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हाईकोर्ट : आधारहीन आरोपों पर नहीं दे सकते पुनर्मतगणना का आदेश, ग्राम प्रधान चुनाव की पुनर्मतगणना का आदेश रद्द

Sat, 29 Jul 2023 11:55 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 29 Jul 2023 11:55 AM IST
सार

कोर्ट ने मुरादाबाद की तहसील बिलारी की ग्राम पंचायत लालपुर गंगवारी के प्रधान के चुनाव की पुनर्मतगणना करने के पीठासीन अधिकारी एस डी एम बिलारी के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और उन्हें दो माह में पक्षों को सुनकर चुनाव याचिका तय करने का निर्देश दिया है।

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Can't order recount on baseless allegations, cancels recount of village head election
Court - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि चुनाव में वोट की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है। आधारहीन आरोप पर चुनाव की पुनर्मतगणना का आदेश नहीं दिया जा सकता। पुनर्मतगणना का आदेश ऐसे तथ्य पर ही दिए जा सकते हैं जिनसे चुनाव परिणाम प्रभावित होता है। केवल हारे हुए प्रत्याशी के कुछ वोट अवैध घोषित होने के कारण पुनर्मतगणना का आदेश नहीं दिया जा सकता।

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कोर्ट ने मुरादाबाद की तहसील बिलारी की ग्राम पंचायत लालपुर गंगवारी के प्रधान के चुनाव की पुनर्मतगणना करने के पीठासीन अधिकारी एस डी एम बिलारी के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और उन्हें दो माह में पक्षों को सुनकर चुनाव याचिका तय करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने ग्राम प्रधान रूकमे आलम की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

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2021 में हुए पंचायत चुनाव में याची चार वोट से विजयी घोषित हुआ। हारे प्रत्याशी जावेद ने चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी और पुनर्मतगणना की मांग की। कहा कि बेईमानी से उसके साथ वोट अवैध घोषित किए गए हैं। इनकी गणना से वह विजयी हो जायेगा। पीठासीन अधिकारी ने प्रधान से जवाब मांगा और नौ वाद विंदु तय किए किंतु इन पर फैसला किए बगैर पक्षकार की इच्छा पर पुनर्मतगणना का आदेश जारी कर दिया जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।

विपक्षी ने याचिका को पोषणीयता पर यह कहते हुए आपत्ति की कि याची को पुनरीक्षण अर्जी दाखिल करने का वैकल्पिक उपचार प्राप्त है। याचिका खारिज की जाय। किंतु कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। नियम चार का उल्लंघन किया गया है। नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया गया। पुनर्मतगणना का आदेश पसंद से नहीं, कानूनी प्रक्रिया का पालन करके ही दिया जा सकता है।

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