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पीएम का आपत्तिजनक पोस्टर लगाने का मामला : दो आरोपियों को जमानत, तीन भेजे गए जेल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आपत्तिजनक पोस्टर लगाने में गिरफ्तार पांचों आरोपी मंगलवार को कोर्ट में पेश किए गए। इस दौरान इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के संचालक अनिकेत केसरी व प्रिंटिंग प्रेस मालिक अभय कुमार सिंह को तो जमानत मिल गई। लेकिन ठेकेदार राजेश कुमार केसरवानी व दोनों मजदूर शिव व धर्मेंद्र मुचलका नहीं भर सके, ऐसे में जमानत नहीं मिल पाने पर उन्हें जेल भेज दिया गया। उधर पुलिस इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड तेलंगाना निवासी साईं का पता लगाने में जुट गई है।
पांच आरोपियों को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार दोपहर में कर्नलगंज पुलिस उन्हें लेकर कोर्ट पहुंची। मुकदमे में जो धाराएं लगी थीं, उनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान था। ऐसे में सभी आरोपियों को जमानत मिल गई। हालांकि ठेकेदार व दो मजदूर मुचलका नहीं भर पाए। ऐसे में उन्हें जेल भेज दिया गया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस तीनों को नैनी जेल में दाखिल कराकर वापस चली आई।
जबकि अन्य दोनों आरोपियों को छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि इवेंट मैनेजमेंट कंपनी संचालक अनिकेत ने प्रिंटिंग प्रेस संचालक अभय को पोस्टर छापने व लगवाने का ऑर्डर दिया था। जिसके बाद अभय ने ठेकेदार राजेश को यह काम दिया। फिर राजेश ने दोनों मजदूरों को कुछ रुपये देकर यह पोस्टर लगवाया।
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मास्टरमाइंड को ईमेल से भेजी थी पोस्टर की सॉफ्ट कॉपी
प्रधानमंत्री का आपत्तिजनक पोस्टर लगाने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। पता चला है कि ठेका देने से लेकर पोस्टर छपने के लिए भेजे जाने तक मास्टरमाइंड साईं इवेंट कंपनी संचालक अनिकेत के लगातार संपर्क में बना हुआ था। अनिकेत ने उसके पास ईमेल से पोस्टर के डिजाइन की सॉफ्ट कॉपी भेजी थी। इसे बाकायदा जांचने-परखने के बाद ही मास्टरमाइंड ने इसे ओके किया था और इसके बाद पोस्टर छापा गया। पुलिस ईमेल आईडी व मोबाइल नंबर के जरिये उसकी तलाश में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, अनिकेत ने पूछताछ में बताया कि साईं उससे लगातार संपर्क में बना रहा। उसने फोन से उससे बातचीत में ही महंगाई को लेकर पोस्टर छपवाने व इसे लगवाने का ठेका दिया। यही नहीं पोस्टर छपने से पहले इसका डिजाइन चेक भी किया।
इसके लिए उसने अनिकेत से अपनी ईमेल आईडी पर पोस्टर के डिजाइन की सॉफ्ट कॉपी भी मंगवाई। प्रूफ देखने के बाद उसने इसे ओके किया और इसके बाद अनिकेत के कहने पर अभय ने पोस्टर छापा। कर्नलगंज इंस्पेक्टर विश्वजीत सिंह ने बताया कि ईमेल आईडी व मोबाइल नंबर से उसकी तलाश की कोशिश की जा रही है। इस संबंध में साइबर सेल से भी मदद ली जाएगी।
मोबाइल स्विच ऑफ कर हुआ लापता
उधर मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद मास्टरमाइंड साईं मोबाइल बंद कर गायब हो गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एक दिन पहले तक उसका मोबाइल ऑन था। लेकिन मंगलवार को उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया है। फिलहाल उसके बारे में यह जानकारी मिली है कि वह सिकंदराबाद का रहने वाला है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर की डिटेल निकलवाई जा रही है ताकि उसका पता मालूम चल सके।
पार्टी ने किया किनारा, कहा खुद से किया काम
उधर मामले के खुलासे के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति ने प्रकरण से किनारा कर लिया है। मुकदमे के विवेचक ने मंगलवार को पार्टी पदाधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि र्साईं उनका कार्यकर्ता है। लेकिन उसके इस कृत्य से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है और न ही इस संबंध में उसे पार्टी की ओर से कोई दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रिंटिंग प्रेस की रिपोर्ट भेजी गई
उधर इस मामलेे में बैरहना स्थित उस प्रिंटिंग प्रेस पर भी कार्रवाई की तैयारी है जहां पोस्टर छापे गए। दरअसल जानकारों का कहना है कि आपत्तिजनक पोस्टर छापना कानूनन गलत है। यही नहीं पोस्टर जिस पिलर पर होर्डिंग के रूप में लगवाया गया, वह नगर निगम का है। लेकिन इसके लिए नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली गई। कर्नलगंज पुलिस ने इस मामले में नगर निगम व जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी है।
इसलिए चुना पुलिस लाइन गेट
सूत्रों का कहना है कि न सिर्फ पोस्टर का डिजाइन बल्कि मास्टरमाइंड साईं ने ही इसे लगाने का स्थान भी तय किया था। पूछताछ में अनिकेत ने बताया है कि र्साईं ने उससे पूछा था कि कौन-कौन से ऐेसे स्पॉट हैं जहां पोस्टर लगाया जा सकता है। यह भी कहा था कि स्पॉट ऐसा होना चाहिए, जहां स्पष्ट रूप से यह देखा जा सके और दूर से भी यह नजर आए।
इसके बाद अनिकेत ने उसे पत्थर गिरिजाघर, संगम व रिजर्व पुलिस लाइन गेट समेत अन्य स्पॉट का नाम सुझाया था। बाद में यह पता चलने पर कि रिजर्व पुलिस लाइन गेट प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर स्थित है, साईं ने इसे ही ओकेकिया था।
खंगालनी पड़ी 100 से ज्यादा कैमरों की फुटेज
इस मामले के खुलासे के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मामले के खुलासे के लिए एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में कुल तीन टीमें बनाई गईं। इन तीन टीमों का निर्देशन सीओ कर्नलगंज अजीत सिंह चौहान कर रहे थे। इसके बाद पोस्टर लगाने वाले मजदूरों को ट्रेस करने के लिए उसे स्टैनली रोड से लेकर बैरहना, कीडगंज तक 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ी। इनमें सरकारी के साथ ही दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों पर लगे कई निजी कैमरे भी शामिल हैं। फुटेज खंगालते हुए पुलिस दोनों मजदूरों तक पहुंची और फिर एक-एक कर साजिश में शामिल अन्य किरदार भी सामने आते गए। जिसके बाद मामले का खुलासा हो गया।
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पांच आरोपियों को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार दोपहर में कर्नलगंज पुलिस उन्हें लेकर कोर्ट पहुंची। मुकदमे में जो धाराएं लगी थीं, उनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान था। ऐसे में सभी आरोपियों को जमानत मिल गई। हालांकि ठेकेदार व दो मजदूर मुचलका नहीं भर पाए। ऐसे में उन्हें जेल भेज दिया गया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस तीनों को नैनी जेल में दाखिल कराकर वापस चली आई।
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जबकि अन्य दोनों आरोपियों को छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि इवेंट मैनेजमेंट कंपनी संचालक अनिकेत ने प्रिंटिंग प्रेस संचालक अभय को पोस्टर छापने व लगवाने का ऑर्डर दिया था। जिसके बाद अभय ने ठेकेदार राजेश को यह काम दिया। फिर राजेश ने दोनों मजदूरों को कुछ रुपये देकर यह पोस्टर लगवाया।
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मास्टरमाइंड को ईमेल से भेजी थी पोस्टर की सॉफ्ट कॉपी
प्रधानमंत्री का आपत्तिजनक पोस्टर लगाने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। पता चला है कि ठेका देने से लेकर पोस्टर छपने के लिए भेजे जाने तक मास्टरमाइंड साईं इवेंट कंपनी संचालक अनिकेत के लगातार संपर्क में बना हुआ था। अनिकेत ने उसके पास ईमेल से पोस्टर के डिजाइन की सॉफ्ट कॉपी भेजी थी। इसे बाकायदा जांचने-परखने के बाद ही मास्टरमाइंड ने इसे ओके किया था और इसके बाद पोस्टर छापा गया। पुलिस ईमेल आईडी व मोबाइल नंबर के जरिये उसकी तलाश में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, अनिकेत ने पूछताछ में बताया कि साईं उससे लगातार संपर्क में बना रहा। उसने फोन से उससे बातचीत में ही महंगाई को लेकर पोस्टर छपवाने व इसे लगवाने का ठेका दिया। यही नहीं पोस्टर छपने से पहले इसका डिजाइन चेक भी किया।
इसके लिए उसने अनिकेत से अपनी ईमेल आईडी पर पोस्टर के डिजाइन की सॉफ्ट कॉपी भी मंगवाई। प्रूफ देखने के बाद उसने इसे ओके किया और इसके बाद अनिकेत के कहने पर अभय ने पोस्टर छापा। कर्नलगंज इंस्पेक्टर विश्वजीत सिंह ने बताया कि ईमेल आईडी व मोबाइल नंबर से उसकी तलाश की कोशिश की जा रही है। इस संबंध में साइबर सेल से भी मदद ली जाएगी।
मोबाइल स्विच ऑफ कर हुआ लापता
उधर मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद मास्टरमाइंड साईं मोबाइल बंद कर गायब हो गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एक दिन पहले तक उसका मोबाइल ऑन था। लेकिन मंगलवार को उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया है। फिलहाल उसके बारे में यह जानकारी मिली है कि वह सिकंदराबाद का रहने वाला है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर की डिटेल निकलवाई जा रही है ताकि उसका पता मालूम चल सके।
पार्टी ने किया किनारा, कहा खुद से किया काम
उधर मामले के खुलासे के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति ने प्रकरण से किनारा कर लिया है। मुकदमे के विवेचक ने मंगलवार को पार्टी पदाधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि र्साईं उनका कार्यकर्ता है। लेकिन उसके इस कृत्य से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है और न ही इस संबंध में उसे पार्टी की ओर से कोई दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रिंटिंग प्रेस की रिपोर्ट भेजी गई
उधर इस मामलेे में बैरहना स्थित उस प्रिंटिंग प्रेस पर भी कार्रवाई की तैयारी है जहां पोस्टर छापे गए। दरअसल जानकारों का कहना है कि आपत्तिजनक पोस्टर छापना कानूनन गलत है। यही नहीं पोस्टर जिस पिलर पर होर्डिंग के रूप में लगवाया गया, वह नगर निगम का है। लेकिन इसके लिए नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली गई। कर्नलगंज पुलिस ने इस मामले में नगर निगम व जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी है।
इसलिए चुना पुलिस लाइन गेट
सूत्रों का कहना है कि न सिर्फ पोस्टर का डिजाइन बल्कि मास्टरमाइंड साईं ने ही इसे लगाने का स्थान भी तय किया था। पूछताछ में अनिकेत ने बताया है कि र्साईं ने उससे पूछा था कि कौन-कौन से ऐेसे स्पॉट हैं जहां पोस्टर लगाया जा सकता है। यह भी कहा था कि स्पॉट ऐसा होना चाहिए, जहां स्पष्ट रूप से यह देखा जा सके और दूर से भी यह नजर आए।
इसके बाद अनिकेत ने उसे पत्थर गिरिजाघर, संगम व रिजर्व पुलिस लाइन गेट समेत अन्य स्पॉट का नाम सुझाया था। बाद में यह पता चलने पर कि रिजर्व पुलिस लाइन गेट प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर स्थित है, साईं ने इसे ही ओकेकिया था।
खंगालनी पड़ी 100 से ज्यादा कैमरों की फुटेज
इस मामले के खुलासे के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मामले के खुलासे के लिए एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में कुल तीन टीमें बनाई गईं। इन तीन टीमों का निर्देशन सीओ कर्नलगंज अजीत सिंह चौहान कर रहे थे। इसके बाद पोस्टर लगाने वाले मजदूरों को ट्रेस करने के लिए उसे स्टैनली रोड से लेकर बैरहना, कीडगंज तक 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ी। इनमें सरकारी के साथ ही दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों पर लगे कई निजी कैमरे भी शामिल हैं। फुटेज खंगालते हुए पुलिस दोनों मजदूरों तक पहुंची और फिर एक-एक कर साजिश में शामिल अन्य किरदार भी सामने आते गए। जिसके बाद मामले का खुलासा हो गया।