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सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा भी हैं केपी ट्रस्ट के सदस्य
Tue, 25 Dec 2018 02:14 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 25 Dec 2018 02:14 AM IST
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Shatrughan Sinha and Prakash Raj
- फोटो : twitter
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा भी एशिया के सबसे बड़े केपी ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य हैं। साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और सुबोधकांत सहाय भी इसके सदस्य हैं। वर्ष 1878 में मुंशी काली प्रसाद ने कायस्थ पाठशाला(केपी ट्रस्ट) का गठन किया था। ट्रस्ट की कड़ी नियमावली बनाई। मुंशी काली प्रसाद का शिक्षा से जुड़ाव इसके विकास में सहायक बना। नामी हस्तियों में शुमार पूर्व सीएम डॉ. संपूर्णानंद, डॉ. गोकुल प्रसाद, मुंशी हरनंदन प्रसाद, डॉ. प्यारे लाल, चौधरी नौनिहाल सिंह केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे।
केपी ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा कुछ समय यहां आए तो उनसे अध्यक्ष पद के कई प्रत्याशियों ने मुलाकात कर चुनाव के बारे में चर्चा की थी। प्रत्याशियों की मानें तो उन्होंने वादा किया था कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम ने हुआ तो वह मतदान करने जरूर आएंगे। अभी तक इस बारे में कोई जानकारी किसी के पास नहीं है। इसी तरह सुबोधकांत सहाय और यशवंत सिन्हा के आगमन की अटकलें हैं।
केपी ट्रस्ट से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जुड़ाव रहा है। वर्तमान में कई न्यायमूर्ति इस ट्रस्ट के सदस्य हैं। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस वीएन खरे भी इस ट्रस्ट के सदस्य रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और कई अन्य न्यायमूर्ति ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य हैं।
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0 हरिवंश राय बच्चन और बिग बी नहीं बन पाए सदस्य
के पी ट्रस्ट की कड़ी नियमावली देश ही नहीं दुनिया में विख्यात हरिवंश राय बच्चन को इसकी सदस्यता दिलाने में रोड़ा बनी। उनके पुत्र सदी के महानायक बिग बी यानी अमिताभ बच्चन भी ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन पाए। नियम के तहत ट्रस्ट की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले के माता-पिता के साथ पत्नी का भी कायस्थ होना जरूरी होता है। बताते हैं कि कई प्रयास के बाद भी तेजी बच्चन से विवाह करना उन्हें ट्रस्ट की सदस्यता दिलाने में बाधा बना।
दो कच्चे कमरों से शुरू सफर आज बना साम्राज्य
हिंदी के साथ अरबी, फारसी और संस्कृत के विद्वान मुंशी काली प्रसाद शिक्षा के प्रसार प्रचार में ही लगे रहे। वर्ष 1873 में उन्होंने दो कच्चे कमरों में कायस्थ पाठशाला स्थापित कर शिक्षा के उत्थान का जो सफर शुरू किया वह आज बड़ा साम्राज्य बन गया है। इसके पांच वर्ष बाद गठित केपी ट्रस्ट वर्तमान में चार महाविद्यालयों समेत 13 शिक्षण संस्थाओं का संचालन कर रहा है।
मुंशी काली प्रसाद ने जब कायस्थ पाठशाला की स्थापना की तो शुरुआत में सिर्फ दस बच्चों ने प्रवेश लिया। क्रमश: विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने लगी तो उन्होंने शिक्षण संस्थाओं और अन्य सामाजिक उद्देश्यों के लिए कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट(केपी ट्रस्ट) का गठन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्ति केपी ट्रस्ट को दान कर दी। केपी ट्रस्ट अपने इस उद्देश्य की पूर्ति में लगा रहा। निवर्तमान अध्यक्ष चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह के मुताबिक वर्तमान में ट्रस्ट के चार महाविद्यालय, चार इंटर कॉलेज, एक बीएड कॉलेज और चार कान्वेंट स्कूल हैं। वहीं कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि केपी ट्रस्ट का लखनऊ में यात्री निवास भी है। वहां कायस्थ समाज के लोग ट्रस्ट का परिचय पत्र दिखाकर विश्राम कर सकते हैं।
0 सुभाषचंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण
ने अपनी संपत्ति ट्रस्ट को की थी दान
देश में आजादी की अलख जगाकर तूफान खड़ा कर देने वाले सुभाषचंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण ने अपनी संपत्ति केपी ट्रस्ट को दान में दी थी। ट्रस्ट के अभिलेखों में इसका उल्लेख है।
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केपी ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा कुछ समय यहां आए तो उनसे अध्यक्ष पद के कई प्रत्याशियों ने मुलाकात कर चुनाव के बारे में चर्चा की थी। प्रत्याशियों की मानें तो उन्होंने वादा किया था कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम ने हुआ तो वह मतदान करने जरूर आएंगे। अभी तक इस बारे में कोई जानकारी किसी के पास नहीं है। इसी तरह सुबोधकांत सहाय और यशवंत सिन्हा के आगमन की अटकलें हैं।
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केपी ट्रस्ट से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जुड़ाव रहा है। वर्तमान में कई न्यायमूर्ति इस ट्रस्ट के सदस्य हैं। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस वीएन खरे भी इस ट्रस्ट के सदस्य रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और कई अन्य न्यायमूर्ति ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य हैं।
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0 हरिवंश राय बच्चन और बिग बी नहीं बन पाए सदस्य
के पी ट्रस्ट की कड़ी नियमावली देश ही नहीं दुनिया में विख्यात हरिवंश राय बच्चन को इसकी सदस्यता दिलाने में रोड़ा बनी। उनके पुत्र सदी के महानायक बिग बी यानी अमिताभ बच्चन भी ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन पाए। नियम के तहत ट्रस्ट की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले के माता-पिता के साथ पत्नी का भी कायस्थ होना जरूरी होता है। बताते हैं कि कई प्रयास के बाद भी तेजी बच्चन से विवाह करना उन्हें ट्रस्ट की सदस्यता दिलाने में बाधा बना।
दो कच्चे कमरों से शुरू सफर आज बना साम्राज्य
हिंदी के साथ अरबी, फारसी और संस्कृत के विद्वान मुंशी काली प्रसाद शिक्षा के प्रसार प्रचार में ही लगे रहे। वर्ष 1873 में उन्होंने दो कच्चे कमरों में कायस्थ पाठशाला स्थापित कर शिक्षा के उत्थान का जो सफर शुरू किया वह आज बड़ा साम्राज्य बन गया है। इसके पांच वर्ष बाद गठित केपी ट्रस्ट वर्तमान में चार महाविद्यालयों समेत 13 शिक्षण संस्थाओं का संचालन कर रहा है।
मुंशी काली प्रसाद ने जब कायस्थ पाठशाला की स्थापना की तो शुरुआत में सिर्फ दस बच्चों ने प्रवेश लिया। क्रमश: विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने लगी तो उन्होंने शिक्षण संस्थाओं और अन्य सामाजिक उद्देश्यों के लिए कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट(केपी ट्रस्ट) का गठन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्ति केपी ट्रस्ट को दान कर दी। केपी ट्रस्ट अपने इस उद्देश्य की पूर्ति में लगा रहा। निवर्तमान अध्यक्ष चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह के मुताबिक वर्तमान में ट्रस्ट के चार महाविद्यालय, चार इंटर कॉलेज, एक बीएड कॉलेज और चार कान्वेंट स्कूल हैं। वहीं कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि केपी ट्रस्ट का लखनऊ में यात्री निवास भी है। वहां कायस्थ समाज के लोग ट्रस्ट का परिचय पत्र दिखाकर विश्राम कर सकते हैं।
0 सुभाषचंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण
ने अपनी संपत्ति ट्रस्ट को की थी दान
देश में आजादी की अलख जगाकर तूफान खड़ा कर देने वाले सुभाषचंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण ने अपनी संपत्ति केपी ट्रस्ट को दान में दी थी। ट्रस्ट के अभिलेखों में इसका उल्लेख है।