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प्रधानाचार्य पद पर चयन के विवाद को लेकर घिरा आयोग
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प्रयागराज। पीसीएस-2018 के तहत प्रधानाचार्य जीआईसी के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्र के विवाद को लेकर घिरे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। न्यायालय ने भी कहा है कि आयोग अपने विज्ञापन का पालन करे और जिन अभ्यर्थियों का अनुभव प्रमाणपत्र नहीं लगा है, उन्हें बाहर किया जाए। प्रतियोगी छात्र अब पूरे मामले की अलग से जांच कराए जाने और जल्द से जल्द संशोधित परिणाम जारी किए जाने की मांग कर रहे हैं और इसके उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
पीसीएस-2018 में प्रधानाचार्य के 88 पद थे। आयोग ने प्रधानाचार्य जीआईसी के पद पर बिना अनुभव प्रमाणपत्र के साक्षात्कार कराया और बाद में अभ्यर्थियों से अलग से अनुभव प्रमाणपत्र मांगे। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह का आरोप है कि आयोग ने उल्टे-सीधे डॉक्यूमेंट लगाने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन कर लिया। मामले में न्यायालय में याचिका दाखिल की गई तो कोर्ट ने कहा कि जिनका अनुभव प्रमाणपत्र नहीं लगा है, उन्हें तत्काल बाहर किया जाए। कौशल का दावा है कि 27 से 32 अभ्यर्थी चयन से बाहर होंगे।
वहीं, आयोग ने अपने नोटिफिकेशन में यह भी लिखा था कि अनुभव प्रमाणपत्र जेडी के हस्ताक्षर से मान्य होंगे। जेडी मंडल स्तर के अधिकारी होते हैं, जबकि दिल्ली एवं अन्य प्रदेशों में जेडी का पद नहीं है। जिला स्तर के अधिकारियों से जारी अनुभव प्रमाणपत्र का संकलन किया गया, जो किसी भी प्रकार से मान्य नहीं होना चाहिए। ऐसे छात्रों का भी चयन निरस्त करते हुए उत्तर प्रदेश के छात्रों को स्थान देना चाहिए। साथ ही इस पूरे मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की भूमिका की जांच भी होनी चाहिए।
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पीसीएस-2018 में प्रधानाचार्य के 88 पद थे। आयोग ने प्रधानाचार्य जीआईसी के पद पर बिना अनुभव प्रमाणपत्र के साक्षात्कार कराया और बाद में अभ्यर्थियों से अलग से अनुभव प्रमाणपत्र मांगे। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह का आरोप है कि आयोग ने उल्टे-सीधे डॉक्यूमेंट लगाने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन कर लिया। मामले में न्यायालय में याचिका दाखिल की गई तो कोर्ट ने कहा कि जिनका अनुभव प्रमाणपत्र नहीं लगा है, उन्हें तत्काल बाहर किया जाए। कौशल का दावा है कि 27 से 32 अभ्यर्थी चयन से बाहर होंगे।
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वहीं, आयोग ने अपने नोटिफिकेशन में यह भी लिखा था कि अनुभव प्रमाणपत्र जेडी के हस्ताक्षर से मान्य होंगे। जेडी मंडल स्तर के अधिकारी होते हैं, जबकि दिल्ली एवं अन्य प्रदेशों में जेडी का पद नहीं है। जिला स्तर के अधिकारियों से जारी अनुभव प्रमाणपत्र का संकलन किया गया, जो किसी भी प्रकार से मान्य नहीं होना चाहिए। ऐसे छात्रों का भी चयन निरस्त करते हुए उत्तर प्रदेश के छात्रों को स्थान देना चाहिए। साथ ही इस पूरे मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की भूमिका की जांच भी होनी चाहिए।
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