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केनरा बैंक को करोड़ों का चूना लगाने वाले कंपनी निदेशक की जमानत खारिज
Sat, 03 Oct 2020 02:21 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 03 Oct 2020 02:21 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से लोन लेकर उसे करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के आरोपी सैगान इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजेश मेहता की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। मेहता पर बैंक को 10.49 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इस संबंध में सीबीआई ने दिल्ली में केस दर्ज किया है।
केनरा बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर ने इस मामले में मेहता सहित छह लोगों के खिलाफ दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि मई 2015 में याची ने कंपनी के अन्य निदेशकों से सांठगांठ कर कंपनी ने चार करोड़ रुपये का कर्ज बैंक से लिया और प्रापर्टी के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 9.5 करोड़ रुपये की फंड लिमिट हासिल की।
जिस प्रापर्टी के एवज में लोन लिया गया, वह याची मेहता द्वारा वर्ष 2008 में ही बेची जा चुकी थी। सीबीआई के वकील असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि याची ने बैंक के साथ फ्राड किया है। उसने प्रापर्टी के फर्जी दस्तावेज बनाए हैं और पहले ही बेची जा चुकी संपत्ति को बंधक रख दिया। कोर्ट ने जमानत का आधार न पाते हुए अर्जी खारिज कर दी।
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केनरा बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर ने इस मामले में मेहता सहित छह लोगों के खिलाफ दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि मई 2015 में याची ने कंपनी के अन्य निदेशकों से सांठगांठ कर कंपनी ने चार करोड़ रुपये का कर्ज बैंक से लिया और प्रापर्टी के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 9.5 करोड़ रुपये की फंड लिमिट हासिल की।
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जिस प्रापर्टी के एवज में लोन लिया गया, वह याची मेहता द्वारा वर्ष 2008 में ही बेची जा चुकी थी। सीबीआई के वकील असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि याची ने बैंक के साथ फ्राड किया है। उसने प्रापर्टी के फर्जी दस्तावेज बनाए हैं और पहले ही बेची जा चुकी संपत्ति को बंधक रख दिया। कोर्ट ने जमानत का आधार न पाते हुए अर्जी खारिज कर दी।
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