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High Court : द सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस रूल्स-2015 की वैधता को चुनौती
Fri, 21 Oct 2022 11:16 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Oct 2022 11:16 PM IST
सार
याची के अधिवक्ता रविनाथ तिवारी ने तर्क दिया कि द सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस रूल्स-2015 एडवोकेट एक्ट-1961 के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि एडवोकेट एक्ट-1961 की धारा 22 में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा नामांकन प्रमाणपत्र जारी किए जाने का प्रावधान है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट में द सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस रूल्स-2015 की वैधता को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए ऑल इंडिया बार काउंसिल और यूपी बार काउंसिल से जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट इस मामले में 16 दिसंबर को सुनवाई करेगी। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने रत्नेश मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता रविनाथ तिवारी ने तर्क दिया कि द सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस रूल्स-2015 एडवोकेट एक्ट-1961 के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि एडवोकेट एक्ट-1961 की धारा 22 में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा नामांकन प्रमाणपत्र जारी किए जाने का प्रावधान है। यह प्रमाणपत्र अधिवक्ताओं को जीवन भर के लिए जारी किया जाता है। इसके नवीनीकरण की भी कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि, इसका कोई प्रावधान नहीं है। अगर कोई भी अधिवक्ता प्लेस ऑफ प्रैक्टिस बदलता है तो इसकी सूचना वह 90 दिनों के अंदर यूपी बार काउंसिल को देगा। इसकी व्यवस्था की एडवोकट एक्ट-1961 में धारा 22 और 17 में की गई है।
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ऑल इंडिया बार काउंसिल कमाई करने के लिए द सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस रूल्स-2015 अधिवक्ताओं पर जबरदस्ती थोप रही है। जबकि, इसकी आवश्यकता नहीं है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि रूल्स से एक्ट को प्रभावित नहीं किया जा सकता है। लेकिन, ऑल इंडिया बार काउंसिल यही करने पर तुली है। इसी के तहत वह सीओपी नंबर नवीनीकरण के लिए हाल ही में पांच सौ रुपये लेकर फार्म भरवा रही है। जबकि, एक्ट के मुताबिक इसकी जरूरत ही नहीं है।
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