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सीबीआई जांच के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा आयोग
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:25 AM IST
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यूपीपीएससी के चेयरमैन अनिरुद्ध सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
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लोक सेवा आयोग की नियुक्ति की जांच सीबीआई से कराने के फैसले को आयोग ने हाईकोर्ट में चुनौती देने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। शीतावकाश के बाद याचिका दाखिल की जा सकती है। आयोग ने इस आशय का नोटिस भी सरकार को दे दिया है जो याचिका दाखिल करने पर पक्षकारों को दिया जाता है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आयोग ने याचिका में सीबीआई जांच की अधिसूचना को चुनौती दी है।
याचिका आयोग के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह की ओर से दाखिल की जानी है। इसमें सीबीआई जांच के आदेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती दी गई है। आयोग की स्वायत्ता और जांच के लिए आवश्यक अनुमति लेने आदि बातों को भी आधार बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि अभ्यर्थियों की मांग और पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव केकार्यकाल में लोकसेवा आयोग की नियुक्तियों में धांधली के गंभीर आरोप है। भाजपा ने पहले ही घोषणा की थी सरकार में आने के बाद वह नियुक्तियों की सीबीआई से जांच कराएंगे। प्रदेश सरकार ने आयोग की भर्तियों की जांच के लिए सीबीआई से अनुरोध किया था जिसे सीबीआई ने स्वीकार भी कर कर लिया है। इसकी अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।
अनिल यादव के कार्यकाल में भर्तियों में जमकर मनमानी का आरोप है। अंकों में हेरफेर करने, स्केलिंग में गड़बड़ी करने, केंद्रों केनिर्धारण में मनमानी, एक जाति विशेष के लोगों को अधिक फायदा पहुंचाने तथा कॉपियां नष्ट कर साक्ष्य मिटाने आदि आरोपों के आधार पर प्रदेश सरकार ने नियुक्तियों की जांच का आदेश दिया है। सीबीआई जांच के आदेश से आयोग में खलबली मची है क्योंकि इसमें कई बड़े नप सकते हैं।
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याचिका आयोग के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह की ओर से दाखिल की जानी है। इसमें सीबीआई जांच के आदेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती दी गई है। आयोग की स्वायत्ता और जांच के लिए आवश्यक अनुमति लेने आदि बातों को भी आधार बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि अभ्यर्थियों की मांग और पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव केकार्यकाल में लोकसेवा आयोग की नियुक्तियों में धांधली के गंभीर आरोप है। भाजपा ने पहले ही घोषणा की थी सरकार में आने के बाद वह नियुक्तियों की सीबीआई से जांच कराएंगे। प्रदेश सरकार ने आयोग की भर्तियों की जांच के लिए सीबीआई से अनुरोध किया था जिसे सीबीआई ने स्वीकार भी कर कर लिया है। इसकी अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।
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अनिल यादव के कार्यकाल में भर्तियों में जमकर मनमानी का आरोप है। अंकों में हेरफेर करने, स्केलिंग में गड़बड़ी करने, केंद्रों केनिर्धारण में मनमानी, एक जाति विशेष के लोगों को अधिक फायदा पहुंचाने तथा कॉपियां नष्ट कर साक्ष्य मिटाने आदि आरोपों के आधार पर प्रदेश सरकार ने नियुक्तियों की जांच का आदेश दिया है। सीबीआई जांच के आदेश से आयोग में खलबली मची है क्योंकि इसमें कई बड़े नप सकते हैं।
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