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प्रमुख सचिव बेसिक हाईकोर्ट में तलब
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प्रमुख सचिव बेसिक हाईकोर्ट में तलब
खुद हलफनामा दाखिल न कर बीएसए से कराया, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
बेसिक के शिक्षकों को कार्यालयों से संबद्ध करने के मामले में सुनवाई आज
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा द्वारा स्वयं हलफनामा दाखिल न कर, बेसिक शिक्षा अधिकारी के मार्फत हलफनामा दाखिल करने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनको कोर्ट के आदेश का पालन न करने के स्पष्टीकरण के साथ बुधवार 23 अक्तूबर को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने सुनील त्रिवेदी की याचिका पर दिया है।
हाईकोर्ट ने शिक्षकों को कार्यालयों से संबद्ध न करने की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर 30 अगस्त 2019 को विशेष सचिव बेसिक शिक्षा से हलफनामा मांगा था। पूछा था कि अध्यापकों को स्कूलों में तैनात करने के बजाए कार्यालयों में संबद्ध क्यों किया जा रहा है। ऐसा करने से स्कूलों की पढ़ाई को नुकसान हो रहा है। इस संबंध में प्रमुख सचिव की तरफ से कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी बांदा की तरफ से एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने संतोषजनक नहीं माना।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव से स्वयं हलफनामा दाखिल करने को कहा तो सरकारी वकील ने प्रमुख सचिव की तरफ से कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दो सप्ताह का समय मांगा। इस पर नाराज कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव को या तो अपने वैधानिक दायित्व का ज्ञान नहीं है या न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक रूप से अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि प्रमुख सचिव को कोर्ट के आदेश की परवाह नहीं है या वह अदालत को सम्मान नहीं देना चाहते। कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रमुख सचिव को बुधवार 23 अक्तूबर तक हलफनामा दाखिल करने और स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का भी निर्देश दिया है।
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खुद हलफनामा दाखिल न कर बीएसए से कराया, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
बेसिक के शिक्षकों को कार्यालयों से संबद्ध करने के मामले में सुनवाई आज
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा द्वारा स्वयं हलफनामा दाखिल न कर, बेसिक शिक्षा अधिकारी के मार्फत हलफनामा दाखिल करने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनको कोर्ट के आदेश का पालन न करने के स्पष्टीकरण के साथ बुधवार 23 अक्तूबर को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने सुनील त्रिवेदी की याचिका पर दिया है।
हाईकोर्ट ने शिक्षकों को कार्यालयों से संबद्ध न करने की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर 30 अगस्त 2019 को विशेष सचिव बेसिक शिक्षा से हलफनामा मांगा था। पूछा था कि अध्यापकों को स्कूलों में तैनात करने के बजाए कार्यालयों में संबद्ध क्यों किया जा रहा है। ऐसा करने से स्कूलों की पढ़ाई को नुकसान हो रहा है। इस संबंध में प्रमुख सचिव की तरफ से कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी बांदा की तरफ से एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने संतोषजनक नहीं माना।
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कोर्ट ने प्रमुख सचिव से स्वयं हलफनामा दाखिल करने को कहा तो सरकारी वकील ने प्रमुख सचिव की तरफ से कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दो सप्ताह का समय मांगा। इस पर नाराज कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव को या तो अपने वैधानिक दायित्व का ज्ञान नहीं है या न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक रूप से अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि प्रमुख सचिव को कोर्ट के आदेश की परवाह नहीं है या वह अदालत को सम्मान नहीं देना चाहते। कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रमुख सचिव को बुधवार 23 अक्तूबर तक हलफनामा दाखिल करने और स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का भी निर्देश दिया है।
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