Prayagraj : अलोपीबाग फ्लाईओवर के नीचे नाले में बालू की बोरियां छोड़ने से डूबा शहर, जलभराव के बाद उठे सवाल
दो दिन पूर्व 50 एमएम से अधिक बारिश में शहर डूबने-उतराने लगा। शहरवासी त्राहि-त्राहि करने लगे। शनिवार को भी कई प्रमुख मार्गों और मोहल्लों में जलभराव से लोगों को निजात नहीं मिल सकी है।
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दो दिन पूर्व 50 एमएम से अधिक बारिश में शहर डूबने-उतराने लगा। शहरवासी त्राहि-त्राहि करने लगे। शनिवार को भी कई प्रमुख मार्गों और मोहल्लों में जलभराव से लोगों को निजात नहीं मिल सकी है। इस पर जब चाैतरफा सवाल उठे तो निगम अधिकारी लोनिवि को जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका कहना है कि महाकुंभ के दाैरान लोनिवि ने अलोपीबाग फ्लाईओवर का कार्य कराया था। उस दाैरान फ्लाईओवर के नीचे नाले में बालू की बोरियां वैसे ही छोड़ दी गई थीं जो अल्लापुर, जार्जटाउन, सोहबतियाबाग सहित आसपास के इलाकों में जलभराव का कारण बना।
सवाल यह है कि जब लोनिवि ने नाले में बालू की बोरियां छोड़ दी थीं तो बरसात से पहले निगम ने नाले की सफाई क्यों नहीं कराई।महाकुंभ के पहले लोक निर्माण विभाग ने अलोपीबाग फ्लाईओवर का निर्माण कराया था। इस दौरान पिलर को बांधने के लिए बालू की बोरियां भरकर नालों में रखीं गईं थीं, जिसे कार्य खत्म होने के बाद हटाया नहीं गया। ऐसे में जब झमाझम बारिश हुई तो पूरे शहर में जगह- जगह जलभराव हो गया। लोगों के घरों में गंदा पानी चला गया। नगर निगम पर नालों की सफाई नहीं कराए जाने के आरोप भी लगे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पोस्ट कर सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए। हरकत में आए नगर निगम के अधिकारियों ने जब जलनिकासी के लिए सफाई अभियान चलाया तो पता चला कि फ्लाईओवर के नीचे बोरियों में बालू भरकर रखे जाने से पानी का बहाव बाधित है। इस कारण जलभराव की समस्या गंभीर हो गई। इसे लेकर शनिवार को नगर निगम के अधिकारियाें के साथ पार्षद आशीष द्विवेदी, शिव सेवक सिंह सहित अन्य पार्षदों ने बैठक भी की।
दिन भर मशक्कत के बाद नगर निगम द्वारा सफाई कराई गई, जिसके बाद जार्ज टाउन इलाके सहित आसपास के क्षेत्रों का पानी तेजी से निकल सका। जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए बाढ़ की वजह से बंद मोरिक गेट भी खुलवाया गया। सवाल यह है कि फ्लाईओवर का निर्माण हुए आठ माह बीत गए, लेकिन न तो लोक निर्माण विभाग ने इसकी चिंता की और न ही नगर निगम ने शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने को लेकर पहले से नालों की सफाई व्यवस्था देखी। नतीजा शहर की बड़ी आबादी को जलभराव से फजीहत झेलनी पड़ी।
शहर में जलभराव के कारणों की तलाश की गई तो पता लगा कि अलोपीबाग फ्लाईओवर के नीचे बालू की बोरियां नाले में निर्माण के बाद छोड़ दी गईं थीं। सफाईकमियों को ले जाकर चेक कराया गया तो वहां पानी का बहाव बंद था। इसके बाद नगर निगम ने मजदूर लगाकर सफाई कराई जिसके बाद तेजी से जलनिकासी हुई है। - दीपेंद्र यादव, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम
निगम की नींद तब टूटी जब 30 से अधिक वार्डों में हुई जलप्लावन की स्थिति
मूसलाधार बारिश के बाद शहर के 30 से अधिक वार्डों में जलप्लावन जैसी स्थिति बन गई। नगर निगम की नींद तब टूटी, जब आधा शहर जलमग्न हो गया। अब महापौर गणेश केसरवानी ने जलभराव के लिए पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम और पीडीए के अधूरे निर्माण कार्यों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि अलोपीबाग फ्लाईओवर के दोहरीकरण के दौरान नाले की पुलिया को बालू की बोरियों से बंद कर दिया गया, लेकिन काम पूरा होने के बाद बोरियां हटाई ही नहीं गईं।
बृहस्पतिवार की देर रात और शुक्रवार की सुबह हुई झमाझम बारिश के बाद आधे शहर में नालों और सीवर का गंदा पानी घरों में घुस गया। सड़कों पर घुटनों से कमर तक पानी भर गया और हजारों लोग खाने-पीने से लेकर स्वास्थ्य संकट से जूझते रहे। आलम यह रहा कि हजारों की आबादी दिन भर घर के अंदर पानी में घिरी रही, किसी के घर में राशन भीग गया तो किसी के छोटे बच्चे और बुजुर्ग बुखार-जुकाम की चपेट में आ गए।
अब महापौर ने लोनिवि के साथ ही मेला प्राधिकरण पर भी उंगली उठाई। उनके मुताबिक, परेड ग्राउंड के नाले पर बांस-बल्ली और पौधे लगाकर सुंदरीकरण किया गया, जिसे हटाने की अनुमति नगर निगम ने मांगी थी लेकिन समय पर मंजूरी नहीं मिली। नतीजा मोरी गेट इलाके में पानी की निकासी बाधित हुई। पीडीए पर आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान कई स्थानों पर नालों को कनेक्ट ही नहीं किया गया, जिससे बरसाती पानी बहने का रास्ता बंद हो गया। नगर निगम का कहना है कि उसने पहले ही पीडीए को लिखित रूप से चेताया था, लेकिन सुधार नहीं हुआ।
सवाल जनता का... क्या पांच माह सो रहा था नगर निगम
नैनी के प्रियांशु श्रीवास्तव , मालवीय नगर के विवेक सिंह, मधवापुर के विवेक गुप्ता, राहुल अग्रवाल, विश्वरंजन मिश्र, मालती सिंह, कौशल्या पांडेय आदि शहरवासियों का कहना है अगर पहली बार जलभराव के दौरान जिम्मेदार नगर निगम कारण खोजकर सफाई अभियान चलाता तो इस बार समस्या इतनी गंभीर नहीं होती। बरसात में शहर डूबे, यह अप्रत्याशित नहीं, बल्कि अपर्याप्त तैयारी का नतीजा है।