Prayagraj : एसआरएन अस्पताल में स्थापित होगी केमिकल, न्यूक्लियर और रेडियोलॉजिकल ट्रीटमेंट यूनिट
महाकुंभ में करोड़ों तीर्थयात्रियों के आने की संभावना है। इसके मद्देनजर सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। इसके तहत एसआरएन अस्पताल में सीबीआरएन यूनिट स्थापित होगी।
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महाकुंभ के दौरान लोगों की सुरक्षा के लिए स्वरूपरानी हॉस्पिटल में केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर ट्रीटमेंट यूनिट स्थापित की जा रही है। खास बात यह है कि फिलहाल दिल्ली एम्स में ही इस तरह की अत्याधुनिक प्रयाेगशाला उपलब्ध है। प्रयोगशाला का उद्देश्य रासायनिक, जैविक और न्यूक्लियर खतरों पर प्रभावी नियंत्रण और अनुसंधान करना है। यह यूनिट महाकुंभ-2025 को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है।
महाकुंभ में करोड़ों तीर्थयात्रियों के आने की संभावना है। इसके मद्देनजर सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। इसके तहत एसआरएन अस्पताल में सीबीआरएन यूनिट स्थापित होगी। यह रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर आपदाओं से निपटने में सहायक होगी। हास्टिपल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि सीबीआरएन यूनिट न केवल चिकित्सा सेवाओं में सुधार लाएगी, बल्कि मेडिकल छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अनुसंधान और प्रशिक्षण के नए अवसर भी प्रदान करेगी।
उन्होंने बताया कि यह विषैले गैसों या रसायनों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के लिए डीकंटैमिनेशन (शरीर से रासायनिक तत्व हटाना) का कार्य करेगी। वहीं संक्रमणकारी वायरस, बैक्टीरिया और फंगस से संक्रमित मरीजों के उपचार में सहायक होगी। इसके अलावा रेडियोधर्मी सामग्री के संपर्क में आए व्यक्तियों के लिए विशेष उपचार और शरीर से रेडियोधर्मी तत्व हटाने में भी कारगर होगी।
इस यूनिट के नोडल अधिकारी वरिष्ठ फिजिशियन मेजर डॉ. जितेंद्र शुक्ला हैं, जो अपने अनुभव और विशेषज्ञता के साथ इस प्रयोगशाला का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ टीम में डॉ. देव कुमार यादव, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. मुक्तेश शामिल हैं।
नरोरा परमाणु विद्युत स्टेशन में दिया गया विशेष प्रशिक्षण
आपात स्थिति के दौरान प्रभावी उपचार और प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए नरोरा परमाणु विद्युत स्टेशन में दो से सात दिसंबर तक एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रयागराज से डॉ. जितेंद्र शुक्ला के नेतृत्व में डॉ. आलोक सिंह डॉ. मुक्तेश एवं डॉ. देव कुमार यादव ने प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रतिभागियों को परमाणु, जैविक और रासायनिक आपात स्थितियों के दौरान चिकित्सा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। साथ ही रेडियोधर्मी विकिरण की पहचान, उपचार के तरीके और प्रभावित व्यक्तियों की चिकित्सा देखभाल के प्रभावी प्रोटोकॉल पर विस्तार से चर्चा की गई।
नई यूनिट एसआरएन अस्पताल की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। यह प्रयागराज में मानव जीवन की सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ेगी। - डॉ. वत्सला मिश्रा, प्राचार्य, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज