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प्रयागराज: रिक्त पदों पर कट ऑफ मार्क से नीचे के अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
Sat, 25 Sep 2021 11:14 PM IST
सुशील कुमार कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Sat, 25 Sep 2021 11:14 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक पीठ ने शंकरसन दास केस में यह फैसला दिया है कि अगर वेटिंग लिस्ट बनाने का कोई प्रावधान नहीं है तो कट ऑफ मार्क से नीचे अंक पाने वाले ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति पाने का कोई अधिकार नहीं बनता और उनके द्वारा नियुक्ति पाने के लिए दायर याचिका पोषणीय नहीं होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि चयनित अभ्यर्थियों के सेवा में ज्वाइन न करने से बचे पदों पर कट ऑफ मार्क से नीचे अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि भर्ती में अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची तैयार करने का कोई प्रावधान नहीं है तो मेरिट से नीचे अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं की जा सकती है।
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यह निर्णय न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने मनोज कुमार मिश्र व 6 अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक पीठ ने शंकरसन दास केस में यह फैसला दिया है कि अगर वेटिंग लिस्ट बनाने का कोई प्रावधान नहीं है तो कट ऑफ मार्क से नीचे अंक पाने वाले ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति पाने का कोई अधिकार नहीं बनता और उनके द्वारा नियुक्ति पाने के लिए दायर याचिका पोषणीय नहीं होगी।
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याचिका के अनुसार याचीगण ने लेखपाल भर्ती के लिए निकले विज्ञापन के तहत नौकरी के लिए आवेदन किया था। यह भर्ती अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग जारी विज्ञापन के तहत होनी थी। विज्ञापन संबंधित जिले के जिलाधिकारी ने निकाला था। याचीगण ने आवेदन किया था, परंतु उनके अंक कट ऑफ मार्क से नीचे होने के कारण उनका लेखपाल पद पर चयन नहीं हो सका था।
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याचिका दाखिल कर मांग की गई थी कि चूंकि चयनित अभ्यर्थियों में से कई ने ज्वाइन नहीं किया है। इस कारण ज्वाइन न करने से रिक्त रह गए पदों पर उनकी नियुक्ति की जाए। सरकार ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा था कि इस भर्ती में प्रतीक्षा सूची बनाने का प्रावधान नहीं है। याचीगण का चयन सूची में नाम होने मात्र से उन्हें नियुक्ति पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वैसे भी इस लेखपाल भर्ती को पूरा हुए 6 वर्ष बीत चुके हैं। किसी स्पष्ट प्रावधान के अभाव में याचिका में चाही गई मांग पूरी नहीं की जा सकती है।