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हाईकोर्ट : दुर्घटना में हुई मौत पर मुआवजे का लाभ देने से नहीं किया जा सकता इन्कार

Thu, 29 Feb 2024 04:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 Feb 2024 04:34 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने गिरिजा कटियार व अन्य की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) को याची को मुआवजे की रकम तीन महीने में भुगतान करने का निर्देश दिया है।

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Compensation benefit cannot be refused in case of death due to accident
कोर्ट (प्रतीकात्मक) - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्घटना में हुई मौत के मामले में कहा है कि मुआवजे का लाभ देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के राममूर्ति मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कहा, याची को वाद की दाखिला के साथ ही मुआवजे की रकम पर सात फीसदी की दर से ब्याज भी दिया जाए।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने गिरिजा कटियार व अन्य की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) को याची को मुआवजे की रकम तीन महीने में भुगतान करने का निर्देश दिया है। मामले में रूप नारायण कटियार बस चालक था। वह कानपुर से दिल्ली के बीच जाने वाली बस संख्या यूपी 78-3901 का संचालन करता था। वह 16 जनवरी, 1998 को दिल्ली जा रहा था, तभी एटा के मलावन स्थान पर दूसरी ओर से आ रही बस संख्या यूपी 93-575 की भिड़ंत हो गई।
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इसमें उसकी मौत हो गई। चालक के करीबियों ने ट्रिब्यूनल के समक्ष मुआवजे की मांग की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस भिड़ंत के लिए चालक को जिम्मेदार पाते हुए वाद का खारिज कर दिया। याचियों ने उसे हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। याचियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से राममूर्ति के मामले में पारित आदेश का हवाला दिया। कहा, घटना के समय मृत्यु के मुआवजे की रकम पचास हजार रुपये थी। इसे बढ़ाकर अब पांच लाख रुपये कर दिया गया है।
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चूंकि मोटर वाहन अधिनियम लाभकारी कानून है, इसलिए याची मोटर वाहन अधिनियम में किए गए संशोधन के लाभ का हकदार है। कोर्ट ने इन तथ्यों को देखते हुए याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर सात प्रतिशत ब्याज के साथ पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश पारित किया।

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