि घर वाले और दोस्त अगर इसी हताशा और निराशा को भांप लें तो छात्र की सुसाइडल टेंडेंसी को दूर किया जा सकता है। घर वालों को चाहिए कि वे बच्चों से प्रतिदिन बात करें। उनकी बातों का पैटर्न पकड़ें।

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अगर लगे कि छात्र या छात्रा ज्यादा बात करने से बच रहे हैं तो उनसे मिलने का प्रयास करें। अवसाद के प्रारंभिक लक्षणों में भूख न लगना, कम हंसना, महफिल में भी रहकर बातचीत में शामिल न होना और उदास रहना आदि शामिल हैं। अगर किसी छात्र में यह सब प्रवृत्ति दिखे तो घर वालों को तुरंत सतर्क होकर ज्यादा समय उसे देना चाहिए। उसे विश्वास दिलाना चाहिए घर वाले हर परिस्थिति में उसके साथ हैं।

वहीं, प्रतियोगी छात्र आम छात्रों की तुलना में बड़ी उम्र के होते हैं, इसलिए उन्हें खुद भी इन लक्षणों के दिखने के बाद सतर्क हो जाना चाहिए। तमाम डिफेंस मेकेनिज्म होते हैं, जिन्हें अपनाना चाहिए।

केस 1- सिद्धार्थ नगर के देवरुआ कला निवासी अक्षय कुमार के बेटे रितुराज वरुण ने एनी बेसेंट स्कूल के पास स्थित लॉज में 24 सितंबर को फांसी लगाकर जान दे दी।

केस 2- गोंडा के तुलकाडीह गांव के अनुराग कुमार ने मालवीय नगर स्थित लॉज में फांसी लगाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में लिखा, मैं खुद ही मौत का जिम्मेदार।

केस 3 - एमपी के पन्ना के रहने वाले राज किशोर के दो बेटों में छोटा अभिषेक एमएससी बीएड के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। कर्नलगंज में किराये के कमरे में उसने फांसी लगाकर जान दे दी।

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