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एडीए ने तय किए कोचिंग खोलने के मानक

Sat, 20 Dec 2014 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 20 Dec 2014 12:12 AM IST
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कोचिंग संस्थान के लिए उत्तर प्रदेश में अब तक कोई नहीं है। इसका नतीजा है कि आवासीय से लेकर व्यावसायिक, हर इलाके में कोचिंग संस्थानों की भरमार हो गई है। गली-मोहल्लों में भी बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान खुले हैं, जो अवैध रूप से चल रहे हैं। इनमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से फीस के रूप में मोटी रकम वसूली जाती है लेकिन सरकार को कोई फायदा नहीं मिलता। ऐसे में इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) ने पूरे प्रदेश में कोचिंग खोलने के लिए मानक तय किए हैं। एडीए इसे शासन को भेज चुका है। चार दिन पहले उपाध्यक्ष ने फिर से पत्र भेजकर इसे लागू कराने का अनुरोध किया है।
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शहरों में आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों के निर्माण, गतिविधियों के लिए नियम-कानून बने हैं लेकिन कोचिंग संस्थान के ऐसा कोई नियम नहीं है। आवासीय, व्यावसायिक क्षेत्र में संकरी सड़क हो या गली-मोहल्ले, बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान से लेकर दो-चार कमरे किराए पर लेकर कोचिंग चलाई जाती है। इनमें हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। फीस के रूप में कोचिंग संचालकों को मोटी आय होती है। शुद्ध रूप से व्यावसायिक गतिविधि होने के बावजूद कोचिंग खोलने के संबंध में कोई नियम न होने के कारण सरकार को इनसे एक पाई नहीं मिलती।
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अकेले इलाहाबाद में बड़े-छोटे तकरीबन 450 कोचिंग संस्थान हैं। यह संस्थान न ही व्यावसायिक गतिविधि में आते हैं न ही किसी तरह का व्यावसायिक टैक्स अदा करते हैं। इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने वाहनों को सड़क, गली में खड़े करते हैं, जिससे आम लोगों को दिक्कत होती है। ऐसे में एडीए ने कोचिंग संस्थान खोलने के लिए मानक तय किए हैं। इसके तहत शहर के किसी भी हिस्से में कोचिंग संस्थान के लिए भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 200 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है, जो न्यूनतम 12 चौड़ी सड़क पर ही मान्य होगा। कुल जमीन के 50 फीसदी हिस्से पर निर्माण होगा और इसके लिए एफएआर 1.5 अनुमन्य होगा। कोचिंग के लिए इमारत खड़ी करने पर तय सीमा तक सेटबैक भी छोड़ना होगा। इसमें पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करनी होगी। कोचिंग संस्थान खोलने के लिए नक्शा दाखिल करने पर आम लोगों से सुझाव-आपत्ति ली जाएगी। ऐसे संस्थान के लिए महायोजना जोनिंग रेगुलेशन के प्रावधानों के तहत प्रभाव शुल्क लिया जाएगा। तय मानक पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने शासन को भेज दिया है। उन्होंने 16 दिसंबर को शासन को फिर रिमाइंडर भेजकर इस पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
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