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कमेटी तैयार करेगी छात्र परिषद चुनाव का खाका

Mon, 01 Jul 2019 12:36 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2019 12:36 AM IST
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Committee will preapre student council format.
Committee will preapre student council format. - फोटो : CITY DESK
कमेटी तैयार करेगी छात्र परिषद चुनाव का खाका
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में कार्य परिषद ने छात्र संघ को समाप्त कर छात्र परिषद के गठन पर अंतिम मुहर लगा दी है। अब छात्र परिषद का खाका तैयार किया जाएगा। विनियम बनाने की जिम्मेदारी डीन आर्ट्स की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपी गई है। कमेटी में चीफ प्रॉक्टर और डीएसडब्ल्यू भी शामिल हैं।
गत 24 जून को हुई इविवि की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में ही छात्र परिषद के गठन का प्रारूप तय करने के लिए डीन आर्ट्स प्रो. केएस मिश्र की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया गया था। उनके सहयोग के लिए कमेटी में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे और डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार भी शामिल किया गया। शनिवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में इस कमेटी पर भी मुहर लगा दी गई। जिस तरह वर्ष 2012 में छात्रसंघ की बहाली के बाद नया विनियम तैयार किया गया था, उसी तरह यह कमेटी छात्र परिषद-2019 के लिए नया विनियम तैयार करेगी।
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विनियम बनाने से पहले उन विश्वविद्यालयों में चुनाव प्रक्रिया का अध्ययन किया जाएगा, जहां पहले से छात्र परिषद का मॉडल लागू है। इनमें बीएचयू समेत कई विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह कमेटी अलग-अलग विश्वविद्यालयों में लागू छात्र परिषद के मॉडल का अध्ययन करेगी और देखेगी कि वहां चुनाव कराने की प्रक्रिया क्या है। इसके साथ ही लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का भी अध्ययन भी किया जाएगा।
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हालांकि छात्र परिषद के चुनाव में सबसे पहले कक्षा प्रतिनिधियों को चुना जाता है और कक्षा प्रतिनिधि अपने बीच से छात्रसंघ पदाधिकारी का चुनाव कर करते हैं। कक्षा प्रतिनिधियों का चुनाव किस विधि से होगा, यह अभी तय नहीं है। कहीं, बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराया जाता है तो कहीं कक्षा में हाथ उठवाकर कक्षा प्रतिनिधियों को चुना जाता है। इसके अलावा मेरिट में शीर्ष स्थान पाने वालों को भी कक्षा प्रतिनिधि चुने जाने का प्रावधान है लेकिन वे मतदान नहीं कर सकते। कमेटी ऐसे ही तमाम तकनीकी पक्षों का अध्ययन करेगी। हालांकि इविवि प्रशासन ने 15 अगस्त तक चुनाव कराने की तैयारी कर रखी है। ऐसे में कमेटी को छात्र परिषद चुनाव का विनियम जल्द तैयार करना होगा।
सात साल पहले पड़ गई थी कमजोर छात्रसंघ की नींव
सात साल पहले वर्ष 2012 में ही छात्रसंघ को कमजोर बनाने की नींव रख दी गई थी। वर्ष 2005 में छात्रसंघ चुनाव के दौरान एक छात्रनेता की हत्या होने के बाद छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगा दी गई थी। वर्ष 2012 में छात्रसंघ की बहाली हुई और पहली बार लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप चुनाव हुआ। शर्त रख दी गई कि सभी पांचों प्रमुख पद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, संयुक्त मंत्री और सांस्कृतिक सचिव पद के लिए कोई भी छात्र एक बार से अधिक चुनाव नहीं लड़ सकता जबकि उससे पहले यह प्रतिबंध नहीं था। नई व्यवस्था में चुनकर कर आए नए पदाधिकारी जब तक छात्र राजनीति को समझते, तब तक उनके कार्यकाल का एक साल पूरा हो जाता। कमजोर छात्रसंघ का फायदा अराजकतत्वों ने उठाया और छात्रसंघ चुनाव के नाम पर अराजकता तेजी से बढ़ने लगी। वर्ष 2012 से ही प्रावधान किया गया कि कार्यकारिणी में निर्वाचित के साथ नामित सदस्य भी शामिल होंगे लेकिन कभी भी पूर्ण छात्रसंघ का गठन नहीं हो सका और न ही कार्यकारिणी में नामित सदस्यों को शामिल किया जा सका।

छात्रसंघ उपाध्यक्ष समेत 21 छात्र रिहा
छात्र परिषद के गठन का विरोध करने पर जेल भेजे गए इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष अखिलेश यादव समेत सभी 21 छात्र नेता रिहा कर दिए गए हैं। नैनी जेल से बाहर आने के बाद साथी छात्रों ने उनका स्वागत किया और जुलूस की शक्ल में सभी विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पहुंचे। सभी छात्रों ने शहीद लाल पद्मधर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के इशारे पर इविवि प्रशासन ने छात्रसंघ को समाप्त कर छात्र परिषद के गठन का निर्णय लिया। सरकार खुलकर विश्वविद्यालय के मामलों में हस्तक्षेप कर रही है और जनतंत्र को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। अगर छात्रसंघ को बहाल नहीं किया जाता तो हुकूमत एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहे।
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