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क्लोज फ्रेड का हलफनामा नहीं होगा स्वीकार
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Close Fred's affidavit will not be accepted
‘क्लोज फ्रेंड’ का हलफनामा नहीं होगा स्वीकार
हाईकोर्ट ने महानिबंधक को दिया निर्देश, परिवार के सदस्य या रिश्तेदार ही दाखिल करें हलफनामा
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत अर्जी या याचिका दाखिल करते समय अब ‘क्लोज फ्रेंड’ (निकट मित्र) की ओर से दाखिल शपथपत्र या हलफनामा स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने महानिबंधक से कहा कि वह आपराधिक मामलों में दाखिल याचिकाओं, अर्जियों में याची के परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों का हलफनामा ही स्वीकार करें। जिन मामलों में हलफनामा नजदीकी मित्र बताकर दाखिल किया गया है, उनको स्वीकार न किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि अपरिहार्य स्थिति में कोई नजदीकी मित्र हलफनामा दाखिल करता है तो उसके पास परिवार के सदस्यों या रिश्तेदार की लिखित अनुमति होनी चाहिए, तभी उसका हलफनामा स्वीकार किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर के नदीम की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने दिया है। नदीम की जमानत अर्जी में रवींद्र नाम के व्यक्ति की ओर से हलफनामा दिया गया था। इसमें लिखा था कि शपथकर्ता नदीम का नजदीकी मित्र है। कोर्ट ने कहा कि शपथकर्ता का फोटो देखने से ऐसा लगता है कि वह सीनियर सिटीजन है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बहुत मामले देखने में आ रहे हैं। जब अभियुक्त की ओर से दाखिल होने वाली जमानत अर्जी में दाखिल हलफनामे में कहा जाता है की शपथकर्ता अभियुक्त का नजदीकी मित्र है। जबकि, अभियुक्त के परिवार या रिश्तेदार खुद जमानत के लिए नहीं आते हैं। इस स्थिति में किसी भी ऐसे व्यक्ति का हलफनामा स्वीकार न किया जाए जो अभियुक्त का रिश्तेदार या परिवार का सदस्य न हो। कोर्ट ने महानिबंधक को सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है।
जरूरी है हलफनामा देना
हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिकाओं, जमानत अर्जियों, अपील आदि सभी में दाखिल करने वाले का शपथ आवश्यक होता है। इसमें सबसे पहलेे तो याचिकाकर्ता का ही शपथपत्र होना चाहिए, मगर कई याचिकाकर्ता स्वयं हाईकोर्ट आने की स्थिति में नहीं होते हैं। जैसे जमानत के मामले में अभियुक्त जेल में होने के कारण खुद हलफनामा नहीं दे सकता। इस स्थिति में याचिकाकर्ता के परिवार का सदस्य या रिश्तेदार या फिर नजदीकी मित्र जिसे मामले के सभी तथ्यों की भलीभांति जानकारी हो याची की ओर से हलफनामा दाखिल कर सकता है। इस सुविधा के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है।
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हाईकोर्ट ने महानिबंधक को दिया निर्देश, परिवार के सदस्य या रिश्तेदार ही दाखिल करें हलफनामा
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत अर्जी या याचिका दाखिल करते समय अब ‘क्लोज फ्रेंड’ (निकट मित्र) की ओर से दाखिल शपथपत्र या हलफनामा स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने महानिबंधक से कहा कि वह आपराधिक मामलों में दाखिल याचिकाओं, अर्जियों में याची के परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों का हलफनामा ही स्वीकार करें। जिन मामलों में हलफनामा नजदीकी मित्र बताकर दाखिल किया गया है, उनको स्वीकार न किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि अपरिहार्य स्थिति में कोई नजदीकी मित्र हलफनामा दाखिल करता है तो उसके पास परिवार के सदस्यों या रिश्तेदार की लिखित अनुमति होनी चाहिए, तभी उसका हलफनामा स्वीकार किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर के नदीम की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने दिया है। नदीम की जमानत अर्जी में रवींद्र नाम के व्यक्ति की ओर से हलफनामा दिया गया था। इसमें लिखा था कि शपथकर्ता नदीम का नजदीकी मित्र है। कोर्ट ने कहा कि शपथकर्ता का फोटो देखने से ऐसा लगता है कि वह सीनियर सिटीजन है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बहुत मामले देखने में आ रहे हैं। जब अभियुक्त की ओर से दाखिल होने वाली जमानत अर्जी में दाखिल हलफनामे में कहा जाता है की शपथकर्ता अभियुक्त का नजदीकी मित्र है। जबकि, अभियुक्त के परिवार या रिश्तेदार खुद जमानत के लिए नहीं आते हैं। इस स्थिति में किसी भी ऐसे व्यक्ति का हलफनामा स्वीकार न किया जाए जो अभियुक्त का रिश्तेदार या परिवार का सदस्य न हो। कोर्ट ने महानिबंधक को सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है।
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जरूरी है हलफनामा देना
हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिकाओं, जमानत अर्जियों, अपील आदि सभी में दाखिल करने वाले का शपथ आवश्यक होता है। इसमें सबसे पहलेे तो याचिकाकर्ता का ही शपथपत्र होना चाहिए, मगर कई याचिकाकर्ता स्वयं हाईकोर्ट आने की स्थिति में नहीं होते हैं। जैसे जमानत के मामले में अभियुक्त जेल में होने के कारण खुद हलफनामा नहीं दे सकता। इस स्थिति में याचिकाकर्ता के परिवार का सदस्य या रिश्तेदार या फिर नजदीकी मित्र जिसे मामले के सभी तथ्यों की भलीभांति जानकारी हो याची की ओर से हलफनामा दाखिल कर सकता है। इस सुविधा के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है।
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