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महंगे हो गए चाइनीज मोबाइल के पार्टस, दुकानदार दे रहे फोन बदलने की सलाह
Fri, 03 Jul 2020 12:51 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 03 Jul 2020 12:51 AM IST
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- फोटो : asaplandnews / twitter
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चीन के आर्थिक बहिष्कार की मुहिम तेज होने का असर शहर के बाजार में दिखने लगा है। खासतौर से स्मार्ट फोन पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। बीते कुछ दिनों के दौरान चीनी कंपनी के जियोमी, रेडमी, वीवो, ओप्पो आदि कंपनी के मोबाइल की बिक्री जहां एक ओर कम हुई है तो वहीं इन फोन के पार्ट्स महंगे हो गए हैं। इससे मरम्मत कराने में लोगों की जेब पर खासा असर पड़ रहा है। आलम ये है कि तमाम दुकानदार इन फोन की मरम्मत की बजाय उसे बदलने की सलाह ग्राहकों को दे रहे हैं।
राजरूपपुर के अनिकेत श्रीवास्तव का ही उदाहरण लें। वह पिछले दो वर्ष ओप्पो का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीच फोन के अंदर पानी चले जाने से उसका डिस्प्ले खराब हो गया है। कुछ अन्य पार्ट्स भी खराब हो गए। वह मरम्मत के लिए इंदिरा भवन पहुंचे तो वहां फोन देखने के बाद उसे ठीक करने का कुल खर्च 4800 रुपये बताया गया। जबकि अनिकेत ने जब फोन लिया था तब उसकी कीमत 9800 रुपये थी।
दरअसल चाइना के खिलाफ चल रही मुहिम की वजह से वहां की कंपनियों के मोबाइल पार्ट्स इन दिनों मुश्किल से ही शहर के बाजार में पहुंच पा रहे हैँ। तमाम पार्ट्स के रेट दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं।
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दिल्ली में जिन दुकानदारों के पास पार्टस बचे हैं, वह ज्यादा दाम में उसे बेच रहे हैं। अरविंद ने कहा कि मेमारी कार्ड का दाम 100 से 300 रुपये तक बढ़ा है। इसी तरह मोबाइल बैटरी के दाम में भी 500 रुपये तक का इजाफा हुआ है। डिस्प्ले भी महंगा हुआ है। चार्जर, आईशी आदि के दाम में भी एकाएक तेजी आई है।
मोबाइल रिपेयर की दुकान चला रहे दीपक केसरवानी ने बताया कि रिपेयरिंग का सामन दो से तीन गुना तक महंगा हुआ है। पहले जो फोल्डर 600 से 800 में आता था वह अब 1200 से 1500 तक में पहुंच गया है। टैंपर्ड ग्लास, ईयर फोन, कवर ग्लास, डेटा केबल आदि सभी के दाम इधर बढ़े हैं।
मोबाइल विक्रेता पवन ने बताया कि दिल्ली के बाजार में पीआरसी लिखे उत्पाद आ गए हैं। प्रयागराज में अभी मेड इन पीआरसी के ज्यादा उत्पाद नहीं आए हैं, लेकिन यह तय कि अगर दिल्ली में माल आ चुका है तो आने वाले दिनों में मेड इन पीआरसी लिखे हुए उत्पाद यहां के बाजार में भी दिख सकते हैं।
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राजरूपपुर के अनिकेत श्रीवास्तव का ही उदाहरण लें। वह पिछले दो वर्ष ओप्पो का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीच फोन के अंदर पानी चले जाने से उसका डिस्प्ले खराब हो गया है। कुछ अन्य पार्ट्स भी खराब हो गए। वह मरम्मत के लिए इंदिरा भवन पहुंचे तो वहां फोन देखने के बाद उसे ठीक करने का कुल खर्च 4800 रुपये बताया गया। जबकि अनिकेत ने जब फोन लिया था तब उसकी कीमत 9800 रुपये थी।
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दरअसल चाइना के खिलाफ चल रही मुहिम की वजह से वहां की कंपनियों के मोबाइल पार्ट्स इन दिनों मुश्किल से ही शहर के बाजार में पहुंच पा रहे हैँ। तमाम पार्ट्स के रेट दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं।
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मेमोरी कार्ड, बैटरी, स्पीकर आदि सभी के बढ़ गए दाम
शहर में चाइनीज कंपनियों के मोबाइल के पार्टस दिल्ली से ही दुकानदार खरीद कर लाते हैं। कोविड-19 की वजह से दुकानदार जहां दिल्ली जाने से कतरा रहे हैं तो वहीं भारत-चीन सीमा विवाद की वजह से दिल्ली से आने वाले माल पर भी तकरीबन ब्रेक लग गया है। लक्ष्मण मार्केट के अरविंद शर्मा ने बताया कि चीन से आने वाले पार्टस नहीं आ पा रहे हैं। इस वजह से उनकी कमी बनी हुई है।दिल्ली में जिन दुकानदारों के पास पार्टस बचे हैं, वह ज्यादा दाम में उसे बेच रहे हैं। अरविंद ने कहा कि मेमारी कार्ड का दाम 100 से 300 रुपये तक बढ़ा है। इसी तरह मोबाइल बैटरी के दाम में भी 500 रुपये तक का इजाफा हुआ है। डिस्प्ले भी महंगा हुआ है। चार्जर, आईशी आदि के दाम में भी एकाएक तेजी आई है।
मोबाइल रिपेयर की दुकान चला रहे दीपक केसरवानी ने बताया कि रिपेयरिंग का सामन दो से तीन गुना तक महंगा हुआ है। पहले जो फोल्डर 600 से 800 में आता था वह अब 1200 से 1500 तक में पहुंच गया है। टैंपर्ड ग्लास, ईयर फोन, कवर ग्लास, डेटा केबल आदि सभी के दाम इधर बढ़े हैं।
मेड इन चाइना की जगह लिख रहे अब मेड इन पीआरसी
चीनी कंपनियों के बढ़ रहे विरोध के बीच वहां की कंपनियों ने अपना पैतरा बदल दिया है। अब चीन में निर्मित सामानों पर मेड इन चाइना की जगह मेड इन पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) लिखना शुरू कर दिया है। ताकि लोगों को यह पता न चल सके कि उत्पाद चीन में बना हुआ है।मोबाइल विक्रेता पवन ने बताया कि दिल्ली के बाजार में पीआरसी लिखे उत्पाद आ गए हैं। प्रयागराज में अभी मेड इन पीआरसी के ज्यादा उत्पाद नहीं आए हैं, लेकिन यह तय कि अगर दिल्ली में माल आ चुका है तो आने वाले दिनों में मेड इन पीआरसी लिखे हुए उत्पाद यहां के बाजार में भी दिख सकते हैं।