Chandra Shekhar Azad Bridge : फाफामऊ सेतु खुलते ही भारी वाहनों के दबाव से चरमराया यातायात
आजाद सेतु पूरी तरह खोले जाने के बाद लखनऊ-रायबरेली और प्रतापगढ़ की ओर से प्रयागराज आने वाले वाहन अब झूंसी तक परिक्रमा करने की बजाए सीधे फाफामऊ पुल से शहर में प्रवेश करने लगे हैं। इसी के साथ पहले दिन ही जाम लगने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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फाफामऊ में गंगा पर निर्मित चंद्रशेखर आजाद सेतु शुक्रवार को भारी वाहनों के लिए खोल दिया गया। इसी के साथ इस सेतु पर बसों, ट्रकों और कामर्शियल कंटेनरों का आवागमन शुरू हो गया। लेकिन, पहले ही दिन भारी वाहनों के दबाव से यातायात चरमरा गया। सहसों बाईपास होते हुए झूंसी से प्रयागराज तक का इस सेतु का डायवर्जन खत्म होने से वाराणसी-प्रयागराज मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होने के साथ ही इस सेतु पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। इससे लगे जाम के कारण एस सेतु पर कई बार वाहन रेंगते नजर आए।
आजाद सेतु पूरी तरह खोले जाने के बाद लखनऊ-रायबरेली और प्रतापगढ़ की ओर से प्रयागराज आने वाले वाहन अब झूंसी तक परिक्रमा करने की बजाए सीधे फाफामऊ पुल से शहर में प्रवेश करने लगे हैं। इसी के साथ पहले दिन ही जाम लगने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। माना जा रहा है कि आजाद सेतु पर भारी और कामर्शियल वाहनों का अचानक दबाव बढ़ने से जाम लगा।
मरम्मत के बाद पूरी तरह से आवागमन के लिए खोल दिया गया पुल
चार पहिया छोटे वाहनों का यातायात इस पर पहले से ही शुरू था। हालांकि जाम के दौरान यातायात पुलिस के जवान जूझते रहे और आड़े-तिरछे घुसे वाहनों को किनारे करवा कर रास्ता खुलवाते रहे। करीब 34 वर्ष पुराने चंद्रशेखर आजात सेतु की क्षतिग्रस्त बेयरिंग और एक्सपेंशन की मरम्मत पूरी होने के बाद इस सेतु पर पूरी तरह यातायात संचालन शुरू करा दिया गया।
भारी वाहनों के लिए सेतु खोले जाने के बाद जहां लखनऊ-रायबरेली-प्रतापगढ़ की ओर से आने वाले वाहनों की अब प्रयागराज की दूरी कम हो गई है, वहीं पैसा और समय दोनों की बचत होगी। उल्लेखनीय है कि इस सेतु की मरम्मत का काम पखवारे भर पहले ही पूरा हो गया था, लेकिन एसटीपी निर्माण के दौरान सर्विस रोड बनाने के लिए इस सेतु पर रूट डायवर्जन की अवधि बढ़ानी पड़ी थी। एनएचच खंड के अधिशासी अभियंता पीके चौधरी के मुताबिक क्षतिग्रस्त एक्सपेंशन, बेयरिंग और पटरियों के अलावा रेलिंग कगी मरम्मत के बाद अब इस सेतु की 50 साल से अधिक भार वहन करने की क्षमता बढ़ गई है। इस सेतु पर अब भारी वाहनों का यातायात लंबे समय तक हो सकेगा।