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हाईकोर्ट : रेलवे इम्प्लाइज मल्टी स्टेट सोसायटी के चुनाव की वैधता की चुनौती याचिका खारिज

Mon, 12 Jun 2023 06:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 12 Jun 2023 06:05 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने बृजेश कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में मल्टी स्टेट सोसायटी का चुनाव कराने के लिए निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करने का सेंट्रल रजिस्ट्रार को समादेश जारी करने की मांग की गई थी।

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Challenge petition challenging validity of election of Railway Employees Multi State Society dismissed
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नार्थ इस्टर्न एंड ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज मल्टी स्टेट प्राइमरी कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड गोरखपुर के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव की वैधता की चुनौती याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा 18 फरवरी 20 व19 फरवरी 20 को हुए चुनाव की मियाद के भीतर चुनौती न देने के कारण अंतिम हो गया। 90 दिन के भीतर चुनौती दी जानी चाहिए थी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने बृजेश कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में मल्टी स्टेट सोसायटी का चुनाव कराने के लिए निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करने का सेंट्रल रजिस्ट्रार को समादेश जारी करने की मांग की गई थी।

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सोसायटी की आम सभा 11 विभागों के डेलिगेट के चुनाव से गठित होती है। 50 हजार डेलिगेट उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व विहार राज्य से चुने जाते हैं, जो बोर्ड आफ डायरेक्टर का चुनाव करते हैं और बोर्ड अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव करता है। लंबी प्रक्रिया के बाद चुनाव संपन्न हुआ है। 

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मामले में याची 31 जुलाई 15 में हुए चुनाव में याची अध्यक्ष चुना गया। 2017 में उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। पांच साल बाद पुनः चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई।25 अक्तूबर 19 को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और 18 व 19 फरवरी 20 को चुनाव संपन्न हुआ। रिपोर्ट सेंट्रल रजिस्ट्रार को भेजी गई। इससे पहले याचिका में सहकारी बैंक में अनियमितता की जांच कराने की मांग की गई थी।

 

कोर्ट ने सेंट्रल रजिस्ट्रार को तय करने का आदेश दिया था। अनियमितता की शिकायत की जांच कमिश्नर गोरखपुर को सौपी गई है। याची के तीन बार अध्यक्ष रहने के कारण धारा 44 (2) के अंतर्गत चुनाव लड़ने के अयोग्य होने के आधार पर धारा 84 में अधिकरण गठित करने से इंकार कर दिया। दुबारा दाखिल याचिका  में संशोधन कर चुनाव की वैधता को चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा चुनाव संपन्न हो गया समय के भीतर चुनौती नहीं दी गई। ऐसे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

 

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