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CGHS News : सीजीएचएस में आकस्मिक व्यय के लिए पांच गुना अधिक एडवांस, मरीजों की सुविधाओं में भी होगा इजाफा

Mon, 23 Mar 2026 12:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 23 Mar 2026 12:44 PM IST
सार

सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के तहत संचालित सीजीएचएस इकाइयों, वेलनेस केंद्रों, आयुष वेलनेस केंद्रों, फील्ड कार्यालयों और अतिरिक्त निदेशकों के कार्यालयों के आकस्मिक व्यय (आवर्ती एवं गैर-आवर्ती दोनों) को पूरा करने के लिए स्थायी अग्रिम (इंप्रेस्ट मनी) में ढाई से पांच गुना वृद्धि की गई है।

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CGHS News: Five times more advance for contingency expenses in CGHS
सीजीएचएस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के तहत संचालित सीजीएचएस इकाइयों, वेलनेस केंद्रों, आयुष वेलनेस केंद्रों, फील्ड कार्यालयों और अतिरिक्त निदेशकों के कार्यालयों के आकस्मिक व्यय (आवर्ती एवं गैर-आवर्ती दोनों) को पूरा करने के लिए स्थायी अग्रिम (इंप्रेस्ट मनी) में ढाई से पांच गुना वृद्धि की गई है, ताकि दैनिक आकस्मिक व आपातकालीन खर्चों को पूरा किया जा सके।

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इससे सीजीएचएस की डिस्पेंसरियों व अपर निदेशक कार्यालयों के संचालन में सहूलियत होगी और वहां आने वाले मरीजों को भी सुविधा होगी। गर्मी नजदीक आ रही है। मरीजों के बैठने के स्थान पर लगे पंखे, कूलर की मरम्मत के लिए अब पर्याप्त एडवांस मिल सकेगा। अपर निदेशक कार्यालय को मिलने वाली स्थायी अग्रिम यानी इंप्रेस्ट मनी 20 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है।
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सीजीएचएस यूनिट, पॉलिक्नीलिक, लैब, वेलनेस सेंटर (एलोपैथी एवं आयुष), फील्ड कार्यालय एवं अस्पताल को मिलने वाली इंप्रेस्ट मनी की सीमा 10 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये की गई है। यह धनराशि केवल दैनिक आकस्मिक व्ययों के लिए होगी। इससे उपकरणों और यंत्रों की मरम्मत, अतिरिक्त पुर्जों की खरीद, अपरिहार्य कार्यात्मक उद्देश्यों के लिए आवश्यक स्टेशनरी की खरीद की जा सकेगी।
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इस धनराशि से रेफ्रिजरेटर की मरम्मत भी कराई जा सकेगी। रेफ्रिजरेटर में इंसुलिन आदि को उचित तापमान में रखा जाता है। रेफ्रिजरेटर बिगड़ने पर इंसुलिन खराब होने की आशंका बनी रहती है। अगर पहले से पर्याप्त धनराशि उपलब्ध रहेगी तो रेफ्रिजरेटर की मरम्मत समय से कराई जा सकेगी। वहीं, ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियाें की मरम्मत भी कराई जा सकेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थायी अग्रिम का उपयोग केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। देरी या दुरुपयोग होने पर वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। स्वीकार्यता के संबंध में संदेह होने पर लेखा विभाग से पूर्व स्पष्टीकरण प्राप्त करना होगा। यह खर्च भी ऑडिट के दायरे में आएगा।

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