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कालेजों में सीट भरने की बढ़ी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 26 Mar 2016 02:24 AM IST
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- प्रक्रिया में देरी के कारण प्रोफेशनल कोर्सेज की अलग से होने लगी है परीक्षा
इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में लेटलतीफी का नुकसान संघटक कालेजों को उठाना पड़ सकता है। विगत वर्षों में कम आवेदन की वजह से सभी कालेजों में स्नातक की सीटें खाली रह गईं थीं। स्थिति यह है कि आवेदकों की कम संख्या को लेकर बीए में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा के औचित्य पर ही सवाल उठने लगा है। ऐसे में अभी तक प्रवेश संबंधित कार्यक्रम जारी नहीं होने से सीट भरने की चुनौती और बढ़ गई है।
बीएचयू समेत अन्य विश्वविद्यालयों में दाखिला के लिए आवेदन मांगे जा चुके हैं। इसके विपरीत इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक कार्यक्रम भी तय नहीं कर पाया है। लेटलतीफी की वजह से विगत वर्षों में बीए में दाखिला के लिए सीट के तकरीबन बराबर आवेदन पहुंचे। एक साल तो उससे कम आवेदन पहुंचे। इसका नतीजा है कि कालेज ही नहीं विश्वविद्यालय में भी बीए की सीटें खाली रह गईं। जबकि, कालेजों में ऋणात्मक अंक पाने वालों को भी दाखिला के लिए बुलाया गया।
इतना ही नहीं प्रवेश प्रक्रिया में देरी को लेकर एमबीए तथा अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा कराने कराने का निर्णय लिया गया। शिक्षकों का कहना था कि अन्य संस्थानों में दिसंबर-जनवरी में ही प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। मार्च-अप्रैल तक तो प्रवेश हो जाते हैं। इसके विपरीत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तब प्रवेश प्रक्रिया शुरू होती है। इसकी वजह से मेधावी छात्र-छात्रा दूसरे संस्थानों में दाखिला ले लेते हैं। साथ में आवेदकों की संख्या भी कम रह जाती है। शिक्षकों के इस तर्क के बाद प्रोफेशनल कोर्सेज में अलग से प्रवेश लेने का निर्णय लिया गया। इन कवायदों के बावजूद आगामी सत्र के लिए भी प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू करना तो दूर उल्टे, और देरी हो गई। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि देरी की वजह से आवेदकों की संख्या घटी तो कालेजों के सामने सीट भरने की चुनौती बढ़ जाएगी।
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में लेटलतीफी का नुकसान संघटक कालेजों को उठाना पड़ सकता है। विगत वर्षों में कम आवेदन की वजह से सभी कालेजों में स्नातक की सीटें खाली रह गईं थीं। स्थिति यह है कि आवेदकों की कम संख्या को लेकर बीए में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा के औचित्य पर ही सवाल उठने लगा है। ऐसे में अभी तक प्रवेश संबंधित कार्यक्रम जारी नहीं होने से सीट भरने की चुनौती और बढ़ गई है।
बीएचयू समेत अन्य विश्वविद्यालयों में दाखिला के लिए आवेदन मांगे जा चुके हैं। इसके विपरीत इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक कार्यक्रम भी तय नहीं कर पाया है। लेटलतीफी की वजह से विगत वर्षों में बीए में दाखिला के लिए सीट के तकरीबन बराबर आवेदन पहुंचे। एक साल तो उससे कम आवेदन पहुंचे। इसका नतीजा है कि कालेज ही नहीं विश्वविद्यालय में भी बीए की सीटें खाली रह गईं। जबकि, कालेजों में ऋणात्मक अंक पाने वालों को भी दाखिला के लिए बुलाया गया।
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इतना ही नहीं प्रवेश प्रक्रिया में देरी को लेकर एमबीए तथा अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा कराने कराने का निर्णय लिया गया। शिक्षकों का कहना था कि अन्य संस्थानों में दिसंबर-जनवरी में ही प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। मार्च-अप्रैल तक तो प्रवेश हो जाते हैं। इसके विपरीत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तब प्रवेश प्रक्रिया शुरू होती है। इसकी वजह से मेधावी छात्र-छात्रा दूसरे संस्थानों में दाखिला ले लेते हैं। साथ में आवेदकों की संख्या भी कम रह जाती है। शिक्षकों के इस तर्क के बाद प्रोफेशनल कोर्सेज में अलग से प्रवेश लेने का निर्णय लिया गया। इन कवायदों के बावजूद आगामी सत्र के लिए भी प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू करना तो दूर उल्टे, और देरी हो गई। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि देरी की वजह से आवेदकों की संख्या घटी तो कालेजों के सामने सीट भरने की चुनौती बढ़ जाएगी।
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