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निदेशालय ने कॉलेजों से मांग 14 लाख्ा का हिसाब
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जारी की जा चुकी धनराशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के निर्देश
छह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को निदेशालय की ओर जारी किया गया पत्र
प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में सेमिनार, सिम्पोजियम, वर्कशॉप के लिए जारी की गई धनराशि का कॉलेजों से हिसाब मांगा गया है। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से छह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। उपभोग प्रमाणपत्र उपलब्ध न कराने पर प्राचार्य एवं आयोजन से संबंधित अन्य लोगों का वेतन रोक दिया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में शासन की ओर से अशासकीय सहायक प्राप्त महाविद्यालयों में सेमिनार, सिम्पोजिम, वर्कशॉप के लिए 14 लाख 20 हजार रुपये जारी किए गए थे। यह धनराशि आरटीजीएस के जरिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के माध्यम से अशासकीय सहायक प्राप्त महाविद्यालयों को आवंटित की गई थी। महाविद्यालयों की ओर से मार्च 2019 से पूर्व उपभोग प्रमाणपत्र निदेशालय को उपलब्ध कराना था, लेकिन क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों या अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की ओर से उपभोग प्रमाणपत्र शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उच्च शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध नहीं कराए गए।
सेमिनार, सिम्पोजिम, वर्कशॉप के लिए धनराशि दो किस्तों में दी गई थी। पहली किस्त में सात लाख दस हजार रुपये और दूसरी में भी इतनी ही रकम दी गई। यह रकम वाराणसी, बरेली, मेरठ, लखनऊ, आगरा और कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय के तहत आने वाले महाविद्यालयों को जारी की गई थी। अब उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएम शर्मा की ओर से संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए कहा गया है कि संबंधित कॉलेज उपभोग प्रमाणपत्र ट्रेजरी चालान सहित उपलब्ध नहीं कराते हैं तो प्राचार्य और सेमिनार, सिम्पोजियम, वर्कशॉप के सचिव एवं संयोजक का वेतन भुगतान रोकने की चेतावनी जारी की जाए।
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छह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को निदेशालय की ओर जारी किया गया पत्र
प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में सेमिनार, सिम्पोजियम, वर्कशॉप के लिए जारी की गई धनराशि का कॉलेजों से हिसाब मांगा गया है। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से छह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। उपभोग प्रमाणपत्र उपलब्ध न कराने पर प्राचार्य एवं आयोजन से संबंधित अन्य लोगों का वेतन रोक दिया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में शासन की ओर से अशासकीय सहायक प्राप्त महाविद्यालयों में सेमिनार, सिम्पोजिम, वर्कशॉप के लिए 14 लाख 20 हजार रुपये जारी किए गए थे। यह धनराशि आरटीजीएस के जरिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के माध्यम से अशासकीय सहायक प्राप्त महाविद्यालयों को आवंटित की गई थी। महाविद्यालयों की ओर से मार्च 2019 से पूर्व उपभोग प्रमाणपत्र निदेशालय को उपलब्ध कराना था, लेकिन क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों या अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की ओर से उपभोग प्रमाणपत्र शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उच्च शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध नहीं कराए गए।
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सेमिनार, सिम्पोजिम, वर्कशॉप के लिए धनराशि दो किस्तों में दी गई थी। पहली किस्त में सात लाख दस हजार रुपये और दूसरी में भी इतनी ही रकम दी गई। यह रकम वाराणसी, बरेली, मेरठ, लखनऊ, आगरा और कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय के तहत आने वाले महाविद्यालयों को जारी की गई थी। अब उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएम शर्मा की ओर से संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए कहा गया है कि संबंधित कॉलेज उपभोग प्रमाणपत्र ट्रेजरी चालान सहित उपलब्ध नहीं कराते हैं तो प्राचार्य और सेमिनार, सिम्पोजियम, वर्कशॉप के सचिव एवं संयोजक का वेतन भुगतान रोकने की चेतावनी जारी की जाए।
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