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सीबीएसई: परीक्षा स्थगित होने पर खत्म हुई अभिभावकों की चिंता
Thu, 25 Jun 2020 11:16 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 25 Jun 2020 11:16 PM IST
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- फोटो : cbse
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सीबीएसई और आईसीएसई की बची परीक्षाएं नहीं कराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छात्रों, अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन ने राहत की सांस ली है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अभिभावकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई थी कि सीबीएसई एवं आईसीएसई की एक से 15 जुलाई के बीच प्रस्तावित परीक्षाएं रोक दी जाएं।
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सीबीएसई एवं आईसीएसई की ओर से अब दसवीं और बारहवीं के बच्चों को स्कूलों की ओर से किए गए आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक दिए जाएंगे। बोर्ड के इस निर्णय के बाद गंगागुरुकुलम की प्रधानाचार्या अल्पना डे का कहना है कि देखा जाता है कि स्कूल में आंतरिक मूल्यांकन को छात्र-छात्राएं बहुत गंभीरता से नहीं लेते, इस कारण से स्कूल स्तर पर उन्हें कम अंक मिल जाते हैं।
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ऐसे छात्रों के लिए बोर्ड की यह व्यवस्था एक सबक है। टैगोर पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे के अभिभावक विश्वनाथ मिश्र का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं, जो स्कूल वालों की नाइंसाफी के शिकार होते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक की उम्मीद करने वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था नुकसान कर सकती है। अभिभावक केके शुक्ला का कहना है कि परीक्षा स्थगित किए जाने से अब बच्चों में संक्रमण का खतरा टल गया है।
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महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या सुष्मिता कानूनगो का कहना है कि कुछ बच्चे तो बोर्ड परीक्षा की तैयारी में अपने को इस तरह से लगा लेते हैं कि वह स्कूल की ओर से होने वाले प्री-बोर्ड एक्जाम में भी शामिल नहीं होते। अब इन छात्रों का मूल्यांकन पूरे वर्ष हुई परीक्षाओं के आधार पर किया जाएगा।
अब वह परीक्षा छोड़ने से पहले सोचेंगे कि आंतरिक मूल्यांकन का क्या मतलब है। सेंट जोसफ कॉलेज के प्रधानाचार्य फादर थामस कुमार का कहना है कि अभी सीआईएससीई से उनके पास कोई दिशानिर्देश नहीं आया है। फिलहाल बच्चे की ओर से पूरे वर्ष किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर उसका मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद भी बच्चों को लगता है कि परीक्षा में उन्हें कम अंक मिले हैं तो वह इम्प्रूवमेंट परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।