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चीफ जस्टिस नहीं सुनेंगे लोकायुक्त का मामला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 07 Aug 2015 02:21 AM IST
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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपनाई गई चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड नहीं सुनेंगे। अधिवक्ता अजय बर्नवाल वाला दाखिल याचिका में लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिका बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी। चूंकि याचिका में लोकायुक्त की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका समाप्त करने को ही चुनौती दी गई है इसलिए उन्होंने अपने ही अधिकारों पर स्वयं सुनवाई करना उचित नहीं मानते हुए याचिका रिलीज कर दिया। इसे दूसरी बेंच के समक्ष नामित करने का निर्देश दिया है जिसमें चीफ जस्टिस नहीं होंगे।
उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त के चयन का मामला विवादों में है। नियमानुसार लोकायुक्त की नियुक्ति सरकार, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश की सहमति से की जाती है। गत दिनों कैबिनेट ने बाई सर्कुलर यह निर्णय ले लिया कि लोकायुक्त एक्ट में संशोधन करके मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को समाप्त कर दिया जाए। अब लोकायुक्त की नियुक्ति प्रदेश सरकार और नेता प्रतिपक्ष की सहमति से ही हो सकेगी। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कहा गया है कि प्रदेश सरकार का निर्णय अवैधानिक है। मुख्य न्यायाधीश इस प्रक्रिया में एकमात्र निष्पक्ष संवैधानिक प्राधिकारी हैं, इसलिए उनकी मंजूरी के बिना लोकायुक्त का चयन अवैधानिक होगा। याचिका में कोर्ट से कैबिनेट के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की गई है।
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उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त के चयन का मामला विवादों में है। नियमानुसार लोकायुक्त की नियुक्ति सरकार, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश की सहमति से की जाती है। गत दिनों कैबिनेट ने बाई सर्कुलर यह निर्णय ले लिया कि लोकायुक्त एक्ट में संशोधन करके मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को समाप्त कर दिया जाए। अब लोकायुक्त की नियुक्ति प्रदेश सरकार और नेता प्रतिपक्ष की सहमति से ही हो सकेगी। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कहा गया है कि प्रदेश सरकार का निर्णय अवैधानिक है। मुख्य न्यायाधीश इस प्रक्रिया में एकमात्र निष्पक्ष संवैधानिक प्राधिकारी हैं, इसलिए उनकी मंजूरी के बिना लोकायुक्त का चयन अवैधानिक होगा। याचिका में कोर्ट से कैबिनेट के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की गई है।
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