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समापन समारोह का बिशप जॉनसन स्कूल में हुआ सीधा प्रसारण
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 03 Apr 2017 01:29 AM IST
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हाईकोर्ट के 150वें स्थापना वर्ष के समापन समारोह के मुख्य पांडाल में तो चुनिंदा लोगों को ही प्रवेश मिला लेकिन अधिवक्ताओं की बड़ी संख्या ऐसी रही जिन्होंने बिशप जॉनसन स्कूल पहुंचकर खुद को इस गौरवशाली और ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बनाया। स्कूल में लगे स्क्रीन पर हो रहे सीधे प्रसारण की मदद से वकीलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ समेत अन्य अतिथियों के दिल की बात पूरे मन से सुनी। कार्यपालिका और न्यायपालिका के इन महानुभवों को सुनने को लेकर उनमें खासा उत्साह रहा और लगातार तालियां बजती रहीं। हालांकि उत्साह से भरे इस माहौल के बीच एक पल ऐसा भी आया जब मुख्यमंत्री के वक्तव्य के बाद पांडाल में खामोशी छा गई। योगी ने न्याय पाने के लिए दूरी कम करने की बात कही तो लोग एक-दूसरे को देखने लगे। उनके इस वक्तव्य के अलग-अलग निहितार्थ तलाशे जाते रहे। हालांकि, यह सन्नाटा कुछ पल के लिए ही रहा और अगले वक्तव्य के साथ फिर उत्साह लौट आया।
स्कूल के मैदान में बड़ा पांडाल लगाया गया था। आयोजन का समय 10.30 बजे निर्धारित था लेकिन उससे पहले ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता पहुंच गए थे। इस ऐतिहासिक समारोह का महिलाएं भी साक्षी बनीं। लोगों के उत्साह और गंभीरता के इससे भी समझा जा सकता है कि सिग्नल टूटने की वजह से बीच-बीच में प्रसारण रुक जाता। यहां तक कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान भी प्रसारण में बाधा आई लेकिन लोग खामोश रहे। कोई हूटिंग नहीं हुई। स्कूल में पहुंची सुमन श्रीवास्तव, प्रेम शंकर का कहना था कि ऐसे अवसर जीवन में कभी-कभी आते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस तरह से सुनना काफी अच्छा लगा।
हालांकि उत्साह के इस माहौल के बीच गर्मी ने अधिवक्ताओं को परेशान किया। तीखी धूप और तपिश को देखते हुए स्कूल में विशेष इंतजाम किए गए थे। पानी भी पर्याप्त रहा। पांडाल में जगह-जगह पैडिस्टल लगे थे। इससे कुछ राहत जरूर रही लेकिन इस भीषण गर्मी के सामने वह नाकाफी रहा।
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स्कूल के मैदान में बड़ा पांडाल लगाया गया था। आयोजन का समय 10.30 बजे निर्धारित था लेकिन उससे पहले ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता पहुंच गए थे। इस ऐतिहासिक समारोह का महिलाएं भी साक्षी बनीं। लोगों के उत्साह और गंभीरता के इससे भी समझा जा सकता है कि सिग्नल टूटने की वजह से बीच-बीच में प्रसारण रुक जाता। यहां तक कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान भी प्रसारण में बाधा आई लेकिन लोग खामोश रहे। कोई हूटिंग नहीं हुई। स्कूल में पहुंची सुमन श्रीवास्तव, प्रेम शंकर का कहना था कि ऐसे अवसर जीवन में कभी-कभी आते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस तरह से सुनना काफी अच्छा लगा।
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हालांकि उत्साह के इस माहौल के बीच गर्मी ने अधिवक्ताओं को परेशान किया। तीखी धूप और तपिश को देखते हुए स्कूल में विशेष इंतजाम किए गए थे। पानी भी पर्याप्त रहा। पांडाल में जगह-जगह पैडिस्टल लगे थे। इससे कुछ राहत जरूर रही लेकिन इस भीषण गर्मी के सामने वह नाकाफी रहा।
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