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मुख्य सचिव के गलत हलफनामे पर हाईकोर्ट नाराज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:28 AM IST
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मुख्य सचिव हाईकोर्ट में तलब
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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प्रमुख सचिव न्याय/एलआर की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में गलत हलफनामा दाखिल कर प्रदेश सरकार फंस गई है। सात जजों की पीठ के समक्ष मुख्य सचिव के शपथपत्र में गलत जानकारी से नाराज पीठ ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांग लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को बताने के लिए कहा है कि किन परिस्थितियों में उन्होंने गलत हलफनामा दाखिल कर दिया जबकि इस पर उनके खुद के हस्ताक्षर हैं। कोर्ट इस मामले पर एक सप्ताह के बाद सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय के पद के लिए चार महीना पहले ही एचजेएस अधिकारी रंगनाथ पांडेय का नाम सरकार के पास भेज दिया था। मगर सरकार ने नियुक्ति नहीं की। इससे पूर्व की सुनवाई में भी कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए साफ कर दिया था कि प्रमुख सचिव न्याय के पद के लिए अधिकारी का नाम हाईकोर्ट ही स्वीकृत करेगा। मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई नियत थी। मुख्य सचिव आलोक रंजन स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। सरकार का पक्ष पूर्व महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने रखा। उन्होंने जैसे ही मुख्य सचिव के हलफनामे को पढ़ना शुरू किया अदालत ने उनको पैरा तीन में उल्लिखित कटेंट पर टोक दिया।
रा तीन में कहा गया था कि प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि एलआर की नियुक्ति के लिए एक से अधिक अधिकारियों के नाम दिए जाएं या कोई पैनल दिया जाए, मगर हाईकोर्ट ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। जबकि वास्तविकता यह थी कि प्रदेश सरकार का प्रस्ताव खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने अपना जवाब सरकार के पास भेज दिया था। पीठ ने जानना चाहा कि किस आधार पर मुख्य सचिव यह कह रहे हैं कि हाईकोर्ट ने कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई रोकते हुए कहा कि मुख्य सचिव पहले यह स्पष्टीकरण दें कि उन्होंने गलत हलफनामा किन परिस्थितियों में दाखिल किया, उसके बाद आगे की सुनवाई होगी। इस पर मसले पर कोर्ट छह मई को सुनवाई करेगी।
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सात जजों की पीठ ने वाराणसी जिला न्यायालय परिसर में हैंड ग्रेनेड मिलने की घटना को गंभीरता से लेते हुए सरकार से एक बार फिर पूछा है कि जिला अदालतोें की सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट पूर्व के आदेश के क्रम में बायोमैट्रिक कार्ड, डीएफएमडी, एचएचएमडी, स्कैनर और सीसीटीवी कैमरे आदि लगाने की प्रगति की जानकारी मांगी। जिला अदालतों और जेलों को वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा से जोड़ने पर हुई प्रगति की भी जानकारी मांगी है।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि जिला अदालतों को बिजली का अलग फीडर देने की दिशा में काम हो रहा है। इस वर्ष 33 अदालतों को अलग फीडर से जोड़ दिया गया है। जिन जिलों में भीषड़ गर्मी पड़ती है और मार्निंग कोर्ट चलती है वहां अलग फीडर से चौबीसो घंटे बिजली दी जाएगी।
वृहद पीठ ने कानपुर में चार अप्रैल को जिला जज सहित अन्य अदालतों में तोड़फोड़ की घटना पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। एसएसपी कानपुर से छह मई तक की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। कानपुर में वकील रामनारायण पांडेय को आपराधिक मामले में जेल भेज देने के विरोध में वकीलों ने जमकर उत्पात और तोड़फोड़ की थी। कोर्ट ने वहां की बार एसोसिएशन को नोटिस जारी करने के अलावा जिला जज से भी रिपोर्ट मांगी है। पूछा है कि कितने वकीलों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
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हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय के पद के लिए चार महीना पहले ही एचजेएस अधिकारी रंगनाथ पांडेय का नाम सरकार के पास भेज दिया था। मगर सरकार ने नियुक्ति नहीं की। इससे पूर्व की सुनवाई में भी कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए साफ कर दिया था कि प्रमुख सचिव न्याय के पद के लिए अधिकारी का नाम हाईकोर्ट ही स्वीकृत करेगा। मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई नियत थी। मुख्य सचिव आलोक रंजन स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। सरकार का पक्ष पूर्व महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने रखा। उन्होंने जैसे ही मुख्य सचिव के हलफनामे को पढ़ना शुरू किया अदालत ने उनको पैरा तीन में उल्लिखित कटेंट पर टोक दिया।
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रा तीन में कहा गया था कि प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि एलआर की नियुक्ति के लिए एक से अधिक अधिकारियों के नाम दिए जाएं या कोई पैनल दिया जाए, मगर हाईकोर्ट ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। जबकि वास्तविकता यह थी कि प्रदेश सरकार का प्रस्ताव खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने अपना जवाब सरकार के पास भेज दिया था। पीठ ने जानना चाहा कि किस आधार पर मुख्य सचिव यह कह रहे हैं कि हाईकोर्ट ने कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई रोकते हुए कहा कि मुख्य सचिव पहले यह स्पष्टीकरण दें कि उन्होंने गलत हलफनामा किन परिस्थितियों में दाखिल किया, उसके बाद आगे की सुनवाई होगी। इस पर मसले पर कोर्ट छह मई को सुनवाई करेगी।
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सात जजों की पीठ ने वाराणसी जिला न्यायालय परिसर में हैंड ग्रेनेड मिलने की घटना को गंभीरता से लेते हुए सरकार से एक बार फिर पूछा है कि जिला अदालतोें की सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट पूर्व के आदेश के क्रम में बायोमैट्रिक कार्ड, डीएफएमडी, एचएचएमडी, स्कैनर और सीसीटीवी कैमरे आदि लगाने की प्रगति की जानकारी मांगी। जिला अदालतों और जेलों को वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा से जोड़ने पर हुई प्रगति की भी जानकारी मांगी है।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि जिला अदालतों को बिजली का अलग फीडर देने की दिशा में काम हो रहा है। इस वर्ष 33 अदालतों को अलग फीडर से जोड़ दिया गया है। जिन जिलों में भीषड़ गर्मी पड़ती है और मार्निंग कोर्ट चलती है वहां अलग फीडर से चौबीसो घंटे बिजली दी जाएगी।
वृहद पीठ ने कानपुर में चार अप्रैल को जिला जज सहित अन्य अदालतों में तोड़फोड़ की घटना पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। एसएसपी कानपुर से छह मई तक की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। कानपुर में वकील रामनारायण पांडेय को आपराधिक मामले में जेल भेज देने के विरोध में वकीलों ने जमकर उत्पात और तोड़फोड़ की थी। कोर्ट ने वहां की बार एसोसिएशन को नोटिस जारी करने के अलावा जिला जज से भी रिपोर्ट मांगी है। पूछा है कि कितने वकीलों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।