बर्बरता का शिकार मासूम : बच्ची का हाल जानने कारा की टीम पहुंची छावनी अस्पताल
दंपती की बर्बरता का शिकार हुई बच्ची का हाल जानने वृहस्पतिवार को कारा (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) के सहायक निदेशक आशुतोष शर्मा, असिस्टेंट डायरेक्टर निधि व डीपीओ (जिला कार्यक्रम अधिकारी) पंकज मिश्रा छावनी सामान्य अस्पताल पहुंचे।
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दंपती की बर्बरता का शिकार हुई बच्ची का हाल जानने वृहस्पतिवार को कारा (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) के सहायक निदेशक आशुतोष शर्मा, असिस्टेंट डायरेक्टर निधि व डीपीओ (जिला कार्यक्रम अधिकारी) पंकज मिश्रा छावनी सामान्य अस्पताल पहुंचे। टीम ने अस्पताल में करीब एक घंटे से अधिक समय बिताया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मचारियों से पूछताछ के अलावा बच्ची की हालत को परखा।
कारा के सहायक निदेशक आशुतोष शर्मा व असिस्टेंट डायरेक्टर निधि सबसे पहले पीड़ित बच्ची ने मिलने पहुंचे। जहां उन्होंने करीब 20 तक बच्ची से बात की। इस दौरान बच्ची की मानसिक स्थिति को परखा गया। वहीं मौके पर मौजूद परियोजना प्रमुख सिद्धार्थ पांडेय से इलाज संबंधी जानकारी ली गई। डीपीओ पंकज मिश्रा ने बताया कि बच्ची के ठीक होने के बाद उसे बालिका संरक्षण ग्रह में रखा जाएगा। जहां उसकी बेहतर परवरिश पर जोर होगा।
बच्ची को शिक्षा के साथ-साथ अच्छा वातावरण दिया जाएगा। जिससे वह बुरे दौर को भूल सके। वहीं सहायक निदेशक आशुतोष शर्मा ने बताया कि बच्ची पर हुई बर्बरता की जांच चल रही है। जिसके तहत लखनऊ, कानपुर व प्रयागराज की बाल कल्याण कमेटी से मामले की जानकारी इकट्ठा की जा रही है। ऐसे में दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय संस्था करती है निगरानी
बच्चे को गोद लेने के लिए कारा (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। वहीं गोद लेने के बाद स्थानीय संस्था दो साल में छह बार बच्चे का पालन पोषण किस प्रकार हो रहा है, इसकी निगरानी करती है। जिसमें पहले साल चार बार और दूसरे साल दो बार कारा को बच्चे के पालन पोषण की रिपोर्ट सौंपनी होती है। सिन्हा दंपति द्वारा पीड़ित बच्ची को जून 2022 में गोद लिया गया था। जिसके बाद उस पर लगातार अत्याचार हो रहा था। इस दौरान फरवरी 2023 में प्रयागराज की बाल कल्याण कमेटी द्वारा बच्ची की रिपोर्ट कारा को सौंपी गई थी।
हर साल 5 हजार बच्चे लिए जाते हैं गोद
जिला कार्यक्रम अधिकारी पंकज मिश्रा ने बताया कि प्रति वर्ष पांच हजार बच्चे गोद लिए जाते हैं। बच्चे को गोद लेते समय माता पिता का शारीरिक, मानसिक, भावात्मक और आर्थिक दृष्टि से सक्षम होना जरूरी है। यह बात भी प्रमाणित होनी चाहिए कि संभावित अभिभावकों को कोई जानलेवा बीमारी तो नहीं है। इसके अलावा अभिभावकों को आपसी सहमति को होना जरूरी है, अकेली महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है। जबकि अकेला पुरुष सिर्फ लड़के को ही गोद ले सकता है।
हमारा एक मात्र उद्देश्य है कि बच्ची का वर्तमान व भविष्य सुरक्षित किया जाए। जिसके बाद बच्ची के खानपान, रहन सहन से लेकर उसकी अच्छी शिक्षा की व्यवस्था बालिका संरक्षण ग्रह में की जाएगी। - पंकज मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
सिन्हा दंपति को गिरफ्तार किया जा चुका है। बच्ची की निगरानी के दौरान कहां चूक हुई, इसकी जांच की जा रही है। वहीं दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होना तय है। - आशुतोष शर्मा, सहायक निदेशक, कारा (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी)।